28 जून 2026
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मन की बात के 135वें एपिसोड में PM मोदी बोले — नालंदा ने शास्त्रार्थ की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित किया

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मन की बात के 135वें एपिसोड में PM मोदी बोले — नालंदा ने शास्त्रार्थ की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित किया

सारांश

PM मोदी ने 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में नालंदा विश्वविद्यालय की शास्त्रार्थ परंपरा को आधुनिक शिक्षा के लिए प्रासंगिक बताया और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के AI व डेटा साइंस बीटेक कार्यक्रम को परंपरा और तकनीक के संगम का प्रतीक करार दिया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया।
नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की प्राचीन परंपरा को दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया, जिसकी मोदी ने सराहना की।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली जल्द ही AI और डेटा साइंस में बीटेक प्रोग्राम शुरू करेगा।
मोदी ने 19 जून 2024 को राजगीर, बिहार में नालंदा के नए परिसर का उद्घाटन किया था और इसे भारत के स्वर्ण युग का शुभारंभ बताया था।
AI टूल्स से भारतीय भाषाओं के विकास और प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण को गति मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को रविवार सुबह 11 बजे अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में देश और विदेश में बसे भारतीयों को संबोधित किया। इस संबोधन में उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा शास्त्रार्थ की परंपरा को पुनर्जीवित करने और नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आधुनिक तकनीक की नई पहल का विशेष उल्लेख किया।

शास्त्रार्थ परंपरा का पुनरुद्धार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की भारत की प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है। उनके अनुसार, शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है — यह वाद-संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है, जिसमें तर्क और तथ्य के साथ अपना पक्ष रखना और दूसरों के विचारों को धैर्यपूर्वक सुनना अनिवार्य है। मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय ने इस परंपरा को अपने दीक्षांत समारोह का अभिन्न हिस्सा बनाया है।

नालंदा के उद्घाटन से जुड़ी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 19 जून 2024 को बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर के उद्घाटन अवसर पर भी प्रधानमंत्री ने इस संस्था के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया था। उन्होंने तब कहा था कि नालंदा केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक पहचान और सम्मान है — यह इस सत्य का उद्घोष है कि ज्ञान नष्ट नहीं होता, भले ही पुस्तकें आग में जल जाएं। मोदी ने यह भी कहा था कि नवीन नालंदा की स्थापना भारत के स्वर्ण युग का शुभारंभ करेगी।

प्रधानमंत्री ने उस अवसर पर यह भी कहा था कि नालंदा के प्राचीन अवशेषों के निकट इसका पुनरुद्धार विश्व को भारत की सामर्थ्य से परिचित कराएगा और यह सिद्ध करेगा कि मानवीय मूल्यों से संचालित राष्ट्र इतिहास का कायाकल्प कर एक बेहतर विश्व बना सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा था कि नालंदा में विश्व, एशिया और अनेक देशों की सांस्कृतिक विरासत समाहित है और इसका पुनरुद्धार केवल भारतीय पहलुओं तक सीमित नहीं है।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की नई तकनीकी पहल

मन की बात के इसी एपिसोड में प्रधानमंत्री ने बताया कि नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस में बीटेक प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। उन्होंने इसे आधुनिक तकनीक को भारत के पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

मोदी के अनुसार, इस पहल से भारतीय भाषाओं के लिए नए AI टूल्स विकसित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण के कार्य को भी नई गति मिलेगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में पारंपरिक ज्ञान को तकनीक से जोड़ने की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

आम जनता और शिक्षा जगत पर असर

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, शास्त्रार्थ को दीक्षांत समारोह में शामिल करने से विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन और संवाद कौशल का विकास होगा — जो आधुनिक उच्च शिक्षा में एक आवश्यक तत्व माना जाता है। वहीं, संस्कृत विश्वविद्यालय का AI-केंद्रित बीटेक कार्यक्रम परंपरागत और आधुनिक शिक्षा के बीच की खाई को पाटने का प्रयास है।

आगे की राह

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के AI और डेटा साइंस बीटेक कार्यक्रम के विस्तृत दिशानिर्देश अभी प्रतीक्षित हैं। नालंदा विश्वविद्यालय की शास्त्रार्थ परंपरा को संस्थागत रूप देने की यह पहल भारत की शैक्षणिक विरासत को समकालीन संदर्भ में पुनर्स्थापित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह परंपरा पाठ्यक्रम में कितनी गहराई से समाहित होती है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का AI बीटेक कार्यक्रम एक साहसिक प्रयोग है — परंतु यह तभी सार्थक होगा जब इसमें भाषाई शोध और तकनीकी कौशल का वास्तविक एकीकरण हो, न कि केवल नाम का संयोजन। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली वैश्विक रैंकिंग में पिछड़ रही है और पारंपरिक संस्थानों पर आधुनिकीकरण का दबाव है। नीति की घोषणा और उसके क्रियान्वयन के बीच की खाई ही इन पहलों की वास्तविक सफलता तय करेगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने 28 जून 2026 को 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में नालंदा विश्वविद्यालय की शास्त्रार्थ परंपरा और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के AI बीटेक कार्यक्रम का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने शास्त्रार्थ को वाद-संवाद और मंथन की अनुशासित प्रक्रिया बताया।
नालंदा विश्वविद्यालय में शास्त्रार्थ परंपरा क्या है?
शास्त्रार्थ भारत की प्राचीन बौद्धिक परंपरा है जिसमें तर्क, तथ्य और धैर्यपूर्ण संवाद के माध्यम से विचारों का आदान-प्रदान होता है। नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया है, जिसे PM मोदी ने सराहनीय कदम बताया।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का AI बीटेक प्रोग्राम क्या है?
नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस में बीटेक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक को भारत के पारंपरिक ज्ञान से जोड़ना और भारतीय भाषाओं के लिए नए AI टूल्स विकसित करना है।
नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन कब हुआ था?
नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 19 जून 2024 को बिहार के राजगीर में हुआ था। उस अवसर पर PM मोदी ने कहा था कि नालंदा का पुनरुद्धार भारत के स्वर्ण युग का शुभारंभ है और यह विश्व को भारत की सामर्थ्य से परिचित कराएगा।
इस पहल से भारतीय शिक्षा और संस्कृति पर क्या असर पड़ेगा?
शास्त्रार्थ परंपरा को संस्थागत रूप देने से विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन और संवाद कौशल विकसित होगा। AI बीटेक कार्यक्रम से प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण और भारतीय भाषाओं के लिए तकनीकी विकास संभव होगा।
राष्ट्र प्रेस
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