बलूच कार्यकर्ता मीर यार बलोच का ईयू को पत्र: पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार बनाना 'खतरनाक और वास्तविकता से परे'
सारांश
मुख्य बातें
प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कलास को पत्र लिखकर पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार के रूप में नामित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। 2 जून को क्वेटा से जारी इस पत्र में उन्होंने इस कदम को 'चोर को ही चोरी खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपने' जैसा बताया। यह पत्र इस्लामाबाद में सोमवार को संपन्न आठवें पाकिस्तान-ईयू रणनीतिक संवाद के बाद जारी संयुक्त बयान की प्रतिक्रिया में आया है।
पत्र की मुख्य बातें
मीर यार बलोच ने अपने पत्र में कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को पाकिस्तान-ईयू संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताना 'वास्तविकता से परे और खतरनाक' है। उनका तर्क है कि पाकिस्तान पर दशकों से आतंकवादी संगठनों को शरण देने और प्रॉक्सी नेटवर्क का संचालन करने के आरोप लगते रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'दशकों से चले आ रहे सबूतों के बावजूद किसी ऐसे देश को आतंकवाद-रोधी साझेदार मानना, जो प्रॉक्सी नीतियों और उग्रवाद से जुड़ा रहा है, एक गंभीर विरोधाभास है।' उन्होंने पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई पर उग्रवादियों को प्रोत्साहित करने और सहायता देने का आरोप लगाया।
ओसामा बिन लादेन का संदर्भ
बलोच ने अपने पत्र में एक ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया को यह याद रखना चाहिए कि दुनिया का सबसे वांछित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में पाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि इस तथ्य के बाद पाकिस्तान के आधिकारिक दावों पर आँख मूंदकर भरोसा करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप वर्तमान में इस्लामिक चरमपंथ और कट्टरवाद के जिस खतरे का सामना कर रहा है, उसकी ऐतिहासिक जड़ें कथित तौर पर पाकिस्तान से जुड़ी हैं।
जीएसपी प्लस और बलूचिस्तान में मानवाधिकार
मीर यार बलोच ने यूरोपीय संघ द्वारा पाकिस्तान को दिए गए जनरलाइज्ड स्किम ऑफ प्रिफरेंसेस प्लस (जीएसपी प्लस) का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि यदि यह व्यापार सुविधा मानवाधिकारों के सम्मान से जुड़ी है, तो बलूचिस्तान में मानवाधिकार स्थिति की स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जाँच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
उन्होंने यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठनों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से अपील की कि वे बलूचिस्तान जाकर जमीनी स्थिति का सीधे आकलन करें और केवल पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों पर निर्भर न रहें। उन्होंने जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों से मुलाकात करने की भी माँग की।
ईयू से दोहरे मानक न अपनाने की अपील
पत्र के अंत में मीर यार बलोच ने यूरोपीय संघ से आग्रह किया कि यदि वह वास्तव में 'मानव गरिमा, न्याय और स्वतंत्रता' का समर्थक है, तो उसे बलूचिस्तान पर भी वही मानक लागू करने चाहिए जो अन्य वैश्विक संघर्षों में अपनाए जाते हैं।
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पश्चिमी देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप और 'जबरन गुमशुदगी' के मामले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं।