14 सितंबर 2026
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तेलंगाना मानसून सत्र पर BJP का हमला: महेश्वर रेड्डी बोले — कांग्रेस-BRS का मिला-जुला नाटक

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तेलंगाना मानसून सत्र पर BJP का हमला: महेश्वर रेड्डी बोले — कांग्रेस-BRS का मिला-जुला नाटक

सारांश

तेलंगाना BJP फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी ने मानसून सत्र को कांग्रेस-BRS का सुनियोजित नाटक बताया। धरणी फोरेंसिक ऑडिट में 13,000 संदिग्ध लेन-देन और 23 लाख एकड़ ज़मीन हस्तांतरण के दावों के बाद BJP ने न्यायिक जाँच और ₹33,000 करोड़ की IDPL भूमि वापसी की माँग उठाई।

मुख्य बातें

BJP फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी ने 13 सितंबर 2026 को तेलंगाना मानसून सत्र को कांग्रेस-BRS का राजनीतिक नाटक करार दिया।
धरणी पोर्टल की फोरेंसिक ऑडिट में कथित तौर पर 13,000 संदिग्ध लेन-देन और 23 लाख एकड़ ज़मीन के अवैध हस्तांतरण का खुलासा हुआ।
BJP ने पूरे ज़मीन घोटाले की किसी मौजूदा न्यायाधीश से न्यायिक जाँच की माँग की।
रेवेन्यू मंत्री पोंगूलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर आरोप — '22ए' मुद्दे पर चार घंटे बोले, 50 लाख किसानों-गरीबों की समस्याओं का कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
कुतुबुल्लापुर में IDPL की 333 एकड़ ज़मीन (अनुमानित ₹33,000 करोड़ ) निजी कंपनियों को सौंपे जाने पर BJP ने सवाल उठाए।
'फ्यूचर सिटी' परियोजना के नाम पर गरीबों की असाइन की गई ज़मीन हथियाने की कथित साजिश का BJP ने पर्दाफाश करने का दावा किया।

तेलंगाना विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी ने 13 सितंबर 2026 को हैदराबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि अभी-अभी संपन्न हुआ विधानसभा का मानसून सत्र कोई वास्तविक विधायी कार्यवाही नहीं थी, बल्कि कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (BRS) द्वारा मिलकर रचा गया एक राजनीतिक नाटक था। शनिवार, 12 सितंबर को समाप्त हुए इस पाँच दिवसीय सत्र पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए महेश्वर रेड्डी ने कहा कि आम जनता ने इन पाँच दिनों में सदन के कामकाज को बारीकी से देखा और निराशाजनक पाया।

कांग्रेस-BRS पर मिलीभगत का आरोप

महेश्वर रेड्डी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और BRS ने सत्र के पहले तीन दिनों में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के जरिए सदन का कीमती समय बर्बाद किया। उनके अनुसार यह आपसी छींटाकशी पूर्व-नियोजित थी, जिसका उद्देश्य असल जनहित के मुद्दों को सदन से दूर रखना था।

BJP नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी उनकी पार्टी आम जनता से जुड़े मसले उठाती है, कांग्रेस सरकार उन्हें दबाने की कोशिश करती है — यहाँ तक कि माइक्रोफोन बंद कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और ज़मीन घोटालों पर जवाबदेही माँगने की हर कोशिश को सत्तापक्ष ने जानबूझकर बाधित किया।

रेवेन्यू मंत्री और '22ए' विवाद

BJP फ्लोर लीडर ने रेवेन्यू मंत्री पोंगूलेटी श्रीनिवास रेड्डी की कड़ी आलोचना की। उनके अनुसार मंत्री ने सत्र के अंतिम दिन '22ए' प्रतिबंधित सूची के मुद्दे पर चार घंटे तक बोला, लेकिन 50 लाख किसानों और गरीबों की समस्याओं के समाधान पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

महेश्वर रेड्डी ने मंत्री के इस दावे को गलत ठहराया कि '22ए' प्रावधान अदालतों ने तय किए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून बनाने का अधिकार विधायिका का है और सरकारी आदेश (GO) सरकार जारी करती है — अदालतें नहीं। उन्होंने इसे मंत्री की संवैधानिक समझ की कमी करार दिया।

धरणी पोर्टल घोटाला और फोरेंसिक ऑडिट

महेश्वर रेड्डी ने मीडिया के सामने वीडियो फुटेज पेश किया, जिसमें स्वयं मंत्री विधानसभा में यह स्वीकार करते दिख रहे हैं कि पूर्ववर्ती BRS सरकार के कार्यकाल में धरणी पोर्टल की फोरेंसिक ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ऑडिट के अनुसार, 13,000 संदिग्ध लेन-देन के जरिए लगभग 23 लाख एकड़ ज़मीन का हस्तांतरण हुआ।

BJP नेता ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को इतने बड़े ज़मीन घोटाले की जानकारी है, तो वह इन पंजीकरणों को रद्द करके ज़मीन वापस क्यों नहीं ले रही। उन्होंने याद दिलाया कि पंजीकरण दस्तावेज़ स्वामित्व प्रमाण (टाइटल डीड) नहीं होते और सरकार के पास धोखाधड़ी वाले पंजीकरण निरस्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है। उन्होंने यह भी पूछा कि ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और नई गठित SIT वास्तविक जाँच कर रही है या महज औपचारिकता निभा रही है। उन्होंने पूरे मामले की किसी मौजूदा न्यायाधीश से न्यायिक जाँच की माँग की।

'फ्यूचर सिटी' और असाइन की गई ज़मीन का मामला

महेश्वर रेड्डी ने एक नई कथित योजना पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार हैदराबाद के आसपास हज़ारों एकड़ असाइन की गई ज़मीन — यानी वह सरकारी ज़मीन जो गरीबों को आवंटित की गई थी — को 'फ्यूचर सिटी' या 'फोर्थ सिटी' परियोजना के नाम पर सस्ते में हथियाने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब आवंटियों से पहले ही बॉन्ड पेपर और नोटरी एग्रीमेंट लिए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में फ्रीहोल्ड अधिकार देने वाला कानून लाकर करोड़ों की संपत्ति बड़े हितधारकों के नाम कराई जा सके।

IDPL ज़मीन और जवाबदेही की माँग

कुतुबुल्लापुर इलाके में IDPL की 333 एकड़ बहुमूल्य भूमि निजी कंपनियों को सौंपे जाने का हवाला देते हुए महेश्वर रेड्डी ने पूछा कि लगभग ₹33,000 करोड़ की अनुमानित बाज़ार कीमत वाली इन ज़मीनों को वापस लेने में सरकार हिचकिचाहट क्यों दिखा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में ज़मीन आवंटन के कई विवाद एक साथ सुर्खियों में हैं। आने वाले दिनों में BJP इन मसलों को विधानसभा के बाहर और सड़कों पर भी उठाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित हों, तो तेलंगाना के भूमि प्रशासन इतिहास का सबसे बड़ा दस्तावेज़ीकृत घोटाला होगा। असल सवाल यह है कि सरकार सत्ता में आने के महीनों बाद भी ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही — पारदर्शिता का यह अभाव विपक्ष को नैरेटिव नियंत्रित करने का मौका देता है। 'फ्यूचर सिटी' का मामला दर्शाता है कि तेलंगाना में ज़मीन की राजनीति BRS-युग के बाद भी जारी है, और नई सरकार पुराने पैटर्न से खुद को अलग करने में विफल होती दिख रही है। मुख्यधारा की कवरेज इन विधानसभा बयानबाज़ियों को रोज़मर्रा की राजनीति मानकर छोड़ देती है — जबकि 23 लाख एकड़ और ₹33,000 करोड़ के दावे जवाबदेही की माँग करते हैं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP ने तेलंगाना मानसून सत्र को नाटक क्यों बताया?
BJP फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और BRS ने सत्र के पहले तीन दिन आपसी आरोप-प्रत्यारोप में बर्बाद किए और BJP द्वारा उठाए जनहित के मुद्दों को जानबूझकर दबाया गया। उनके अनुसार सत्र में कोई वास्तविक विधायी उपलब्धि नहीं हुई।
धरणी पोर्टल फोरेंसिक ऑडिट में क्या खुलासे हुए?
BJP के अनुसार धरणी पोर्टल की फोरेंसिक ऑडिट में पूर्व BRS सरकार के कार्यकाल में 13,000 संदिग्ध लेन-देन के जरिए लगभग 23 लाख एकड़ ज़मीन के हस्तांतरण का खुलासा हुआ। BJP ने माँग की है कि सरकार इन पंजीकरणों को रद्द करे और पूरे मामले की न्यायिक जाँच कराए।
'22ए' प्रतिबंधित सूची विवाद क्या है?
'22ए' तेलंगाना में भूमि पंजीकरण से जुड़ी एक प्रतिबंधित सूची है जिसमें विवादित या सरकारी ज़मीनें शामिल होती हैं। BJP का आरोप है कि रेवेन्यू मंत्री ने इस विषय पर चार घंटे बोला लेकिन 50 लाख किसानों और गरीबों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं सुझाया और यह भी गलत दावा किया कि '22ए' प्रावधान अदालतों ने तय किए थे।
'फ्यूचर सिटी' ज़मीन विवाद क्या है?
BJP नेता महेश्वर रेड्डी के अनुसार हैदराबाद के आसपास गरीबों को आवंटित 'असाइन की गई ज़मीन' को 'फ्यूचर सिटी' या 'फोर्थ सिटी' परियोजना के नाम पर सस्ते में हथियाने की कोशिश हो रही है। उनका दावा है कि आवंटियों से पहले ही बॉन्ड पेपर और नोटरी एग्रीमेंट लिए जा रहे हैं ताकि भविष्य में फ्रीहोल्ड अधिकार कानून लाकर संपत्ति बड़े हितधारकों के नाम कराई जा सके।
IDPL की 333 एकड़ ज़मीन का मामला क्या है?
BJP ने आरोप लगाया है कि हैदराबाद के कुतुबुल्लापुर इलाके में IDPL की 333 एकड़ मूल्यवान ज़मीन निजी कंपनियों को सौंप दी गई है, जिसकी बाज़ार कीमत लगभग ₹33,000 करोड़ बताई जा रही है। BJP ने सरकार से यह ज़मीन वापस लेने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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