केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान पहुँचे मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, संरक्षण और ईको टूरिज्म का लिया जायज़ा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास अपने दो दिवसीय भरतपुर दौरे के अंतर्गत सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान पहुँचे, जहाँ उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, प्रवासी पक्षियों की स्थिति और ईको टूरिज्म विकास कार्यों का विस्तृत जायज़ा लिया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब प्रवासी पक्षियों का मौसम शुरू हो रहा है और उद्यान प्रशासन आगंतुकों के लिए नई सुविधाएँ विकसित करने में जुटा है।
उद्यान भ्रमण और जैव विविधता का आकलन
मुख्य सचिव के उद्यान पहुँचने पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने पूरे पार्क का भ्रमण किया, जिसके दौरान उन्हें सारस और साइबेरियन क्रेन सहित कई दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी देखने को मिले। अधिकारियों ने उन्हें इस सीज़न में अब तक उद्यान में आए प्रवासी पक्षियों की संख्या और उनके संरक्षण के लिए किए जा रहे इंतज़ामों की जानकारी दी।
पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भ्रमण के दौरान वी. श्रीनिवास ने उद्यान परिसर में पौधारोपण भी किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर है। चूँकि यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जाएँगे और सरकार की प्राथमिकता है कि इस धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।
ईको टूरिज्म और पर्यटक सुविधाओं पर ज़ोर
वन विभाग के अधिकारियों ने मुख्य सचिव को उद्यान में चल रहे विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। पर्यटकों के लिए बेहतर ट्रैक, प्रशिक्षित गाइड की उपलब्धता और सूचना केंद्र समेत नई सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
मुख्य सचिव के निर्देश
वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि देशी-विदेशी पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उनके लिए सुविधाएँ और बेहतर बनाई जाएँ। उन्होंने पार्क में स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष बल दिया और कचरा प्रबंधन के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला कलेक्टर कमर चौधरी, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
आगे की राह
गौरतलब है कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला था और यह एशिया के सबसे महत्त्वपूर्ण पक्षी आश्रय स्थलों में से एक माना जाता है। मुख्य सचिव के इस दौरे से उम्मीद की जा रही है कि संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी।