मियापुर भूमि विवाद: रेवंत रेड्डी का केसीआर पर आरोप, ₹50,000 करोड़ की 550 एकड़ जमीन हड़पने की थी कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केसीआर ने हैदराबाद के मियापुर में करीब ₹50,000 करोड़ की कीमत वाली 550 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। यह आरोप तब आए जब सर्वोच्च न्यायालय ने एक दिन पहले मियापुर की इस जमीन पर तेलंगाना सरकार के दावे को बरकरार रखा।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को मियापुर की 550 एकड़ जमीन का भौतिक कब्जा लेने और उसकी घेराबंदी करने का निर्देश दिया। उन्होंने इस 23 साल पुराने मामले में आए फैसले को 'ऐतिहासिक' करार दिया और शीर्ष अदालत का आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केसीआर ने अपने करीबी सहयोगी, राज्यसभा सांसद दामोदर राव और 'नमस्ते तेलंगाना' के सीएमडी के साथ मिलकर कारोबारी गोल्डस्टोन प्रसाद को आगे करके इस जमीन पर कब्जा करने की साजिश रची। रेवंत रेड्डी के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की कोशिश की गई और कथित तौर पर रिश्वत के रूप में लग्जरी कारों और नकदी का लेन-देन हुआ।
केटीआर पर भी निशाना
मुख्यमंत्री ने केसीआर के पुत्र और पूर्व मंत्री के. टी. रामा राव (केटीआर) पर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केटीआर ने भलेराव परिवार के साथ मिलकर आईएमजी की जमीनों पर कब्जा करने का प्रयास किया था।
इसके अलावा रेवंत रेड्डी ने कहा कि कंचा गाचीबोवली और मामिडिपल्ली में भी बहुमूल्य सरकारी भूखंडों पर कब्जे की कोशिश हुई, जिन्हें वर्तमान कांग्रेस सरकार ने कानूनी लड़ाई के जरिए सुरक्षित रखा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केटीआर के सहयोगियों ने गुर्रमगुडा की वन भूमि पर अतिक्रमण की कोशिश की, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने वन क्षेत्र घोषित कर खारिज किया।
कांग्रेस सरकार का दावा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक करीब ₹1.50 लाख करोड़ की सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करा चुकी है। उन्होंने कहा कि मंचिरेवुला में 143 एकड़ जमीन को बचाकर वहाँ पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए विद्यालय स्थापित किया गया।
रेवंत रेड्डी ने यह भी दावा किया कि जयशंकर भूपालपल्ली जिले में 400 एकड़ वन भूमि उस विधायक को सौंप दी गई थी जो दलबदल कर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) में शामिल हो गया था। राज्य सरकार ने इस मामले में भी सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी।
जमीन का भविष्य में उपयोग
मुख्यमंत्री ने बताया कि मियापुर की 550 एकड़ जमीन से होने वाली आय का उपयोग सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट के फैसले के अनुसार इस जमीन से अर्जित राजस्व शिक्षा क्षेत्र में खर्च होगा।
संसाधन जुटाने के लिए गठित कैबिनेट उपसमिति इन प्रस्तावों का अध्ययन करेगी और जनकल्याण तथा विकास कार्यों हेतु धन के उपयोग पर निर्णय लेगी।
राजनीतिक चुनौती
रेवंत रेड्डी ने केसीआर और केटीआर को विधानसभा में भूमि अधिग्रहण के कथित मामलों और अवैध सौदों के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब बीआरएस तेलंगाना में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है और कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है। गौरतलब है कि ये सभी आरोप अभी तक न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं, और बीआरएस की ओर से इन पर प्रतिक्रिया आना अभी शेष है।