20 सितंबर 2026
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दलितों की जमीन पूरी तरह सुरक्षित: तेलंगाना राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी का भरोसा

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दलितों की जमीन पूरी तरह सुरक्षित: तेलंगाना राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी का भरोसा

सारांश

तेलंगाना में एर्रावल्ली के 120 दलित किसानों को राजस्व नोटिस मिलने से उठे सवालों के बाद राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने साफ किया कि सरकार दलितों की एक इंच जमीन नहीं लेगी — यह कार्रवाई केसीआर के 700 एकड़ फार्महाउस की जांच का हिस्सा है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने 20 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि सरकार दलितों की एक इंच जमीन नहीं लेगी।
सिद्दीपेट जिले के एर्रावल्ली गांव के 120 दलित किसानों को राजस्व अधिकारियों ने दस्तावेज़ लेकर पेश होने के नोटिस जारी किए थे।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में पूर्व CM केसीआर के 700 एकड़ फार्महाउस — जिसमें कथित 388 एकड़ सरकारी जमीन शामिल — की जांच का ऐलान किया था।
मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस ने तेलंगाना में दलितों को 25 लाख एकड़ और आदिवासियों को 2 लाख एकड़ पोडु जमीन दी है।
केसीआर पर आरोप: उन्होंने दलितों को 3 एकड़ जमीन देने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ।

तेलंगाना के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने 20 सितंबर 2026 को स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार दलितों या आदिवासियों की एक इंच जमीन भी नहीं लेगी। यह बयान उस समय आया जब सिद्दीपेट जिले के एर्रावल्ली गांव के लगभग 120 दलित किसानों को राजस्व अधिकारियों की ओर से नोटिस मिलने की खबरें सामने आईं। किसानों को अपने जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज़ लेकर अधिकारियों के सामने पेश होने को कहा गया था।

मंत्री का स्पष्ट आश्वासन

मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने दलित समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, 'सरकार आपकी एक इंच जमीन भी नहीं लेगी। इस सरकार का आपकी जमीन अधिग्रहीत करने का कोई इरादा नहीं है। आपको अपनी जमीन को लेकर किसी तरह का डर या चिंता नहीं होनी चाहिए। जनता की सरकार आपके साथ खड़ी है।' उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार दलितों की भूमि की पूरी तरह रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

एर्रावल्ली जांच से जुड़ा विवाद

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पिछले सप्ताह विधानसभा में घोषणा की थी कि सरकार एर्रावल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के फार्महाउस की जांच कराएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार यह फार्महाउस 700 एकड़ में फैला है, जिसमें कथित तौर पर 388 एकड़ सरकारी जमीन शामिल है। इसी जांच के क्रम में एर्रावल्ली के दलित किसानों को नोटिस भेजे जाने की खबरें आईं, जिससे स्थानीय स्तर पर चिंता और भय का माहौल बन गया।

राजस्व मंत्री ने बताया नोटिस का उद्देश्य

राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन के रिकॉर्ड की जांच, सर्वे और भूमि-विवादों के समाधान जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को जमीन छीनने की कोशिश के रूप में देखना गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों के भूमि-अधिकारों को स्पष्ट रूप से दर्ज करना, विवादों को सुलझाना और इन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोग जानबूझकर दलितों में भ्रम और भय का माहौल फैला रहे हैं तथा अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए उन्हें भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस का भूमि-सुधार इतिहास और केसीआर पर निशाना

मंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय, गरीबों का कल्याण और समाज के वंचित वर्गों का उत्थान कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता रही है। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना क्षेत्र में दलितों को लगभग 25 लाख एकड़ जमीन बांटने और आदिवासी समुदायों को करीब 2 लाख एकड़ 'पोडु' वन भूमि पर अधिकार दिलाने का श्रेय कांग्रेस पार्टी को जाता है। उन्होंने केसीआर को 'दोरा' (सामंती जमींदार) बताते हुए लोगों से अपील की कि वे भारत राष्ट्र समिति (BRS) प्रमुख पर भरोसा न करें, क्योंकि उन्होंने सत्ता में आने पर दलितों को तीन एकड़ जमीन देने का वादा किया था, जिसे बाद में नजरअंदाज कर दिया गया।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में भूमि-अधिकारों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और एर्रावल्ली जांच विपक्षी दल BRS के साथ टकराव का केंद्र बन चुकी है। राजस्व विभाग की कार्रवाई और सरकार के आश्वासन के बीच जमीनी स्तर पर विश्वास बहाल करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। दलित किसानों और मंत्री के बयान पर आने वाले दिनों में विपक्ष की प्रतिक्रिया निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो मंत्री को सार्वजनिक रूप से सफाई देने की नौबत नहीं आती। एर्रावल्ली जांच राजनीतिक रूप से सही हो सकती है, लेकिन जब उसी गांव के दलित किसानों को नोटिस मिले तो प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी स्पष्ट दिखती है। केसीआर के अधूरे वादों पर हमला करना कांग्रेस की पुरानी रणनीति है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या तेलंगाना में दलित और आदिवासी किसान भूमि-रिकॉर्ड सुधार प्रक्रिया में खुद को सुरक्षित और भागीदार महसूस करते हैं — या केवल जांच की वस्तु।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में दलित किसानों को नोटिस क्यों जारी किए गए?
राजस्व अधिकारियों ने सिद्दीपेट जिले के एर्रावल्ली गांव के लगभग 120 दलित किसानों को उनके जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज़ लेकर पेश होने के नोटिस जारी किए। यह नोटिस मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा पूर्व CM केसीआर के फार्महाउस की जांच की घोषणा के बाद दी गई राजस्व विभाग की कार्रवाई के तहत आए।
राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने क्या आश्वासन दिया?
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि तेलंगाना सरकार दलितों या आदिवासियों की एक इंच जमीन नहीं लेगी और जमीन का अधिग्रहण सरकार की नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच और सर्वे का उद्देश्य भूमि-अधिकार दर्ज करना और विवाद सुलझाना है, न कि जमीन छीनना।
केसीआर के फार्महाउस की जांच का दलित किसानों से क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में बताया कि केसीआर का फार्महाउस 700 एकड़ में है, जिसमें कथित तौर पर 388 एकड़ सरकारी जमीन शामिल है। एर्रावल्ली उसी क्षेत्र में स्थित है, इसलिए वहां के दलित किसानों को भी जमीन-रिकॉर्ड जांच के तहत नोटिस मिले, जिससे भय का माहौल बना।
कांग्रेस ने तेलंगाना में दलितों को कितनी जमीन देने का दावा किया है?
राजस्व मंत्री के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने तेलंगाना क्षेत्र में दलितों को लगभग 25 लाख एकड़ जमीन बांटी और आदिवासी समुदायों को करीब 2 लाख एकड़ पोडु वन भूमि पर अधिकार दिलाए। पोडु वह वन भूमि है जिस पर आदिवासी पारंपरिक खेती करते हैं।
केसीआर ने दलितों से क्या वादा किया था और वह पूरा क्यों नहीं हुआ?
राजस्व मंत्री के अनुसार BRS प्रमुख केसीआर ने सत्ता में आने से पहले दलितों को तीन एकड़ जमीन देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद उस वादे को नजरअंदाज कर दिया गया। मंत्री ने इसी आधार पर दलितों से केसीआर पर भरोसा न करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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