क्या नागा कबीले कभी गुलाम नहीं रहे? 16-पॉइंट एग्रीमेंट और प्रकृति की गोद में नागालैंड की अनकही कहानी
सारांश
Key Takeaways
- नागालैंड की संस्कृति और परंपराएँ अद्वितीय हैं।
- नागा कबीले का इतिहास गुलामी से परे है।
- प्राकृतिक सुंदरता इसे पूर्व का स्विट्जरलैंड बनाती है।
- नागालैंड का स्थापना दिवस हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है।
- यहां की जनजातियाँ एक-दूसरे से भिन्न हैं।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। लोककथाओं की भूमि नागालैंड भारत का एक ऐसा हिस्सा है, जहां विशिष्ट रंग-बिरंगे और पारंपरिक परिधान इसकी संस्कृति को दर्शाते हैं, जबकि प्रकृति इस धरती की अद्वितीय सुंदरता का प्रतीक है।
नागालैंड भारत के जंगलों में जीवन यापन करने वाले कई नागा कबीला समुदायों का निवास स्थान है। प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों ने अनेक नागा कबीलों को अपने साथ ले लिया था। कई नागाओं को फ्रांस और यूरोप भेजा गया। जब ये नागा लौटे, तब इन्होंने नागा नेशनलिस्ट मूवमेंट की स्थापना की। 12वीं और 13वीं शताब्दी में नागा लोगों का संबंध असम के प्रमुख अहोम कबीले से हुआ।
नागा कबीलों का इतिहास ऐसा रहा कि उन पर कभी भी किसी ने अपना शासन नहीं चलाया, चाहे वह असम के अहोम राजवंश हों, जो मानते थे कि उन्होंने नागालैंड पर शासन किया था, या फिर ब्रिटिश, जिन्होंने इस राज्य की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या को ईसाई बनाया। लेकिन ईसाई बनने के बाद भी नागालैंड के निवासियों ने अपनी परंपराओं को नहीं छोड़ा। अंग्रेजों ने नागालैंड के क्षेत्रों पर कब्जा करने में बहुत कठिनाई का सामना किया, बल्कि नरबली जैसी परंपराओं को समाप्त करना और भी कठिन रहा।
19वीं सदी में जब ईस्ट इंडिया कंपनी के पांव पसरे, तब तक नागालैंड पर अहोम राजवंश की सत्ता थी, लेकिन कागज पर उनकी सत्ता थी, असल में नागा स्वतंत्र थे। अहोम राजवंश ने नागाओं की परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। फिर असम भी ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया। 1944 में दूसरे विश्व युद्ध तक यह भूमि नागा हिल्स त्वेनसांग के नाम से जानी जाती थी। 1 दिसंबर, 1963 को नागालैंड को एक पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
बीरेंद्र कुमार भट्टाचार्य का उपन्यास 'यारुइंगम', जो 1950 के दशक में लिखा गया था, नागा आंदोलन पर केंद्रित था। 'यारुइंगम' का अर्थ है जनता का शासन। यह उपन्यास नागाओं, विशेषकर तंगखुल नागाओं पर आधारित है और 1940 और 1950 के दशक के ऐतिहासिक क्षणों को दर्शाता है। लेकिन, यह उपन्यास 'जनता के शासन' की प्रारंभिक उत्तर-औपनिवेशिक असमिया साहित्यिक कल्पना को भी प्रस्तुत करता है।
भारत की आजादी के बाद यह राज्य भी अंग्रेजी शासन से मुक्त हुआ। 1957 तक, जिस क्षेत्र को आज हम नागालैंड कहते हैं, वह असम का एक जिला था, जिसे लोग 'नागा हिल्स' के नाम से जानते थे। अगस्त 1957 में, विभिन्न नागा कबीलों के नेताओं ने Naga Peoples Convention (NPC) का गठन किया और जुलाई 1960 में, पार्टी का एक डेलीगेशन उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिला और भारत संघ के भीतर नागाओं के लिए एक अलग राज्य की मांग की, जिसे 'नागालैंड' कहा जाए। एक 16-पॉइंट एग्रीमेंट हुआ, जिसमें नागालैंड बनाने का प्रावधान था।
4 सितंबर 1962 को नागालैंड बनाने के बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ, स्टेट ऑफ नागालैंड एक्ट, 1962 पास हुआ। नागालैंड आधिकारिक तौर पर 1 दिसंबर, 1963 को भारत के 16वें राज्य के रूप में स्थापित हुआ। तब से, हर साल एक दिसंबर को नागालैंड स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
यह पश्चिम में असम, पूर्व में म्यांमार (बर्मा), उत्तर में अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों और दक्षिण में मणिपुर से घिरा हुआ है। राज्य में 17 प्रशासनिक जिले हैं, जिनमें 17 प्रमुख जनजातियों के साथ-साथ अन्य उप-जनजातियाँ भी निवास करती हैं। प्रत्येक जनजाति अपने रीति-रिवाजों, भाषा और पहनावे के मामले में एक-दूसरे से भिन्न है।
नागालैंड को प्रकृति और इसकी सुंदरता पूर्व का स्विट्जरलैंड बना देती है। हरी-भरी पहाड़ियां, घने जंगल, अद्भुत घाटियां, भरपूर पेड़-पौधे और जंगली जीव, यही सब नागालैंड के बारे में सोचते ही मन में उभरता है।
इस राज्य पर प्रकृति ने इतनी मेहरबानी की है कि यहाँ के मनोरम दृश्य, रंग-बिरंगे सूर्योदय और सूर्यास्त मन मोह लेते हैं। यदि कोई शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर एक शांत स्थान की तलाश में है, तो यह उसके लिए एकदम सही स्थान है। साहसिक और निडर व्यक्तियों के लिए नागालैंड ट्रैकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, और जंगल कैम्पिंग के लिए एक उत्कृष्ट स्थान है। यहाँ के हरे-भरे उपोष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में अन्वेषण की संभावनाएँ अनंत हैं, जो औषधीय पौधों का खजाना भी हैं।