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PM मोदी बने सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित PM, 4,300+ दिन; विश्व नेताओं ने दी बधाई

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PM मोदी बने सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित PM, 4,300+ दिन; विश्व नेताओं ने दी बधाई

सारांश

4,300 से अधिक दिनों की निरंतर सेवा के साथ नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए। मंगोलिया, इथियोपिया, यूरोपीय संघ और जर्मनी के नेताओं ने बधाई दी — जो भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा का प्रमाण है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 10 जून 2026 को 4,300 से अधिक दिन के निरंतर कार्यकाल के साथ भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री का कीर्तिमान स्थापित किया।
मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख ने मोदी को 'प्रिय मित्र' बताते हुए बधाई दी; मोदी ने रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
अबी अहमद अली ने मोदी को 'बड़े भाई' कहकर तीन लोकतांत्रिक कार्यकालों की उपलब्धि सराही।
EU की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने भारत-EU के सबसे बड़े व्यापार समझौते और चंद्रयान की सफलता का उल्लेख करते हुए शुभकामनाएं दीं।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी बधाई दी; मोदी ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जून 2026 को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया, जब उनके निरंतर कार्यकाल के 4,300 से अधिक दिन पूरे हुए। इस उपलब्धि पर दुनिया भर के नेताओं ने उन्हें बधाई दी, जिसके जवाब में मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई विश्व नेताओं का आभार व्यक्त किया।

मंगोलिया और इथियोपिया के नेताओं की बधाई

मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख ने अपने संदेश में लिखा कि वे प्रधानमंत्री मोदी को — जो उनके और मंगोलिया की जनता के प्रिय मित्र हैं — तीसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने और सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई देते हैं। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर दिया, "आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए धन्यवाद। भारत और मंगोलिया के बीच गहरे और विशेष संबंध हैं, और मैं हमारी रणनीतिक साझेदारी तथा हमारे देशों के बीच अटूट बंधन को और मज़बूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।"

इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में मोदी को 'अपने बड़े भाई और प्रिय मित्र' बताते हुए लिखा कि उन्होंने लगातार तीन लोकतांत्रिक कार्यकालों में दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प के साथ विश्व के सबसे बड़े जनसमूह का निरंतर विश्वास अर्जित किया है। मोदी ने जवाब में कहा, "प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए धन्यवाद। मुझे पिछले वर्ष इथियोपिया में हुई हमारी मुलाकात अच्छी तरह याद है और मैं अपने लोगों और वैश्विक दक्षिण के पारस्परिक लाभ के लिए घनिष्ठ सहयोग जारी रखने के लिए तत्पर हूं।"

यूरोपीय संघ और जर्मनी का संदेश

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने शुभकामना संदेश में लिखा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल चंद्रमा पर कदम रखा, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों को छूने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने प्रौद्योगिकी, गतिशीलता, सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग तथा अब तक के सबसे बड़े व्यापारिक समझौते का उल्लेख करते हुए भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी को ऐतिहासिक बताया। मोदी ने उत्तर दिया, "राष्ट्रपति वॉन डेर लेयेन, आपके प्रशंसात्मक शब्दों के लिए धन्यवाद। भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी व्यापार, प्रौद्योगिकी, आवागमन और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में लगातार मज़बूत हो रही है।"

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को भी मोदी ने धन्यवाद देते हुए कहा, "चांसलर मर्ज, आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए धन्यवाद। हम भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने तथा अपने लोगों के हित में प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी मई 2014 से लगातार प्रधानमंत्री पद पर हैं — पहले दो कार्यकाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बहुमत के साथ, और जून 2024 में तीसरी बार शपथ लेकर। 4,300 से अधिक दिनों का यह निर्बाध कार्यकाल उन्हें स्वतंत्र भारत के किसी भी निर्वाचित प्रधानमंत्री से आगे ले जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

वैश्विक कूटनीति पर असर

विश्लेषकों के अनुसार, इस अवसर पर मिली बधाइयाँ केवल औपचारिकता नहीं हैं — ये भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रतिबिंब हैं। यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते, वैश्विक दक्षिण में नेतृत्व की भूमिका, और मंगोलिया जैसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी — ये सब मिलकर भारत की बहुआयामी विदेश नीति की तस्वीर पेश करते हैं। आगे देखें तो इन द्विपक्षीय संबंधों को और ठोस आकार देने की दिशा में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

300 दिनों का यह आँकड़ा निश्चित रूप से ऐतिहासिक है, लेकिन असली सवाल यह है कि इस दौरान वैश्विक नेताओं की बधाइयाँ भारत के लिए ठोस कूटनीतिक लाभ में कितनी तब्दील हुईं। EU के साथ व्यापार समझौते की चर्चा वर्षों से चल रही है — वॉन डेर लेयेन का उल्लेख उत्साहजनक है, पर समझौते की अंतिम रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं है। मंगोलिया और इथियोपिया जैसे देशों के साथ 'रणनीतिक साझेदारी' की भाषा का बार-बार इस्तेमाल होता है, लेकिन इन संबंधों की गहराई को आँकने के लिए व्यापार, निवेश और लोगों के आवागमन के ठोस आँकड़े ज़रूरी हैं। दीर्घकालिक शासन की विरासत केवल कार्यकाल की लंबाई से नहीं, बल्कि नीतिगत निरंतरता और जवाबदेही के पैमाने पर तय होती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM नरेंद्र मोदी ने कौन-सा रिकॉर्ड बनाया है?
नरेंद्र मोदी 10 जून 2026 को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए, जब उनका निरंतर कार्यकाल 4,300 दिनों से अधिक हो गया। वे मई 2014 से लगातार तीन कार्यकालों में प्रधानमंत्री पद पर हैं।
किन विश्व नेताओं ने PM मोदी को बधाई दी?
मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख, इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने मोदी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। सभी नेताओं ने अपने-अपने देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने की इच्छा जताई।
PM मोदी ने विदेशी नेताओं की बधाई का जवाब कैसे दिया?
PM मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए प्रत्येक नेता को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने मंगोलिया के साथ रणनीतिक साझेदारी, इथियोपिया के साथ वैश्विक दक्षिण सहयोग, EU के साथ व्यापार-प्रौद्योगिकी-सुरक्षा साझेदारी, और जर्मनी के साथ द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-EU साझेदारी पर वॉन डेर लेयेन ने क्या कहा?
वॉन डेर लेयेन ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने चंद्रमा पर कदम रखा और प्रौद्योगिकी, गतिशीलता, सुरक्षा एवं रक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों ने मिलकर ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने अब तक के सबसे बड़े भारत-EU व्यापारिक समझौते का भी उल्लेख किया।
मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल का भारत की विदेश नीति पर क्या असर है?
लंबे और निरंतर नेतृत्व ने भारत को वैश्विक मंच पर स्थिर और परिचित साझेदार के रूप में स्थापित किया है। विश्व नेताओं की बधाइयाँ इस बात का संकेत हैं कि भारत की कूटनीतिक पहुँच — यूरोप से लेकर अफ्रीका और मध्य एशिया तक — पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से विस्तृत हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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