20 सितंबर 2026
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एशियन गेम्स 2026: इलावेनिल वालरिवन ने जीते दो सिल्वर मेडल, 8वीं क्लास से शुरू हुआ था सफर

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एशियन गेम्स 2026: इलावेनिल वालरिवन ने जीते दो सिल्वर मेडल, 8वीं क्लास से शुरू हुआ था सफर

सारांश

एशियन गेम्स 2026 के पहले ही दिन इलावेनिल वालरिवन ने भारत की पदक तालिका खोली — 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत और टीम दोनों स्पर्धाओं में सिल्वर जीतकर। आठवीं क्लास में जागी रुचि, 14 साल की मेहनत और गुजरात सरकार के सहयोग से तैयार हुई यह खिलाड़ी अब राष्ट्रीय प्रेरणा बन चुकी है।

मुख्य बातें

इलावेनिल वालरिवन ने एशियन गेम्स 2026 में 20 सितंबर को एक ही दिन में दो सिल्वर मेडल जीते।
व्यक्तिगत स्पर्धा में 252.4 प्वाइंट्स ; गोल्ड जापान की हिनाता ताइची को ( 253.0 )।
टीम स्पर्धा में सोनम (634.1), इलावेनिल (633.5) और विदर्शा (630.4) के साथ भारत ने 1898.0 का स्कोर किया।
इलावेनिल ने 8वीं कक्षा में शूटिंग शुरू की; 14 साल की मेहनत के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई।
कोच नेहा चौहान और मेंटॉर गगन नारंग की गन फॉर ग्लोरी एकेडमी तथा गुजरात सरकार की DLSS योजना ने करियर को आकार दिया।

निशानेबाज इलावेनिल वालरिवन ने एशियन गेम्स 2026 में 20 सितंबर को भारत के लिए एक ही दिन में दो सिल्वर मेडल जीते — पहला महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में, और दूसरा उसी श्रेणी की टीम स्पर्धा में। इस प्रदर्शन ने एशियन गेम्स 2026 में भारत की पदक तालिका का आगाज़ किया और अहमदाबाद से ताल्लुक रखने वाली इस निशानेबाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।

व्यक्तिगत स्पर्धा में प्रदर्शन

महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत फाइनल में इलावेनिल ने 252.4 प्वाइंट्स के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। जापान की हिनाता ताइची ने 253.0 प्वाइंट्स के साथ गोल्ड जीता, जबकि साउथ कोरिया की ह्योजिन बान ने 230.4 प्वाइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। यह उल्लेखनीय है कि इलावेनिल इससे पहले वर्ल्ड कप 2019 में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं, जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अहम मील का पत्थर था।

टीम स्पर्धा में भारत का प्रदर्शन

टीम स्पर्धा में भारत ने कुल 1898.0 का स्कोर हासिल करते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान सुनिश्चित किया। क्वालिफिकेशन राउंड में सोनम ने 634.1 के स्कोर के साथ तीसरा स्थान पाया, इलावेनिल 633.5 के साथ सातवें और विदर्शा 630.4 के साथ 12वें स्थान पर रहीं। तीनों खिलाड़ियों के संयुक्त प्रयास ने भारत को टीम सिल्वर दिलाया।

8वीं कक्षा से शुरू हुई निशानेबाज़ी की राह

इलावेनिल की माँ सरोजा वालरिवन ने बताया कि उनकी बेटी ने इस मेडल के लिए करीब 14 साल मेहनत की है। उन्होंने कहा, 'जब इलावेनिल आठवीं क्लास में थीं, तो पिता के एक दोस्त को देखकर शूटिंग में रुचि जागी।' इलावेनिल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संस्कार धाम एंड डिवाइन बर्ड्स स्कूल से प्राप्त की और गुजरात यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। तमिलनाडु की जड़ों वाली इस खिलाड़ी ने केजी से पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पूरी पढ़ाई गुजरात से की और गुजराती उनकी प्रमुख भाषा रही।

गुजरात सरकार की डिस्ट्रिक्ट लेवल स्पोर्ट्स स्कूल (DLSS) योजना ने इलावेनिल के करियर को नई दिशा दी। उन्होंने 'खेल महाकुंभ' और 'खेलो इंडिया' जैसे आयोजनों में भी हिस्सा लिया। फिलहाल वह कोच नेहा चौहान और मेंटॉर गगन नारंग की देखरेख में गन फॉर ग्लोरी एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं।

परिवार की खुशी और संदेश

माँ सरोजा ने कहा, 'बहुत अच्छा लग रहा है। भारत की पदक तालिका की शुरुआत हो गई है। एक ही दिन में दो मेडल देश की झोली में आए हैं। ये गुजरात और भारत के लिए गर्व की बात है।' पिता वालरिवन ने कहा, 'पहले ही दिन भारत ने अपना खाता खोल लिया। दोनों मेडल में हमारी बेटी की भागीदारी रही है।' दोनों माता-पिता ने पीएचडी की है और उनका बेटा आर्मी में है। माँ-पिता दोनों ने अन्य बच्चों के अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को कम से कम एक खेल ज़रूर अपनाने दें, क्योंकि सरकार खिलाड़ियों को पूरा सहयोग — ट्रेनिंग और रोज़गार — दे रही है।

आगे क्या

एशियन गेम्स 2026 में भारत की शुरुआत इस दोहरे पदक के साथ उत्साहजनक रही है। इलावेनिल का यह प्रदर्शन देश की युवा निशानेबाज़ों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। गौरतलब है कि सरकारी खेल योजनाओं और निजी अकादमियों के संयुक्त सहयोग से तैयार हुईं इलावेनिल जैसी खिलाड़ी भारत की खेल नीति की सफलता का जीवंत प्रमाण हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की खेल नीति के उस मॉडल की परीक्षा है जिसमें सरकारी योजनाएँ और निजी अकादमियाँ मिलकर प्रतिभा को तराशती हैं। DLSS, खेलो इंडिया और गन फॉर ग्लोरी जैसे संस्थानों के संयोग से निकली यह सफलता दिखाती है कि ढाँचागत सहयोग मिले तो दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों से भी विश्वस्तरीय खिलाड़ी उभर सकते हैं। फिर भी असली सवाल यह है कि क्या यह मॉडल सिर्फ चुनिंदा खेलों और बड़े शहरों तक सीमित रहेगा, या ग्रामीण और छोटे कस्बों की प्रतिभाओं तक भी पहुँचेगा।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलावेनिल वालरिवन ने एशियन गेम्स 2026 में कौन से मेडल जीते?
इलावेनिल वालरिवन ने 20 सितंबर 2026 को एशियन गेम्स में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा (252.4 प्वाइंट्स) और टीम स्पर्धा (1898.0 स्कोर) — दोनों में सिल्वर मेडल जीते। यह एशियन गेम्स 2026 में भारत के शुरुआती पदक थे।
इलावेनिल वालरिवन ने शूटिंग कब और कैसे शुरू की?
इलावेनिल की माँ सरोजा के अनुसार, इलावेनिल ने 8वीं कक्षा में पिता के एक दोस्त को शूटिंग करते देख इस खेल में रुचि ली। गुजरात सरकार की DLSS योजना और स्कूल गेम्स के ज़रिए उनकी शुरुआत हुई और करीब 14 साल की मेहनत के बाद यह उपलब्धि मिली।
इलावेनिल वालरिवन की ट्रेनिंग कहाँ और किसके साथ होती है?
इलावेनिल फिलहाल कोच नेहा चौहान और मेंटॉर गगन नारंग की देखरेख में 'गन फॉर ग्लोरी एकेडमी' में प्रशिक्षण लेती हैं। इसके अलावा उन्हें गुजरात सरकार और भारत सरकार दोनों का सहयोग मिला है।
10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड किसने जीता?
जापान की हिनाता ताइची ने 253.0 प्वाइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता। इलावेनिल 252.4 प्वाइंट्स के साथ सिल्वर पर रहीं और साउथ कोरिया की ह्योजिन बान ने 230.4 प्वाइंट्स के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया।
एशियन गेम्स 2026 की टीम स्पर्धा में भारतीय टीम कौन-कौन थीं?
भारत की टीम में सोनम (634.1), इलावेनिल (633.5) और विदर्शा (630.4) शामिल थीं। तीनों ने मिलकर 1898.0 का संयुक्त स्कोर हासिल किया और टीम सिल्वर मेडल सुनिश्चित किया।
राष्ट्र प्रेस
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