यूपी विधानसभा चुनाव 2027: ईवीएम फर्स्ट लेवल चेकिंग पर जीबीयू में बड़ी कार्यशाला, 21 जिलों के अधिकारी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज करते हुए 19 अगस्त को ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की फर्स्ट लेवल चेकिंग पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के पाँच मंडलों के अंतर्गत आने वाले 21 जिलों के जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी सम्मिलित हुए।
कार्यशाला का दायरा और भागीदारी
कार्यशाला में आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर और बरेली मंडल के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इन पाँचों मंडलों के 21 जिलाधिकारी — जो जिला निर्वाचन अधिकारी की भूमिका निभाते हैं — और 21 अपर जिलाधिकारी (एडीएम) को ईवीएम जाँच की निर्धारित प्रक्रियाओं, मशीनों की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े प्रोटोकॉल पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच भरोसा मज़बूत करने पर जोर दे रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने दिए निर्देश
भारत निर्वाचन आयोग के सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग ने कार्यशाला के दौरान ईवीएम फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया और चुनावी तैयारियों पर अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने भी चुनाव प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि ईवीएम की हैंडलिंग में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति उल्लेखनीय
निर्वाचन आयोग ने ईवीएम प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी कार्यशाला में आमंत्रित किया था। हालाँकि, उल्लेखनीय रूप से किसी भी राजनीतिक दल का कोई प्रतिनिधि इस कार्यशाला में उपस्थित नहीं हुआ। गौरतलब है कि ईवीएम की विश्वसनीयता पर राजनीतिक विवाद के बीच यह अनुपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तर पर अब जिलाधिकारी और एडीएम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठकें आयोजित करेंगे।
ईवीएम जाँच से स्ट्रांग रूम तक की प्रक्रिया
अधिकारियों को बताया गया कि फर्स्ट लेवल चेकिंग पूरी होने के बाद ईवीएम की रैंडम चेकिंग भी कराई जाएगी, जिसमें निर्धारित नियमों और पारदर्शिता का पूरा पालन होगा। इसके बाद मशीनों को सुरक्षित तरीके से स्ट्रांग रूम में रखकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सील किया जाएगा। आयोग का स्पष्ट उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता बनाए रखना है।
आगे क्या होगा
कार्यशाला के बाद जिला स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ बैठकें होंगी, जिनमें ईवीएम फर्स्ट लेवल चेकिंग और संबंधित प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी साझा की जाएगी। निर्वाचन आयोग की यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि विधानसभा चुनाव से पहले जिला स्तर पर प्रशासनिक तैयारियाँ समय रहते पूरी करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।