कोट्टायम मेडिकल कॉलेज: ₹270 करोड़ के सर्जिकल ब्लॉक की छत गिरने पर मंत्री मुरलीधरन ने मांगी विजिलेंस जांच
सारांश
मुख्य बातें
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कोट्टायम मेडिकल कॉलेज के ₹270 करोड़ के नवनिर्मित सर्जिकल ब्लॉक की छत बार-बार गिरने की घटनाओं के बाद इसके निर्माण कार्य की विजिलेंस जांच की माँग की है। 5 नवंबर 2026 को गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला को लिखे एक पत्र में मुरलीधरन ने कथित निर्माण अनियमितताओं, तकनीकी खामियों और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों की व्यापक जांच की माँग रखी।
मुख्य घटनाक्रम
इस विवाद की जड़ 16 फरवरी 2026 को उद्घाटित उस सर्जिकल ब्लॉक से जुड़ी है, जिसे तत्कालीन वामपंथी सरकार ने खुलवाया था। उद्घाटन के महज कुछ महीनों के भीतर ब्लॉक की छत के हिस्से गिरने लगे, जिससे मरीजों, डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा सत्र में मुरलीधरन ने विपक्षी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई-एम) पर तंज कसते हुए कहा था कि पिछली वामपंथी सरकार द्वारा उद्घाटन की गई इमारत अब टूट-फूट की चपेट में है। इसी बयान के बाद विजिलेंस जांच की माँग ने राजनीतिक रंग ले लिया।
जांच का दायरा
मंत्री ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि जांच में यह देखा जाए कि क्या निर्माण में स्वीकृत तकनीकी मानकों का पालन हुआ, और क्या उचित गुणवत्ता नियंत्रण व निगरानी की गई। छत गिरने के अतिरिक्त, सिविल, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल कार्यों में भी खामियाँ पाई गई हैं।
इसके साथ ही मुरलीधरन ने परियोजना से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जाँच का निर्देश दिया है, ताकि किसी संभावित भ्रष्टाचार का पता लगाया जा सके।
तकनीकी समिति का गठन
मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.पी.एम. मोहम्मद हनीश को एक तकनीकी समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति इमारत का निरीक्षण कर संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन करेगी, निर्माण संबंधी खामियों की पहचान करेगी और उन्हें ठीक कराने की सिफारिश करेगी।
साथ ही तत्काल सुरक्षा उपाय अपनाने की भी माँग की गई है, ताकि जब तक ढाँचागत समस्याओं का निराकरण न हो, अस्पताल में मौजूद लोगों की जान को कोई खतरा न रहे।
आम जनता पर असर
यह सर्जिकल ब्लॉक उन्नत चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया था। बार-बार सुरक्षा संबंधी चिंताओं के उभरने से उन मरीजों और परिजनों में भय का माहौल है जो यहाँ इलाज के लिए आते हैं। गौरतलब है कि कोट्टायम मेडिकल कॉलेज केरल के बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है, जहाँ राज्यभर से रोगी आते हैं।
पूर्व जांच माँगों का संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब मुरलीधरन ने किसी जांच की माँग की है। इससे पहले वे आयुर्वेद अस्पतालों में फर्नीचर खरीद, 'औषधि' में वित्तीय अनियमितताओं, केएमएससीएल द्वारा ब्लीचिंग पाउडर की खरीद और कोविड-19 से जुड़ी खरीद के मामलों में भी जांच की माँग कर चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि इन माँगों का स्वरूप अधिकतर राजनीतिक रहा है और इनका लक्ष्य पूर्ववर्ती वामपंथी सरकार को घेरना रहा है।
विजिलेंस जांच की माँग के साथ ही तकनीकी समिति की रिपोर्ट का इंतजार है, जो यह तय करेगी कि ₹270 करोड़ की यह इमारत वाकई कितनी सुरक्षित है और इसमें सुधार के लिए कितनी और लागत आएगी।