20 सितंबर 2026
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पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान: कुर्मी आंदोलनकारियों के सभी केस वापस होंगे, ₹50 करोड़ का बोर्ड

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पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान: कुर्मी आंदोलनकारियों के सभी केस वापस होंगे, ₹50 करोड़ का बोर्ड

सारांश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पुरुलिया के करम महासमावेश में कुर्मी आंदोलनकारियों के सभी झूठे केस वापस लेने, कुर्माली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने और ₹50 करोड़ के विकास बोर्ड का ऐलान किया — जंगलमहल में राजनीतिक पुनर्गठन का बड़ा संकेत।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 20 सितंबर 2026 को पुरुलिया में कुर्मी आंदोलनकारियों के सभी दर्ज मामले वापस लेने की घोषणा की।
कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का वादा किया गया।
कुर्मी विकास बोर्ड के लिए ₹50 करोड़ आवंटित; ज़रूरत पड़ने पर राशि बढ़ाने का आश्वासन।
राज्य सरकार कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल कराने के लिए केंद्र को रिपोर्ट भेजेगी।
पुरुलिया में हवाई सेवा, चिड़ियाघर जीर्णोद्धार और चीते लाने की योजना भी घोषित।
अधिकारी ने पिछली TMC सरकार पर झूठे केस दर्ज करने और जंगलमहल को अलग-थलग करने का आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20 सितंबर 2026 को पुरुलिया जिले के करम महासमावेश में घोषणा की कि पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार द्वारा कुर्मी आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने और कुर्मी विकास बोर्ड के लिए ₹50 करोड़ आवंटित करने का वादा भी किया।

मुख्य घोषणाएँ

पुरुलिया-प्रथम ब्लॉक के कराडी मैदान में आयोजित करम महासमावेश में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अधिकारी ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। कुर्मी समुदाय के प्रमुख समर्थक अजीत महतो की मौजूदगी में उन्होंने एलान किया कि बांकुरा और पुरुलिया जिलों के लोगों को अब अलग-थलग महसूस नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुरुलिया में शीघ्र हवाई सेवाएँ शुरू करने, पुरुलिया चिड़ियाघर का जीर्णोद्धार करने और जिले में चीते लाने की योजना पर काम चल रहा है।

TMC सरकार पर आरोप

अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उसने कुर्मी और अन्य समुदायों के बीच मनमुटाव पैदा करके जंगलमहल इलाके को जानबूझकर अलग-थलग किया था। उनके अनुसार, विरोध करने पर लोगों को प्रताड़ित किया गया, झूठे केस दर्ज किए गए, और बच्चों एवं बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। उन्होंने पिछली सरकार पर पहाड़ों को बेचने का भी आरोप लगाया और वादा किया कि उनके कार्यकाल में किसी भी प्राकृतिक संसाधन की नीलामी नहीं होगी।

कुर्मी समुदाय की माँगें और ST दर्जे का मुद्दा

गौरतलब है कि हाल ही में राज्य सरकार ने कहा था कि वह कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल कराने के लिए केंद्र को एक 'अग्रेषित औचित्य रिपोर्ट' भेजेगी। यह कदम कुर्मी समुदाय की दशकों पुरानी माँग से जुड़ा है। कुर्माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आम जनता पर असर

मामले वापसी की घोषणा से उन सैकड़ों कुर्मी आंदोलनकारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन पर पिछले वर्षों में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए गए थे। ₹50 करोड़ के कुर्मी विकास बोर्ड के आवंटन से समुदाय से जुड़ी शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलने की संभावना है, हालाँकि राशि के उपयोग का विस्तृत खाका अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार जंगलमहल क्षेत्र में अपनी पैठ मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। कुर्माली को आठवीं अनुसूची में शामिल कराना केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा, जिसे लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया में समय लग सकता है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक वादों के क्रियान्वयन की समयसीमा और पारदर्शिता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि BJP की जंगलमहल रणनीति का हिस्सा हैं — वह इलाका जहाँ TMC और BJP दोनों ने वर्षों से आदिवासी और OBC समुदायों की राजनीतिक निष्ठा के लिए होड़ की है। कुर्माली को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का वादा पुराना है, और इसके लिए केंद्रीय संसद की मंजूरी ज़रूरी है — राज्य सरकार अकेले यह नहीं कर सकती। ST दर्जे की 'औचित्य रिपोर्ट' का ज़िक्र भी नया नहीं है; मूल सवाल यह है कि इस बार प्रक्रिया कितनी तेज़ चलेगी। मामले वापसी और ₹50 करोड़ का बोर्ड ठोस कदम हैं, लेकिन क्रियान्वयन की समयसीमा और पारदर्शिता के बिना ये वादे भी पिछली सरकारों के अधूरे आश्वासनों की सूची में जुड़ सकते हैं।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुर्मी आंदोलन से जुड़े केस वापस लेने का फैसला क्या है?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20 सितंबर 2026 को घोषणा की कि पिछली TMC सरकार ने कुर्मी आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ जो मामले दर्ज किए थे, वे सभी वापस लिए जाएंगे। इससे उन सैकड़ों आंदोलनकारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जिन पर वर्षों से मुकदमे चल रहे थे।
कुर्माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का क्या मतलब है?
संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को आधिकारिक मान्यता मिलती है और उन्हें सरकारी कामकाज, शिक्षा तथा परीक्षाओं में स्थान दिया जाता है। कुर्माली को इस सूची में शामिल कराने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक है, जो केवल राज्य सरकार के स्तर पर नहीं हो सकती।
कुर्मी समुदाय को ST दर्जा मिलने की स्थिति क्या है?
राज्य सरकार ने कहा है कि वह कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल कराने के लिए केंद्र को एक अग्रेषित औचित्य रिपोर्ट भेजेगी। यह माँग दशकों पुरानी है और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार एवं भारतीय मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण की सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
कुर्मी विकास बोर्ड के लिए कितनी राशि दी जाएगी?
CM अधिकारी ने कुर्मी विकास बोर्ड के लिए ₹50 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की है और ज़रूरत पड़ने पर यह राशि बढ़ाने का वादा भी किया है। इस बोर्ड से समुदाय की सांस्कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
पुरुलिया के लिए और क्या घोषणाएँ की गई हैं?
CM अधिकारी ने पुरुलिया में जल्द हवाई सेवा शुरू करने, पुरुलिया चिड़ियाघर का जीर्णोद्धार करने और जिले में चीते लाने की योजना का भी ऐलान किया। साथ ही उन्होंने वादा किया कि उनके कार्यकाल में किसी प्राकृतिक संसाधन की नीलामी नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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