पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान: कुर्मी आंदोलनकारियों के सभी केस वापस होंगे, ₹50 करोड़ का बोर्ड
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20 सितंबर 2026 को पुरुलिया जिले के करम महासमावेश में घोषणा की कि पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार द्वारा कुर्मी आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने और कुर्मी विकास बोर्ड के लिए ₹50 करोड़ आवंटित करने का वादा भी किया।
मुख्य घोषणाएँ
पुरुलिया-प्रथम ब्लॉक के कराडी मैदान में आयोजित करम महासमावेश में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अधिकारी ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। कुर्मी समुदाय के प्रमुख समर्थक अजीत महतो की मौजूदगी में उन्होंने एलान किया कि बांकुरा और पुरुलिया जिलों के लोगों को अब अलग-थलग महसूस नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुरुलिया में शीघ्र हवाई सेवाएँ शुरू करने, पुरुलिया चिड़ियाघर का जीर्णोद्धार करने और जिले में चीते लाने की योजना पर काम चल रहा है।
TMC सरकार पर आरोप
अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उसने कुर्मी और अन्य समुदायों के बीच मनमुटाव पैदा करके जंगलमहल इलाके को जानबूझकर अलग-थलग किया था। उनके अनुसार, विरोध करने पर लोगों को प्रताड़ित किया गया, झूठे केस दर्ज किए गए, और बच्चों एवं बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। उन्होंने पिछली सरकार पर पहाड़ों को बेचने का भी आरोप लगाया और वादा किया कि उनके कार्यकाल में किसी भी प्राकृतिक संसाधन की नीलामी नहीं होगी।
कुर्मी समुदाय की माँगें और ST दर्जे का मुद्दा
गौरतलब है कि हाल ही में राज्य सरकार ने कहा था कि वह कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल कराने के लिए केंद्र को एक 'अग्रेषित औचित्य रिपोर्ट' भेजेगी। यह कदम कुर्मी समुदाय की दशकों पुरानी माँग से जुड़ा है। कुर्माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आम जनता पर असर
मामले वापसी की घोषणा से उन सैकड़ों कुर्मी आंदोलनकारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन पर पिछले वर्षों में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए गए थे। ₹50 करोड़ के कुर्मी विकास बोर्ड के आवंटन से समुदाय से जुड़ी शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलने की संभावना है, हालाँकि राशि के उपयोग का विस्तृत खाका अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार जंगलमहल क्षेत्र में अपनी पैठ मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। कुर्माली को आठवीं अनुसूची में शामिल कराना केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा, जिसे लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया में समय लग सकता है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक वादों के क्रियान्वयन की समयसीमा और पारदर्शिता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।