22 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल में 1 अगस्त से पुनः सक्रिय होंगे स्वायत्त आयोग, CM सुवेंदु अधिकारी का ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल में 1 अगस्त से पुनः सक्रिय होंगे स्वायत्त आयोग, CM सुवेंदु अधिकारी का ऐलान

सारांश

सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा बदलाव — CM सुवेंदु अधिकारी ने 1 अगस्त से पाँच प्रमुख संवैधानिक आयोगों को पुनः सक्रिय करने का ऐलान किया, जो TMC कार्यकाल में कथित तौर पर निष्क्रिय पड़े थे। साथ ही UCC रिपोर्ट और दुर्घटना पीड़ितों को ₹5 लाख मुआवजे की भी घोषणा।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 22 जुलाई को विधानसभा में घोषणा की कि पाँच प्रमुख स्वायत्त आयोग 1 अगस्त से पुनः सक्रिय होंगे।
कथित तौर पर TMC सरकार के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग , महिला आयोग , बाल संरक्षण आयोग , SC-ST-OBC-अल्पसंख्यक आयोग और सूचना आयुक्त निष्क्रिय रहे।
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग जल्द ही UCC पर रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके बाद विधेयक सदन में पेश होगा।
बंगाल की खाड़ी नाव हादसे और सिक्किम सुरंग दुर्घटना के पीड़ित परिवारों को ₹5 लाख मुआवजा और एक सदस्य को रोज़गार दिया जाएगा।
सभी आयोगों को शिकायतें दर्ज करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 22 जुलाई को विधानसभा में गृह विभाग के बजट आवंटन पर चर्चा के दौरान घोषणा की कि राज्य के तमाम संवैधानिक स्वायत्त आयोग 1 अगस्त से पुनः सक्रिय किए जाएंगे। ये वे निकाय हैं जो कथित तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में निष्क्रिय पड़े रहे।

कौन-कौन से आयोग होंगे पुनर्जीवित

मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग, पश्चिम बंगाल महिला आयोग, पश्चिम बंगाल बाल संरक्षण आयोग, पश्चिम बंगाल अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति-अन्य पिछड़ा वर्ग-अल्पसंख्यक आयोग और पश्चिम बंगाल सूचना आयुक्त — ये सभी संवैधानिक निकाय अब से शिकायतें दर्ज करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।

उन्होंने पूर्व TMC सरकार पर आरोप लगाया कि उसने न केवल इन निकायों को निष्क्रिय रखा, बल्कि पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक गांगुली को भी कथित तौर पर परेशान किया गया और उन पर हमला किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में संवैधानिक जवाबदेही को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

समान नागरिक संहिता पर आयोग की रिपोर्ट जल्द

मुख्यमंत्री अधिकारी ने यह भी बताया कि सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन पर शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

इस आयोग की सिफारिशें मिलने के बाद राज्य सरकार अंतिम UCC विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत करेगी। सदन की मंजूरी के बाद विधेयक को राज्यपाल आर.एन. रवि के कार्यालय को स्वीकृति हेतु भेजा जाएगा, जिसके पश्चात यह कानून का रूप लेगा। गौरतलब है कि UCC को लेकर पश्चिम बंगाल की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस के बीच आई है।

मछुआरों और प्रवासी मज़दूरों के परिवारों को मुआवजा

मुख्यमंत्री ने दो अलग-अलग हादसों में जान गँवाने वाले परिवारों के लिए वित्तीय राहत की भी घोषणा की। बंगाल की खाड़ी में हुई मछली पकड़ने वाली नाव दुर्घटना में मारे गए मछुआरों के परिजनों और पड़ोसी राज्य सिक्किम में एक सुरंग दुर्घटना में मारे गए पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को ₹5 लाख प्रति परिवार का मुआवजा राज्य कोष से दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, अधिकारी ने घोषणा की कि इन दोनों हादसों के प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार की ओर से रोज़गार भी प्रदान किया जाएगा — यह एक असामान्य कदम है जो मुआवजे से आगे जाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

आलोचकों का कहना है कि संवैधानिक निकायों का वर्षों तक निष्क्रिय रहना लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद ऐसे आयोगों को पुनर्जीवित करने का वादा किया गया हो — असली परीक्षा इनकी स्वतंत्रता और कार्यात्मक क्षमता सुनिश्चित करने में होगी।

नई सरकार के लिए अगले कुछ महीने निर्णायक होंगे — 1 अगस्त की समयसीमा, UCC रिपोर्ट और मुआवजे की घोषणाएँ मिलकर यह तय करेंगी कि वादे ज़मीन पर कितने उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या महज कागज़ी सक्रियता दिखाई जाएगी। UCC पर रिपोर्ट का इंतज़ार और राज्यपाल की भूमिका — दोनों ही विवाद के संभावित बिंदु हैं। पीड़ित परिवारों को रोज़गार देने का वादा मानवीय दृष्टि से सराहनीय है, पर इसके क्रियान्वयन का कोई ठोस ढाँचा अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में 1 अगस्त से कौन-से आयोग पुनः सक्रिय होंगे?
पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग, SC-ST-OBC-अल्पसंख्यक आयोग और सूचना आयुक्त — ये पाँच संवैधानिक निकाय 1 अगस्त से पुनः सक्रिय किए जाएंगे। CM सुवेंदु अधिकारी के अनुसार इन्हें शिकायतें दर्ज करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया जाएगा।
TMC सरकार पर इन आयोगों को निष्क्रिय रखने का आरोप क्यों लगाया जा रहा है?
CM अधिकारी ने विधानसभा में कहा कि पूर्व TMC सरकार के कार्यकाल में ये सभी संवैधानिक निकाय कथित तौर पर निष्क्रिय रहे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मानवाधिकार आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक गांगुली को परेशान किया गया और प्रशासनिक अधिकारियों को चुप कराया गया।
पश्चिम बंगाल में UCC विधेयक कब तक आ सकता है?
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग जल्द ही UCC पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद राज्य सरकार अंतिम विधेयक विधानसभा में पेश करेगी और सदन की मंजूरी के बाद इसे राज्यपाल के पास स्वीकृति हेतु भेजा जाएगा।
बंगाल की खाड़ी और सिक्किम हादसों के पीड़ित परिवारों को क्या राहत मिलेगी?
CM अधिकारी ने घोषणा की कि दोनों हादसों — बंगाल की खाड़ी में नाव दुर्घटना और सिक्किम में सुरंग हादसे — में मारे गए लोगों के प्रत्येक परिवार को राज्य कोष से ₹5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी रोज़गार भी प्रदान किया जाएगा।
क्या पश्चिम बंगाल में स्वायत्त आयोगों का निष्क्रिय रहना असामान्य है?
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन निकायों का लंबे समय तक निष्क्रिय रहना लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ये आयोग नागरिकों की शिकायतों के निवारण और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक रूप से स्थापित हैं, इसलिए इनकी निष्क्रियता सीधे आम जनता को प्रभावित करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले