कानपुर में 5,000 ईवीएम पहुंचने का दावा झूठा, जिला निर्वाचन अधिकारी ने आधिकारिक खंडन जारी किया
सारांश
मुख्य बातें
कानपुर नगर में 5,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और 12 इंजीनियरों के पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा दावा पूरी तरह भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत है। कानपुर नगर के जिला निर्वाचन अधिकारी ने 20 सितंबर 2026 को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से यह स्पष्टिकरण जारी करते हुए इस अफवाह का खंडन किया।
क्या था वायरल दावा
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा तेज़ी से फैलाया गया कि कानपुर नगर में बाहर से 5,000 ईवीएम और 12 इंजीनियर पहुंचाए गए हैं। यह दावा विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिससे चुनाव प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई।
प्रशासन का आधिकारिक खंडन
जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) के लिए कानपुर नगर में किसी अन्य स्थान से कोई नई ईवीएम नहीं लाई गई है। उन्होंने बताया कि ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच 17 सितंबर 2026 से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पहले से ही निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू हो चुकी है।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि एफएलसी का पूरा शेड्यूल और इससे जुड़ी समस्त जानकारी पहले ही व्यापक रूप से सार्वजनिक की जा चुकी है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
चुनावी तैयारियों का संदर्भ
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग (ECI) ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग एक नियमित और अनिवार्य प्रक्रिया है, जो चुनाव से पूर्व राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनावी माहौल में भ्रामक सूचनाओं के प्रसार की घटनाएँ बढ़ी हैं।
आम जनता से अपील
जिला निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली किसी भी अपुष्ट और भ्रामक सूचना पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित कर लें। प्रशासन ने चेताया है कि इस प्रकार की अफवाहें चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास कमज़ोर करने के उद्देश्य से फैलाई जा सकती हैं।
आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के दौरान प्रशासन ऐसी किसी भी भ्रामक सूचना का त्वरित खंडन जारी करता रहेगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनविश्वास बना रहे।