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बलूच कार्यकर्ता मीर यार बलोच का ईयू को पत्र: पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार बनाना 'खतरनाक और वास्तविकता से परे'

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बलूच कार्यकर्ता मीर यार बलोच का ईयू को पत्र: पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार बनाना 'खतरनाक और वास्तविकता से परे'

सारांश

बलूच कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने ईयू की काजा कलास को सीधे पत्र लिखकर चेताया — पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार बनाना 'चोर को चोरी रोकने की जिम्मेदारी देने' जैसा है। आठवें पाकिस्तान-ईयू रणनीतिक संवाद के बाद आया यह पत्र जीएसपी प्लस और बलूचिस्तान में स्वतंत्र जाँच की माँग उठाता है।

मुख्य बातें

बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने 2 जून को ईयू की उच्च प्रतिनिधि काजा कलास को पत्र लिखा।
पत्र आठवें पाकिस्तान-ईयू रणनीतिक संवाद के बाद जारी संयुक्त बयान की प्रतिक्रिया में है।
बलोच ने पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार बनाने को 'वास्तविकता से परे और खतरनाक' बताया।
पाकिस्तानी सेना और आईएसआई पर उग्रवादियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया; ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद में मिलने का संदर्भ दिया।
जीएसपी प्लस को बलूचिस्तान में स्वतंत्र मानवाधिकार जाँच से जोड़ने की माँग की।
ईयू, संयुक्त राष्ट्र और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से बलूचिस्तान में जमीनी आकलन की अपील।

प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कलास को पत्र लिखकर पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार के रूप में नामित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। 2 जून को क्वेटा से जारी इस पत्र में उन्होंने इस कदम को 'चोर को ही चोरी खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपने' जैसा बताया। यह पत्र इस्लामाबाद में सोमवार को संपन्न आठवें पाकिस्तान-ईयू रणनीतिक संवाद के बाद जारी संयुक्त बयान की प्रतिक्रिया में आया है।

पत्र की मुख्य बातें

मीर यार बलोच ने अपने पत्र में कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को पाकिस्तान-ईयू संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताना 'वास्तविकता से परे और खतरनाक' है। उनका तर्क है कि पाकिस्तान पर दशकों से आतंकवादी संगठनों को शरण देने और प्रॉक्सी नेटवर्क का संचालन करने के आरोप लगते रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'दशकों से चले आ रहे सबूतों के बावजूद किसी ऐसे देश को आतंकवाद-रोधी साझेदार मानना, जो प्रॉक्सी नीतियों और उग्रवाद से जुड़ा रहा है, एक गंभीर विरोधाभास है।' उन्होंने पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई पर उग्रवादियों को प्रोत्साहित करने और सहायता देने का आरोप लगाया।

ओसामा बिन लादेन का संदर्भ

बलोच ने अपने पत्र में एक ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया को यह याद रखना चाहिए कि दुनिया का सबसे वांछित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में पाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि इस तथ्य के बाद पाकिस्तान के आधिकारिक दावों पर आँख मूंदकर भरोसा करना उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप वर्तमान में इस्लामिक चरमपंथ और कट्टरवाद के जिस खतरे का सामना कर रहा है, उसकी ऐतिहासिक जड़ें कथित तौर पर पाकिस्तान से जुड़ी हैं।

जीएसपी प्लस और बलूचिस्तान में मानवाधिकार

मीर यार बलोच ने यूरोपीय संघ द्वारा पाकिस्तान को दिए गए जनरलाइज्ड स्किम ऑफ प्रिफरेंसेस प्लस (जीएसपी प्लस) का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि यदि यह व्यापार सुविधा मानवाधिकारों के सम्मान से जुड़ी है, तो बलूचिस्तान में मानवाधिकार स्थिति की स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जाँच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।

उन्होंने यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठनों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से अपील की कि वे बलूचिस्तान जाकर जमीनी स्थिति का सीधे आकलन करें और केवल पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों पर निर्भर न रहें। उन्होंने जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों से मुलाकात करने की भी माँग की।

ईयू से दोहरे मानक न अपनाने की अपील

पत्र के अंत में मीर यार बलोच ने यूरोपीय संघ से आग्रह किया कि यदि वह वास्तव में 'मानव गरिमा, न्याय और स्वतंत्रता' का समर्थक है, तो उसे बलूचिस्तान पर भी वही मानक लागू करने चाहिए जो अन्य वैश्विक संघर्षों में अपनाए जाते हैं।

यह पत्र ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पश्चिमी देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप और 'जबरन गुमशुदगी' के मामले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और सैन्य कार्रवाइयों के आरोप वर्षों से अनसुने रहे हैं। ओसामा बिन लादेन वाला संदर्भ पुराना है, लेकिन इसकी प्रासंगिकता इसलिए बनी रहती है क्योंकि पश्चिम ने उस प्रकरण के बाद भी पाकिस्तान के साथ सामरिक संबंध नहीं तोड़े। असली सवाल यह है कि क्या ईयू अपने व्यापार और सुरक्षा हितों को बलूचिस्तान में जवाबदेही की माँग से ऊपर रखता रहेगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीर यार बलोच ने ईयू को पत्र क्यों लिखा?
मीर यार बलोच ने यह पत्र इस्लामाबाद में हुए आठवें पाकिस्तान-ईयू रणनीतिक संवाद के बाद जारी उस संयुक्त बयान के विरोध में लिखा, जिसमें पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी साझेदार बताया गया था। उनका कहना है कि पाकिस्तान पर दशकों से प्रॉक्सी नेटवर्क और उग्रवाद से जुड़े होने के आरोप हैं, इसलिए यह नामांकन वास्तविकता से परे और खतरनाक है।
जीएसपी प्लस और बलूचिस्तान का क्या संबंध है?
जीएसपी प्लस यूरोपीय संघ की वह व्यापार सुविधा है जो मानवाधिकारों के पालन की शर्त पर दी जाती है। मीर यार बलोच का तर्क है कि यदि यह सुविधा वास्तव में मानवाधिकारों से जुड़ी है, तो बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और अन्य उल्लंघनों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच होनी चाहिए।
पाकिस्तान-ईयू रणनीतिक संवाद में क्या हुआ था?
आठवाँ पाकिस्तान-ईयू रणनीतिक संवाद इस्लामाबाद में सोमवार को आयोजित हुआ, जिसके बाद जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का अहम हिस्सा बताया गया। इसी बयान पर मीर यार बलोच ने ईयू की उच्च प्रतिनिधि काजा कलास को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई।
बलोच ने ओसामा बिन लादेन का उल्लेख क्यों किया?
मीर यार बलोच ने यह तर्क देने के लिए ओसामा बिन लादेन का संदर्भ दिया कि दुनिया का सबसे वांछित आतंकवादी पाकिस्तान के एबटाबाद में पाया गया था। उनके अनुसार, इस ऐतिहासिक तथ्य के बाद पाकिस्तान के आधिकारिक दावों पर आँख मूंदकर भरोसा करना उचित नहीं है।
मीर यार बलोच ने ईयू से क्या माँगें रखी हैं?
उन्होंने ईयू, संयुक्त राष्ट्र और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से बलूचिस्तान जाकर जमीनी स्थिति का आकलन करने, जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों से मिलने और केवल पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों पर निर्भर न रहने की अपील की है। साथ ही उन्होंने माँग की कि ईयू बलूचिस्तान पर वही मानवाधिकार मानक लागू करे जो अन्य वैश्विक संघर्षों में अपनाए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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