मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल: अभिजित-विजय मुहूर्त के साथ जानें भद्रा का सटीक समय

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मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल: अभिजित-विजय मुहूर्त के साथ जानें भद्रा का सटीक समय

सारांश

27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा होगी। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:53 से 12:45 और विजय मुहूर्त 2:31 से 3:23 बजे तक है। भद्रा सुबह 6:07 से शाम 6:15 तक रहेगी, इस दौरान शुभ कार्यों से बचें। सोमवार और एकादशी का संयोग इस दिन को अत्यंत पवित्र बनाता है।

Key Takeaways

  • मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2025 (सोमवार) को मनाई जाएगी, एकादशी तिथि 26 अप्रैल शाम 6:06 बजे से आरंभ होकर 27 अप्रैल शाम 6:15 बजे तक रहेगी।
  • अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:53 से 12:45 बजे और विजय मुहूर्त दोपहर 2:31 से 3:23 बजे तक — दोनों शुभ कार्यों के लिए उत्तम।
  • भद्रा काल सुबह 6:07 बजे से शाम 6:15 बजे तक रहेगा, इस दौरान मांगलिक कार्यों से बचें।
  • ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:17 से 5:01 बजे तक — पूजन और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ समय।
  • अमृत काल दोपहर 2:41 से 4:20 बजे तक — पूजन और दान के लिए विशेष फलदायी।
  • सोमवार और एकादशी का दुर्लभ संयोग इस दिन को भगवान विष्णु और शिव दोनों की उपासना के लिए अत्यंत पावन बनाता है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मोहिनी एकादशी इस वर्ष 27 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित यह तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत, पूजन और दान-पुण्य करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

एकादशी तिथि का आरंभ और समापन

एकादशी तिथि 26 अप्रैल (रविवार) को सायं 6 बजकर 6 मिनट पर प्रारंभ होगी और 27 अप्रैल (सोमवार) की शाम 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के नियमानुसार 27 अप्रैल को पूरे दिन एकादशी का मान रहेगा, इसलिए व्रत और पूजन इसी दिन किया जाएगा।

सोमवार को सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 44 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त सायं 6 बजकर 54 मिनट पर होगा। योग ध्रुव रात्रि 9 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी सायं 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, उसके पश्चात उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का आगमन होगा।

शुभ मुहूर्त — पूजन और मांगलिक कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय

ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 17 मिनट से 5 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 4 बजकर 39 मिनट से 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इन बेलाओं में स्नान, ध्यान और भगवान विष्णु का स्मरण विशेष फलदायी माना जाता है।

27 अप्रैल को दो अत्यंत शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इन दोनों मुहूर्तों में आरंभ किए गए शुभ कार्य सफलता और समृद्धि देने वाले माने जाते हैं।

अमृत काल दोपहर 2 बजकर 41 मिनट से 4 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त सायं 6 बजकर 53 मिनट से 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, जो संध्या पूजन के लिए उत्तम है।

अशुभ समय — इन घड़ियों में रहें सतर्क

राहुकाल सोमवार को प्रातः 7 बजकर 23 मिनट से 9 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।

दुर्मुहूर्त दो चरणों में रहेगा — पहला दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक और दूसरा दोपहर 3 बजकर 23 मिनट से 4 बजकर 16 मिनट तक। इन समयों में कोई भी नया कार्य, अनुबंध या यात्रा आरंभ करने से बचना चाहिए।

भद्रा का समय — विशेष सावधानी जरूरी

भद्रा सोमवार को प्रातः 6 बजकर 7 मिनट से सायं 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। यह लगभग पूरे दिन की भद्रा है, जो शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानी जाती है।

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए। हालांकि, मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का संकल्प भद्रा से प्रभावित नहीं होता — यह श्रद्धा और भक्ति का कार्य है जो सदैव शुभ है।

मोहिनी एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर देवताओं को अमृत प्रदान किया था और असुरों को पराजित किया था। इसीलिए इस एकादशी को विशेष रूप से पापनाशक और मोक्षदायिनी माना जाता है।

जो श्रद्धालु इस दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं, उन्हें अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है — ऐसा धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। 27 अप्रैल को सोमवार का दिन भगवान शिव को भी समर्पित है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और भी द्विगुणित हो जाता है।

श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे भद्रा समाप्ति के बाद अर्थात सायं 6 बजकर 15 मिनट के पश्चात एकादशी पारण की तैयारी करें और 28 अप्रैल (मंगलवार) को द्वादशी तिथि में उचित मुहूर्त देखकर व्रत का पारण करें।

Point of View

दूसरी ओर लगभग पूरे दिन की भद्रा मांगलिक कार्यों पर रोक लगाती है। यह विरोधाभास उन लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है जो इस दिन विवाह या गृह प्रवेश की योजना बना चुके हैं। धार्मिक पंचांग की इस जटिलता को समझाना मीडिया की जिम्मेदारी है, क्योंकि सही जानकारी के अभाव में लोग या तो अशुभ समय में कार्य करते हैं या शुभ अवसर गंवा देते हैं। राष्ट्र प्रेस का यह प्रयास है कि धर्म और ज्योतिष की सटीक जानकारी आम जन तक पहुंचे।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

मोहिनी एकादशी 2025 कब है और व्रत किस दिन रखा जाएगा?
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार व्रत और पूजन 27 अप्रैल को ही संपन्न किया जाएगा।
27 अप्रैल को अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त का समय क्या है?
अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:53 से 12:45 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:31 से 3:23 बजे तक रहेगा। इन मुहूर्तों में शुभ कार्य आरंभ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
27 अप्रैल को भद्रा का समय क्या है और इसका क्या प्रभाव होता है?
भद्रा सोमवार को प्रातः 6:07 बजे से सायं 6:15 बजे तक रहेगी। भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए, हालांकि विष्णु पूजन और व्रत जारी रखा जा सकता है।
मोहिनी एकादशी का धार्मिक महत्व क्या है?
पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर देवताओं को अमृत दिलाया था। इस एकादशी पर व्रत रखने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
27 अप्रैल को राहुकाल और अन्य अशुभ समय कौन-से हैं?
राहुकाल सुबह 7:23 से 9:02 बजे, यमगण्ड सुबह 10:40 से दोपहर 12:19 बजे और गुलिक काल दोपहर 1:58 से 3:36 बजे तक रहेगा। इन समयों में कोई नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ न करें।
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