मुरादाबाद की श्रीराम सोसायटी में 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' पोस्टर — दूसरे समुदाय को मकान न बेचने की अपील
सारांश
Key Takeaways
- मुरादाबाद के लाजपतनगर स्थित श्रीराम सोसायटी में २६ अप्रैल को दो दर्जन से अधिक निवासियों ने 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' पोस्टर लगाए।
- पोस्टरों में मुस्लिम समुदाय से अपील की गई है कि वे सोसायटी में मकान न खरीदें और न ही रहने आएँ।
- सोसायटी में कुल लगभग ७० मकान हैं और मुख्य द्वार पर 'हिंदू सोसायटी' का बोर्ड भी लगाया गया है।
- निवासी सुनील रस्तोगी का आरोप है कि दूसरे समुदाय के लोग ऊँची कीमत देकर मकान खरीदने की कोशिश कर रहे थे।
- निवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप और विशेष कानून बनाने की माँग की है।
- मामला संविधान के अनुच्छेद १५ और १९ के तहत कानूनी सवाल खड़े करता है; प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
मुरादाबाद, २६ अप्रैल — उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कटघर थाना क्षेत्र स्थित लाजपतनगर की श्रीराम सोसायटी इन दिनों तीखी बहस का केंद्र बन गई है। यहाँ के दो दर्जन से अधिक निवासियों ने अपने घरों के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर चस्पाँ कर दिए हैं, जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह सोसायटी 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' है। इन पोस्टरों के ज़रिए मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की गई है कि वे यहाँ न तो मकान खरीदें और न ही रहने आएँ।
क्या है पूरा मामला
सोसायटी के मुख्य द्वार पर भी 'हिंदू सोसायटी' का बड़ा बोर्ड लगाया गया है। निवासियों का तर्क है कि सोसायटी के भीतर स्थित पार्क में भगवान श्रीराम का मंदिर है, जहाँ प्रतिदिन पूजा-पाठ और आरती होती है। उनकी आशंका है कि दूसरे समुदाय के लोगों के आ बसने से धार्मिक गतिविधियों में बाधा पड़ सकती है और क्षेत्र की सामाजिक संरचना धीरे-धीरे बदल सकती है।
सोसायटी में कुल लगभग ७० मकान हैं। निवासियों के अनुसार हाल के दिनों में कई लोग मकान देखने आए, लेकिन सामूहिक निर्णय लेकर उन्हें मना कर दिया गया।
निवासियों की आवाज़ — सुरक्षा और धार्मिक पहचान की चिंता
सोसायटी की महिला निवासी सोनी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि पोस्टर लगाने के पीछे उनकी मुख्य चिंता महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी है। उन्होंने हाल की कुछ घटनाओं और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री का हवाला देते हुए कहा कि आज के दौर में सतर्क रहना अनिवार्य है। उन्होंने अन्य हिंदू परिवारों से भी अपील की कि वे अपने मकान दूसरे समुदाय को न बेचें।
एक अन्य निवासी सुनील रस्तोगी ने आरोप लगाया कि दूसरे समुदाय के कुछ लोग ऊँची कीमत देकर सोसायटी में मकान खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से ऐसे कानून बनाने की माँग की जो बहुसंख्यक आबादी वाले इलाकों में उनकी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
स्थानीय निवासी नीरज अग्रवाल ने कहा कि पास के बाहरी इलाके में आधे से अधिक मकान मुस्लिम समुदाय द्वारा खरीदे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ मंदिर स्थित है, वहाँ किसी भी प्रकार का धार्मिक बदलाव न हो — यह सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।
कानूनी और सामाजिक पहलू
विशेषज्ञों की दृष्टि से यह मामला कई कानूनी सवाल खड़े करता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५ धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। साथ ही अनुच्छेद १९ के तहत नागरिकों को देश में कहीं भी बसने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में पोस्टरों की कानूनी वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश के कई हिस्सों में आवासीय क्षेत्रों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की खबरें सामने आती रही हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की कई घटनाएँ रिकॉर्ड की गई हैं जहाँ आवासीय समाजों में धार्मिक पहचान के आधार पर प्रवेश या खरीद-फरोख्त को अनौपचारिक रूप से नियंत्रित करने की कोशिश हुई है।
सरकार से हस्तक्षेप की माँग
निवासियों ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की माँग की है। उनका कहना है कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे पुराने आवासीय इलाकों की सामाजिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके।
फिलहाल स्थानीय पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि कटघर थाना पुलिस और जिला प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या इन पोस्टरों को कानूनी चुनौती दी जाती है।