भोपाल के मुफ्ती नदवी का फतवा: मुस्लिम युवाओं का गरबा में शामिल होना हराम, अपनी पहचान बनाए रखें
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल के著名 मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने नवरात्रि 2026 से पहले मुस्लिम युवाओं को गरबा में भाग लेने के विरुद्ध स्पष्ट अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में कहा कि मुस्लिम लड़कों का गरबा जैसे हिंदू धार्मिक आयोजन में शिरकत करना हराम है और यह उनकी धार्मिक पहचान के अनुकूल नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में नवरात्रि के उत्सव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं।
मुफ्ती ने क्या कहा
मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने अपने वीडियो बयान में कहा कि जो व्यक्ति किसी दूसरी कौम के धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होता है, वह उसी कौम के तौर-तरीकों का हिस्सा माना जाता है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, 'आज के दौर में जो गरबा या हिंदू रस्म होती है, उसमें मुस्लिम लड़कों का शिरकत करना जायज है? बस इतना ही कहूँगा कि यह हराम है।'
मुफ्ती ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ गरबा में जाना बेहतर समझते हैं, लेकिन उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इससे परहेज करें। उनका कहना था कि दूसरी कौम की धार्मिक पहचान और रस्मों का अनुसरण करना उचित नहीं है।
पहले भी उठी है यही माँग
गौरतलब है कि मुफ्ती नदवी के बयान से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी भी मुस्लिम युवाओं से इसी प्रकार की अपील कर चुकी है। कमेटी की ओर से स्पष्ट किया गया था कि यह अपील किसी धार्मिक आयोजन के विरोध में नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और संभावित विवादों से बचना है। इस प्रकार यह दूसरी बार है जब किसी मुस्लिम संगठन या धर्मगुरु ने नवरात्रि से पहले इस विषय पर सार्वजनिक अपील की है।
गरबा आयोजनों में विवाद की पृष्ठभूमि
नवरात्रि के मौके पर विभिन्न समितियों द्वारा देवी प्रतिमाओं की स्थापना और गरबा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में युवक-युवतियाँ भाग लेते हैं। कई आयोजनों में दूसरे समाजों के युवाओं की भागीदारी को लेकर आपत्तियाँ दर्ज की जाती रही हैं और अनेक प्रकार के आरोप भी लगाए जाते हैं। यह विवाद हर वर्ष नवरात्रि से पहले सामने आता है और सामाजिक बहस को जन्म देता है।
मुस्लिम युवाओं से जागरूकता की अपील
मुफ्ती नदवी ने अपनी अपील में ज़ोर दिया कि मुस्लिम युवाओं को अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उनका मानना है कि अपनी धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करना हर समाज के लिए ज़रूरी है। यह बयान सोशल मीडिया पर तेज़ी से प्रसारित हो रहा है और इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।