एसटी हसन का BJP पर निशाना: विकास-रोजगार छोड़ हिंदू-मुस्लिम राजनीति में उलझी है भाजपा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद एसटी हसन ने 26 मई 2025 को मुरादाबाद में कहा कि देश की राजनीति विकास, रोजगार, किसान, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों से भटककर हिंदू-मुस्लिम बहस में उलझ गई है। उनके अनुसार भारतीय जनता पार्टी (BJP) जानबूझकर ऐसे विवाद खड़े करती है जिनका मकसद मुसलमानों को परेशान करना और समाज में दूरी बढ़ाना है। यह बयान ईद-उल-अजहा (बकरीद) से पहले कुर्बानी को लेकर तेज हुई सियासी बहस के बीच आया है।
मुख्य आरोप और बयान
हसन ने कहा कि राजनीति का असल मकसद जनता की भलाई होना चाहिए, न कि धर्म के आधार पर समाज को बाँटना। उनके शब्दों में, आज के माहौल में आम लोगों से जुड़े ज़रूरी सवाल — रोजगार, खेती, सेहत, तालीम — पीछे छूट जाते हैं और बेवजह के विवाद सुर्खियाँ बनते हैं। उन्होंने इस स्थिति को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
नितेश राणे के बयान पर पलटवार
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के 'वर्चुअल बकरीद' वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हसन ने कहा कि सवाल उठाने वालों को पहले अपने अतीत और परिवार पर नज़र डालनी चाहिए। उन्होंने कहा, "नितेश राणे के पिता बकरियों का व्यापार करते थे। उनकी मांस की दुकानें थीं। वहाँ मांस और मछली, सब कुछ बिकता था। आज भी उनकी माँ के नाम पर एक रेस्टोरेंट है जहाँ नॉन-वेज खाना परोसा जाता है। लोग वहाँ जाते हैं और खाना खाते हैं। इन भाजपा वालों के कई चेहरे हैं। जब आप इनकी दो-तीन परतें हटाएंगे तो आपको इनका असली चेहरा दिखाई देगा।"
बकरीद पर शांति की अपील
हसन ने बकरीद के अवसर पर लोगों से संयम और सम्मान बरतने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यह त्योहार त्याग और इंसानियत का प्रतीक है और इसे इस तरह मनाया जाए कि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुँचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए और कानून का पालन अनिवार्य है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बकरीद से पहले कुर्बानी के नियमों और स्थानों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक त्योहारों के इर्द-गिर्द राजनीतिक विवाद खड़े करना एक स्थापित चुनावी रणनीति बन चुकी है जो हर बार असली जन-मुद्दों को हाशिये पर धकेल देती है। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी (SP) और BJP के बीच उत्तर प्रदेश में यह तनातनी नई नहीं है, लेकिन बकरीद के नज़दीक इसकी तीव्रता बढ़ जाती है।
आगे क्या
हसन के बयान के बाद BJP की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बकरीद से पहले के इस राजनीतिक माहौल में विभिन्न दलों के बयान और तेज होने की संभावना है।