30 अक्टूबर 2026
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केरल निपाह दवा विवाद: स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने पूर्व सरकार पर एक्सपायर्ड व क्लिनिकल ट्रायल दवाएं देने के लगाए आरोप

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केरल निपाह दवा विवाद: स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने पूर्व सरकार पर एक्सपायर्ड व क्लिनिकल ट्रायल दवाएं देने के लगाए आरोप

सारांश

केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने निपाह रोगियों को एक्सपायर्ड रेमडेसिविर और संभावित क्लिनिकल ट्रायल दवाएं दिए जाने के आरोप लगाए हैं। KMSCL ने 2021 में ₹42 लाख की 3,000 शीशियाँ खरीदी थीं जो मई 2023 में एक्सपायर हो चुकी थीं, फिर भी 2025-26 तक इस्तेमाल होती रहीं।

मुख्य बातें

केरल स्वास्थ्य मंत्री के.
मुरलीधरन ने 30 अक्टूबर 2026 को निपाह रोगियों को क्लिनिकल ट्रायल दवाएं और बिना निर्माण तिथि वाली दवाएं दिए जाने पर संदेह जताया।
KMSCL ने 3 जून 2021 को ₹42 लाख में रेमडेसिविर की 3,000 शीशियाँ खरीदी थीं, जिनकी समाप्ति तिथि 30 मई 2023 थी।
रिकॉर्ड के अनुसार, ये एक्सपायर्ड शीशियाँ 2023-24 में 102, 2024-25 में 34 और 2025-26 में 10 — यानी समाप्ति के बाद भी उपयोग में लाई गईं।
अरविंद की अध्यक्षता में चिकित्सा बोर्ड जाँच करेगा कि क्या एक्सपायर्ड दवाओं का संबंध मरीजों की मृत्यु से है।
जाँच में विदेशी दवा कंपनियों और बिचौलियों की भूमिका की भी पड़ताल होगी।

केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने 30 अक्टूबर 2026 को कोझिकोड में पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के शासनकाल में निपाह रोगियों को दी गई दवाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संदेह है कि मरीजों को क्लिनिकल ट्रायल के लिए बनी दवाएं भी दी गई हो सकती हैं और आपूर्ति की गई कुछ दवाओं पर निर्माण की तारीख (मैन्युफैक्चरिंग डेट) तक अंकित नहीं थी।

मुख्य आरोप और नई जाँच के आदेश

मुरलीधरन ने बताया कि कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर व्यापक जाँच के आदेश दिए गए हैं। इस जाँच के दायरे में दवाओं की आपूर्ति में शामिल विदेशी दवा कंपनियाँ, बिचौलिए और उन्हें हुए वित्तीय लाभ भी शामिल होंगे। मंत्री के अनुसार, विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने उन्हें जो पत्र भेजा था उसमें केवल सस्ती दवाएं देने के विरुद्ध आगाह किया गया था — उसमें क्लिनिकल ट्रायल दवाओं या एक्सपायर्ड दवाओं का कोई उल्लेख नहीं था।

एक्सपायर्ड रेमडेसिविर का मामला

ये नए खुलासे 29 अक्टूबर 2026 को केरल विधानसभा में मंत्री के उस बयान के बाद सामने आए, जिसमें उन्होंने कहा था कि 3 जून 2021 को केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (KMSCL) ने ₹42 लाख की लागत से रेमडेसिविर की 3,000 शीशियाँ खरीदी थीं, जिनकी समाप्ति तिथि 30 मई 2023 थी। मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार, उक्त दवा की 2023-24 में 102 शीशियाँ, 2024-25 में 34 शीशियाँ और 2025-26 में 10 शीशियाँ इस्तेमाल की गईं।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 2026 में उपयोग की गई 50 शीशियाँ 12 जून 2026 को बहरीन से अलग से मंगाई गई थीं और ये एक्सपायर्ड बैच से अलग थीं।

चिकित्सा बोर्ड का गठन

तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ. आर. अरविंद की अध्यक्षता में एक विशेष चिकित्सा बोर्ड का गठन किया गया है। यह बोर्ड जाँच करेगा कि क्या एक्सपायर्ड दवाओं के संदिग्ध उपयोग का संबंध मरीजों की मृत्यु से था और क्या अन्य प्राप्तकर्ताओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़े। गौरतलब है कि निपाह एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है और इसके उपचार में इस्तेमाल दवाओं की गुणवत्ता सीधे मरीज की जान से जुड़ी होती है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में सत्ता-परिवर्तन के बाद पूर्ववर्ती वामपंथी सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। कथित तौर पर यह पूरी घटना 2016-2026 के दौरान हुई, जब पिनाराई विजयन मुख्यमंत्री थे। मुरलीधरन ने स्पष्ट किया कि जाँच में सभी तथ्य सामने आने के बाद सरकार उचित कार्रवाई करेगी।

आगे क्या होगा

डॉ. अरविंद की अध्यक्षता वाला चिकित्सा बोर्ड अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद यह तय होगा कि क्या किसी के विरुद्ध आपराधिक या विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विदेशी दवा कंपनियों और बिचौलियों की भूमिका की जाँच इस मामले को एक व्यापक स्वास्थ्य-खरीद घोटाले का रूप दे सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस मामले को दवा नियामक प्रक्रियाओं की गंभीर समीक्षा के लिए एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो KMSCL की खरीद प्रक्रिया और राज्य के दवा नियामक ढाँचे की बुनियादी कमज़ोरियाँ उजागर होंगी — जो केवल एक सरकार की नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली की जवाबदेही का सवाल है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में निपाह दवा विवाद क्या है?
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के शासनकाल में निपाह रोगियों को एक्सपायर्ड रेमडेसिविर और संभावित क्लिनिकल ट्रायल दवाएं दी गईं। KMSCL ने 2021 में ₹42 लाख की 3,000 शीशियाँ खरीदी थीं जो मई 2023 में समाप्त हो चुकी थीं, फिर भी 2025-26 तक इस्तेमाल होती रहीं।
एक्सपायर्ड रेमडेसिविर कब और कितनी मात्रा में खरीदी गई थी?
KMSCL ने 3 जून 2021 को ₹42 लाख की लागत से 3,000 शीशियाँ खरीदी थीं, जिनकी समाप्ति तिथि 30 मई 2023 थी। रिकॉर्ड बताते हैं कि इन शीशियों का उपयोग 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में भी किया गया।
मरीजों की मौत से एक्सपायर्ड दवाओं का संबंध था क्या?
यही जाँच का केंद्रीय प्रश्न है। डॉ. आर. अरविंद की अध्यक्षता में गठित चिकित्सा बोर्ड यह पता लगाएगा कि एक्सपायर्ड दवाओं के संदिग्ध उपयोग का संबंध मरीजों की मृत्यु से था या नहीं और क्या अन्य प्राप्तकर्ताओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
इस मामले में पिनाराई विजयन की क्या भूमिका बताई जा रही है?
मुरलीधरन के अनुसार, यह पूरी घटना 2016-2026 के दौरान हुई जब पिनाराई विजयन मुख्यमंत्री थे। विजयन ने मंत्री को एक पत्र लिखा था जिसमें केवल सस्ती दवाएं देने के विरुद्ध आगाह किया गया था — उसमें क्लिनिकल ट्रायल दवाओं या एक्सपायर्ड दवाओं का उल्लेख नहीं था।
जाँच में और क्या-क्या देखा जाएगा?
जाँच में दवाओं की आपूर्ति में शामिल विदेशी दवा कंपनियाँ, बिचौलिए और उन्हें मिले वित्तीय लाभ भी शामिल होंगे। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या बिना निर्माण तिथि वाली दवाएं भी मरीजों को दी गई थीं।
राष्ट्र प्रेस
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