तेलंगाना मानसून सत्र पर BJP का हमला: महेश्वर रेड्डी ने कांग्रेस-BRS को बताया 'नाटकबाज'
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी ने 13 सितंबर 2026 को हैदराबाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अभी-अभी समाप्त हुआ विधानसभा का मानसून सत्र वास्तविक विधायी कार्यवाही नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) द्वारा मिलकर रचा गया नाटक था। शनिवार को पाँच दिन चले इस सत्र के समापन के ठीक अगले दिन यह बयान आया, जिसने तेलंगाना की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
सत्र पर BJP की मुख्य आपत्तियाँ
महेश्वर रेड्डी ने आरोप लगाया कि जब-जब BJP ने जनहित के मुद्दे उठाने की कोशिश की, कांग्रेस सरकार ने उन्हें दबाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और भूमि घोटालों पर सवाल उठाते ही माइक बंद कर दिए गए। उनका आरोप था कि मंत्री सदन को गुमराह करते रहे और जवाबदेही से बचते रहे।
उन्होंने BRS और कांग्रेस पर यह भी तंज कसा कि दोनों दलों ने सत्र के पहले तीन दिन आपस में छींटाकशी में बर्बाद किए, जो उनके अनुसार पूर्व-नियोजित 'मिलीभगत' का हिस्सा था।
धरणी पोर्टल और भूमि घोटाले पर सवाल
BJP नेता ने मीडिया के सामने वीडियो फुटेज पेश किया जिसमें एक मंत्री विधानसभा में यह स्वीकार करते दिख रहे थे कि पूर्ववर्ती BRS सरकार के कार्यकाल में धरणी पोर्टल की गड़बड़ियों की फोरेंसिक ऑडिट से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं — जिनमें 13,000 संदिग्ध लेनदेन के ज़रिए लगभग 23 लाख एकड़ ज़मीन के हस्तांतरण का मामला भी शामिल है।
महेश्वर रेड्डी ने पूछा कि जब सरकार के पास धोखाधड़ी वाले पंजीकरण रद्द करने का पूरा कानूनी अधिकार है, तो वह कार्रवाई में देरी क्यों कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण दस्तावेज़ स्वामित्व प्रमाण (टाइटल डीड) नहीं होते, इसलिए फ़र्ज़ी रजिस्ट्रेशन रद्द करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक न करने का आरोप
BJP नेता ने सवाल किया कि कांग्रेस सरकार — जो खुद बड़े पैमाने पर लूट का आरोप लगाती है — ने सत्ता में आने के महीनों बाद भी फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की। उन्होंने नवगठित एसआईटी (SIT) की भूमिका पर भी संदेह जताते हुए कहा कि यह वास्तविक जाँच के बजाय महज एक 'सौदेबाजी का औज़ार' हो सकती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की किसी मौजूदा न्यायाधीश से न्यायिक जाँच कराने की माँग की।
रेवेन्यू मंत्री पोंगूलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने सत्र के आखिरी दिन '22A' प्रतिबंधित सूची के मुद्दे पर चार घंटे तक बोला, लेकिन 50 लाख किसानों और गरीबों की समस्याओं पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने मंत्री के उस दावे को 'समझ की कमी' करार दिया कि '22A' सेक्शन अदालतों ने तय किए — यह स्पष्ट करते हुए कि कानून विधायिका बनाती है, अदालतें नहीं।
'फ्यूचर सिटी' के नाम पर नई ज़मीन-हड़प योजना का आरोप
BJP नेता ने एक नए कथित षड्यंत्र का भी खुलासा किया। उनके अनुसार, हैदराबाद के आसपास हज़ारों एकड़ 'असाइन की गई ज़मीन' — जो मूलतः गरीबों को आवंटित सरकारी भूमि है — को 'फ्यूचर सिटी' या 'फोर्थ सिटी' जैसे प्रोजेक्टों के नाम पर कथित तौर पर सस्ते दामों पर हथियाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब आवंटियों से पहले ही बॉन्ड पेपर और नोटरी एग्रीमेंट लिए जा रहे हैं, ताकि बाद में 'फ्रीहोल्ड अधिकार' देने वाले कानून लाकर उन जमीनों को कुछ लोगों के नाम कराया जा सके। इसके अलावा, कुतुबुल्लापुर क्षेत्र में स्थित IDPL की 333 एकड़ मूल्यवान ज़मीन — जिसकी अनुमानित कीमत ₹33,000 करोड़ बताई जाती है — निजी कंपनियों को सौंपे जाने पर भी उन्होंने सरकार से जवाब माँगा।
आगे क्या होगा
BJP के इन आरोपों के बाद तेलंगाना में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ना तय है। महेश्वर रेड्डी ने न्यायिक जाँच और ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग दोहराई है। यह देखना होगा कि कांग्रेस सरकार और BRS इन आरोपों का किस तरह जवाब देते हैं, और क्या SIT की जाँच कोई ठोस परिणाम दे पाती है।