एशियाई खेलों के मौके पर मांडविया और प्रिंस वांगचुक की मुलाकात, भारत-भूटान खेल सहयोग को मिलेगी नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और भूटान ओलंपिक समिति (BOC) के अध्यक्ष प्रिंस जिग्येल उग्येन वांगचुक ने 20 सितंबर 2026 को नागोया, जापान में जारी 20वें एशियाई खेलों के इतर एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें भारत और भूटान के बीच खेल सहयोग को नई ऊँचाई देने पर विस्तार से चर्चा हुई। भूटान ओलंपिक समिति के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बैठक दोनों देशों के बीच दशकों पुराने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि में हुई और खेल को सहयोग के एक उभरते नए क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया।
बैठक में क्या हुआ
बैठक में दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि भारत के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और भूटान ओलंपिक समिति के बीच समन्वय को और गहरा किया जाएगा। यह त्रिस्तरीय सहयोग ढाँचा दोनों देशों के खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण, अनुभव और प्रतिस्पर्धा के नए अवसर खोलेगा। गौरतलब है कि भारत और भूटान के बीच पहले से ही राजनयिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में घनिष्ठ संबंध हैं, और अब खेल इस रिश्ते का एक नया सेतु बन रहा है।
भारत की वैश्विक खेल महत्वाकांक्षा
बैठक के दौरान मांडविया ने भारत की उस व्यापक रणनीति का उल्लेख किया, जिसके तहत देश को एक वैश्विक खेल केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी को भारत की इसी महत्वाकांक्षा का हिस्सा बताया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ओलंपिक 2036 की दावेदारी की तैयारी में जुटा है और खेल के बुनियादी ढाँचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
भूटान की प्रतिक्रिया
प्रिंस जिग्येल उग्येन वांगचुक ने कहा कि भारत में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी होगी, क्योंकि इससे भूटान के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और अनुभव हासिल करने के अधिक अवसर मिलेंगे। उन्होंने भारत की खेल यात्रा और भविष्य की खेल महत्वाकांक्षाओं के प्रति अपना समर्थन और शुभकामनाएं भी व्यक्त कीं।
जयशंकर की भूटान यात्रा से जुड़ा संदर्भ
इस खेल-वार्ता से कुछ दिन पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी आधिकारिक भूटान यात्रा के दौरान थिम्फू में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की थी। जयशंकर ने कहा था कि भारत-भूटान की अनूठी मित्रता को और गहरा करने के लिए राजा का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन दोनों घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो स्पष्ट होता है कि दोनों देश राजनयिक से लेकर खेल तक हर मोर्चे पर द्विपक्षीय सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश में हैं।
आगे की राह
दोनों पक्षों के बीच हुई इस सहमति के बाद अब यह देखना होगा कि IOA और BOC के बीच औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) या कार्ययोजना कब तक आकार लेती है। खेल के क्षेत्र में यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के एथलीटों के लिए नए द्वार खोलेगी, बल्कि भारत की 'पड़ोसी-पहले' नीति को भी नई सामग्री प्रदान करेगी।