मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बने बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति, 255 वोट से जीते; 21 अगस्त को शपथ
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को 20 अगस्त 2026 को बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित घोषित किया गया। ढाका स्थित राष्ट्रीय संसद में हुए इस ऐतिहासिक चुनाव में उन्होंने जमात-ए-इस्लामी नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद को पराजित किया। 21 अगस्त को वे बंगभवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे।
मतदान का पूरा विवरण
राष्ट्रीय संसद में गुरुवार दोपहर संपन्न इस चुनाव में कुल 343 वैध मत डाले गए। फखरुल को 255 वोट प्राप्त हुए, जबकि प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88 वोट मिले। मतदान के पात्र 349 सांसदों में से 6 ने वोट नहीं डाला — इनमें बीएनपी के मिर्जा अब्बास और मुस्तफा कमाल पाशा, निर्दलीय सांसद रुमीन फरहाना, जमात के सांसद गाजी नजरुल इस्लाम और इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के सांसद ओली उल्लाह शामिल रहे।
चुनाव की निगरानी मुख्य चुनाव आयुक्त एवं रिटर्निंग अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन ने की। परिणाम घोषित करते हुए उन्होंने कहा, 'मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को सबसे अधिक वोट मिले हैं, इसलिए वे विधिवत रूप से राष्ट्रपति चुने गए हैं।'
साढ़े तीन दशक बाद मतदान से चुना गया राष्ट्रपति
यह राष्ट्रपति चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1991 के बाद यह पहला मौका है जब राष्ट्रपति पद के लिए संसद में वास्तविक मतदान हुआ। इससे पहले का अंतिम प्रतिस्पर्धी राष्ट्रपति चुनाव 8 अक्टूबर 1991 को हुआ था। गौरतलब है कि 1991 से 2026 तक लगातार राष्ट्रपति बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के निर्विरोध चुने जाते रहे।
यह चुनाव इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को पद से इस्तीफा दे दिया था। संविधान के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति पद रिक्त होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव अनिवार्य है। इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
फखरुल: बीएनपी के 'नंबर दो' नेता का सफर
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से बीएनपी में प्रभावी रूप से दूसरे सबसे बड़े नेता की भूमिका में रहे हैं। वे पार्टी के सबसे लंबे समय तक सेवारत महासचिव और पार्टी के सर्वाधिक पहचाने जाने वाले सार्वजनिक चेहरों में से एक माने जाते हैं।
बीएनपी के कठिनतम दौर में — जब पार्टी प्रमुख खालिदा जिया जेल, नजरबंदी और गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और तारिक रहमान लंदन में निर्वासन में थे — फखरुल ने बांग्लादेश में पार्टी की कमान संभाली। वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद बनाए रखते हुए पार्टी के निर्णयों को लागू कराते रहे।
जुलाई चार्टर और संवैधानिक बदलावों के बीच चुनाव
फखरुल का राष्ट्रपति पद पर निर्वाचन ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश में जुलाई चार्टर के तहत राजनीतिक दलों के बीच सहमति से संवैधानिक सुधारों की प्रक्रिया चल रही है। यह संयोग बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।
बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति के रूप में फखरुल की भूमिका इस संक्रमणकालीन दौर में देश की संवैधानिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में संवैधानिक सुधारों की दिशा पर उनका रुख स्पष्ट होगा।