30 अक्टूबर 2026
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मियापुर भूमि विवाद: रेवंत रेड्डी का केसीआर पर आरोप, ₹50,000 करोड़ की 550 एकड़ जमीन हड़पने की थी कोशिश

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मियापुर भूमि विवाद: रेवंत रेड्डी का केसीआर पर आरोप, ₹50,000 करोड़ की 550 एकड़ जमीन हड़पने की थी कोशिश

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मियापुर की ₹50,000 करोड़ की 550 एकड़ जमीन पर तेलंगाना सरकार का दावा बरकरार रखने के अगले ही दिन CM रेवंत रेड्डी ने केसीआर और केटीआर पर एक के बाद एक भूमि अतिक्रमण के आरोपों की झड़ी लगा दी — और विधानसभा में खुली बहस की चुनौती भी दे डाली।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने हैदराबाद के मियापुर की 550 एकड़ जमीन पर तेलंगाना सरकार के दावे को बरकरार रखा।
CM रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि केसीआर ने ₹50,000 करोड़ की इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की, जिसमें गोल्डस्टोन प्रसाद को आगे किया गया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक ₹1.50 लाख करोड़ की सरकारी जमीनें बचा चुकी है।
केटीआर पर मंचिरेवुला (143 एकड़) , गुर्रमगुडा वन भूमि और आईएमजी जमीनों पर कब्जे के कथित प्रयास का आरोप लगाया गया।
मियापुर की जमीन से अर्जित राजस्व शिक्षा, सिंचाई और स्वास्थ्य क्षेत्रों में खर्च किए जाने का ऐलान।
रेवंत रेड्डी ने केसीआर और केटीआर को विधानसभा में खुली बहस की चुनौती दी।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केसीआर ने हैदराबाद के मियापुर में करीब ₹50,000 करोड़ की कीमत वाली 550 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। यह आरोप तब आए जब सर्वोच्च न्यायालय ने एक दिन पहले मियापुर की इस जमीन पर तेलंगाना सरकार के दावे को बरकरार रखा।

मुख्य घटनाक्रम

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को मियापुर की 550 एकड़ जमीन का भौतिक कब्जा लेने और उसकी घेराबंदी करने का निर्देश दिया। उन्होंने इस 23 साल पुराने मामले में आए फैसले को 'ऐतिहासिक' करार दिया और शीर्ष अदालत का आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केसीआर ने अपने करीबी सहयोगी, राज्यसभा सांसद दामोदर राव और 'नमस्ते तेलंगाना' के सीएमडी के साथ मिलकर कारोबारी गोल्डस्टोन प्रसाद को आगे करके इस जमीन पर कब्जा करने की साजिश रची। रेवंत रेड्डी के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की कोशिश की गई और कथित तौर पर रिश्वत के रूप में लग्जरी कारों और नकदी का लेन-देन हुआ।

केटीआर पर भी निशाना

मुख्यमंत्री ने केसीआर के पुत्र और पूर्व मंत्री के. टी. रामा राव (केटीआर) पर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केटीआर ने भलेराव परिवार के साथ मिलकर आईएमजी की जमीनों पर कब्जा करने का प्रयास किया था।

इसके अलावा रेवंत रेड्डी ने कहा कि कंचा गाचीबोवली और मामिडिपल्ली में भी बहुमूल्य सरकारी भूखंडों पर कब्जे की कोशिश हुई, जिन्हें वर्तमान कांग्रेस सरकार ने कानूनी लड़ाई के जरिए सुरक्षित रखा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केटीआर के सहयोगियों ने गुर्रमगुडा की वन भूमि पर अतिक्रमण की कोशिश की, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने वन क्षेत्र घोषित कर खारिज किया।

कांग्रेस सरकार का दावा

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक करीब ₹1.50 लाख करोड़ की सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करा चुकी है। उन्होंने कहा कि मंचिरेवुला में 143 एकड़ जमीन को बचाकर वहाँ पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए विद्यालय स्थापित किया गया।

रेवंत रेड्डी ने यह भी दावा किया कि जयशंकर भूपालपल्ली जिले में 400 एकड़ वन भूमि उस विधायक को सौंप दी गई थी जो दलबदल कर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) में शामिल हो गया था। राज्य सरकार ने इस मामले में भी सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी।

जमीन का भविष्य में उपयोग

मुख्यमंत्री ने बताया कि मियापुर की 550 एकड़ जमीन से होने वाली आय का उपयोग सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट के फैसले के अनुसार इस जमीन से अर्जित राजस्व शिक्षा क्षेत्र में खर्च होगा।

संसाधन जुटाने के लिए गठित कैबिनेट उपसमिति इन प्रस्तावों का अध्ययन करेगी और जनकल्याण तथा विकास कार्यों हेतु धन के उपयोग पर निर्णय लेगी।

राजनीतिक चुनौती

रेवंत रेड्डी ने केसीआर और केटीआर को विधानसभा में भूमि अधिग्रहण के कथित मामलों और अवैध सौदों के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब बीआरएस तेलंगाना में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है और कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है। गौरतलब है कि ये सभी आरोप अभी तक न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं, और बीआरएस की ओर से इन पर प्रतिक्रिया आना अभी शेष है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मियापुर जमीन विवाद क्या है?
यह हैदराबाद के मियापुर में स्थित 550 एकड़ की सरकारी भूमि से जुड़ा 23 साल पुराना कानूनी मामला है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹50,000 करोड़ बताई जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में इस जमीन पर तेलंगाना सरकार के दावे को बरकरार रखा।
रेवंत रेड्डी ने केसीआर पर क्या आरोप लगाए हैं?
CM रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर ने राज्यसभा सांसद दामोदर राव और कारोबारी गोल्डस्टोन प्रसाद को आगे करके मियापुर की जमीन हड़पने की कोशिश की। उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर और लग्जरी कारों व नकदी के रूप में कथित रिश्वतखोरी के भी आरोप लगाए। ये आरोप अभी तक न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तेलंगाना के लिए क्या महत्व है?
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से ₹50,000 करोड़ मूल्य की 550 एकड़ भूमि पर तेलंगाना सरकार का अधिकार सुनिश्चित हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार इस जमीन से प्राप्त राजस्व शिक्षा, सिंचाई और स्वास्थ्य सेवाओं में लगाया जाएगा।
केटीआर पर कौन से आरोप लगाए गए हैं?
CM रेवंत रेड्डी ने के. टी. रामा राव (केटीआर) पर मंचिरेवुला (143 एकड़) , कंचा गाचीबोवली , मामिडिपल्ली और गुर्रमगुडा की वन भूमि पर कथित कब्जे के प्रयास का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के अनुसार इन सभी मामलों में कांग्रेस सरकार ने कानूनी लड़ाई लड़कर जमीनें सुरक्षित रखीं।
मियापुर जमीन का भविष्य में कैसे उपयोग होगा?
CM रेवंत रेड्डी ने बताया कि कैबिनेट के फैसले के अनुसार मियापुर की जमीन से अर्जित राजस्व शिक्षा क्षेत्र में खर्च किया जाएगा। कैबिनेट उपसमिति इन प्रस्तावों का अध्ययन करके जनकल्याण हेतु धन उपयोग पर अंतिम निर्णय लेगी।
राष्ट्र प्रेस
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