तेलंगाना मानसून सत्र पर BJP का हमला: महेश्वर रेड्डी बोले — कांग्रेस-BRS का मिला-जुला नाटक
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी ने 13 सितंबर 2026 को हैदराबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि अभी-अभी संपन्न हुआ विधानसभा का मानसून सत्र कोई वास्तविक विधायी कार्यवाही नहीं थी, बल्कि कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (BRS) द्वारा मिलकर रचा गया एक राजनीतिक नाटक था। शनिवार, 12 सितंबर को समाप्त हुए इस पाँच दिवसीय सत्र पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए महेश्वर रेड्डी ने कहा कि आम जनता ने इन पाँच दिनों में सदन के कामकाज को बारीकी से देखा और निराशाजनक पाया।
कांग्रेस-BRS पर मिलीभगत का आरोप
महेश्वर रेड्डी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और BRS ने सत्र के पहले तीन दिनों में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के जरिए सदन का कीमती समय बर्बाद किया। उनके अनुसार यह आपसी छींटाकशी पूर्व-नियोजित थी, जिसका उद्देश्य असल जनहित के मुद्दों को सदन से दूर रखना था।
BJP नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी उनकी पार्टी आम जनता से जुड़े मसले उठाती है, कांग्रेस सरकार उन्हें दबाने की कोशिश करती है — यहाँ तक कि माइक्रोफोन बंद कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और ज़मीन घोटालों पर जवाबदेही माँगने की हर कोशिश को सत्तापक्ष ने जानबूझकर बाधित किया।
रेवेन्यू मंत्री और '22ए' विवाद
BJP फ्लोर लीडर ने रेवेन्यू मंत्री पोंगूलेटी श्रीनिवास रेड्डी की कड़ी आलोचना की। उनके अनुसार मंत्री ने सत्र के अंतिम दिन '22ए' प्रतिबंधित सूची के मुद्दे पर चार घंटे तक बोला, लेकिन 50 लाख किसानों और गरीबों की समस्याओं के समाधान पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
महेश्वर रेड्डी ने मंत्री के इस दावे को गलत ठहराया कि '22ए' प्रावधान अदालतों ने तय किए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून बनाने का अधिकार विधायिका का है और सरकारी आदेश (GO) सरकार जारी करती है — अदालतें नहीं। उन्होंने इसे मंत्री की संवैधानिक समझ की कमी करार दिया।
धरणी पोर्टल घोटाला और फोरेंसिक ऑडिट
महेश्वर रेड्डी ने मीडिया के सामने वीडियो फुटेज पेश किया, जिसमें स्वयं मंत्री विधानसभा में यह स्वीकार करते दिख रहे हैं कि पूर्ववर्ती BRS सरकार के कार्यकाल में धरणी पोर्टल की फोरेंसिक ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ऑडिट के अनुसार, 13,000 संदिग्ध लेन-देन के जरिए लगभग 23 लाख एकड़ ज़मीन का हस्तांतरण हुआ।
BJP नेता ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को इतने बड़े ज़मीन घोटाले की जानकारी है, तो वह इन पंजीकरणों को रद्द करके ज़मीन वापस क्यों नहीं ले रही। उन्होंने याद दिलाया कि पंजीकरण दस्तावेज़ स्वामित्व प्रमाण (टाइटल डीड) नहीं होते और सरकार के पास धोखाधड़ी वाले पंजीकरण निरस्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है। उन्होंने यह भी पूछा कि ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और नई गठित SIT वास्तविक जाँच कर रही है या महज औपचारिकता निभा रही है। उन्होंने पूरे मामले की किसी मौजूदा न्यायाधीश से न्यायिक जाँच की माँग की।
'फ्यूचर सिटी' और असाइन की गई ज़मीन का मामला
महेश्वर रेड्डी ने एक नई कथित योजना पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार हैदराबाद के आसपास हज़ारों एकड़ असाइन की गई ज़मीन — यानी वह सरकारी ज़मीन जो गरीबों को आवंटित की गई थी — को 'फ्यूचर सिटी' या 'फोर्थ सिटी' परियोजना के नाम पर सस्ते में हथियाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब आवंटियों से पहले ही बॉन्ड पेपर और नोटरी एग्रीमेंट लिए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में फ्रीहोल्ड अधिकार देने वाला कानून लाकर करोड़ों की संपत्ति बड़े हितधारकों के नाम कराई जा सके।
IDPL ज़मीन और जवाबदेही की माँग
कुतुबुल्लापुर इलाके में IDPL की 333 एकड़ बहुमूल्य भूमि निजी कंपनियों को सौंपे जाने का हवाला देते हुए महेश्वर रेड्डी ने पूछा कि लगभग ₹33,000 करोड़ की अनुमानित बाज़ार कीमत वाली इन ज़मीनों को वापस लेने में सरकार हिचकिचाहट क्यों दिखा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में ज़मीन आवंटन के कई विवाद एक साथ सुर्खियों में हैं। आने वाले दिनों में BJP इन मसलों को विधानसभा के बाहर और सड़कों पर भी उठाने की तैयारी में है।