पीएम मोदी ने विज्ञान शिक्षा में नवाचार की सराहना की, निरंतर अभ्यास से बढ़ती है बुद्धिमत्ता
सारांश
Key Takeaways
- निरंतर अभ्यास से समझदारी में वृद्धि होती है।
- बेंगलुरु में शिक्षा के नवाचारों का महत्व।
- अन्वेषण प्रयोग छात्रों को नवाचार का अवसर देता है।
- नागा समुदाय की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली।
नई दिल्ली, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 132वें एपिसोड में कहा कि एक पुरानी कहावत है 'करत करत अभ्यास के, जड़मत होत सुजान'। इसका अर्थ है कि जब हम निरंतर अभ्यास करते हैं, तो हमारी बुद्धिमत्ता भी बढ़ती जाती है। लोग तब सबसे अच्छे तरीके से सीखते हैं, जब वे सक्रियता से भाग लेते हैं।
उन्होंने बेंगलुरु में शिक्षा के क्षेत्र में एक अनोखे प्रयास के बारे में बताया, जहां एक टीम प्रयोग शिक्षा अनुसंधान संस्थान का संचालन कर रही है। इस टीम का ध्यान रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित है और यह स्कूल के स्तर पर विज्ञान शिक्षा को लोकप्रिय बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने 'अन्वेषण' नामक एक प्रयोग का जिक्र किया, जिसके माध्यम से 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को रसायन विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान और कल्याण जैसे क्षेत्रों में नवाचार करने का अवसर मिलता है। इससे छात्रों को रिसर्च का बेहतरीन अनुभव मिलता है, साथ ही अपने प्रोजेक्ट्स को प्रकाशित करने का मंच भी प्राप्त होता है।
पीएम मोदी ने परीक्षा पर चर्चा के दौरान कुछ छात्रों से बात की, जिन्होंने उन्हें बताया कि वे विज्ञान पढ़ना तो चाहते हैं, लेकिन इससे उन्हें डर भी लगता है। इस दिशा में प्रयोग की टीम का प्रयास बहुत ही सराहनीय है, यह पहल छात्रों को विज्ञान से जुड़ने और कुछ करके दिखाने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जब हम किसी चीज को स्वयं करके देखते हैं, तो जिज्ञासा और रुचि उत्पन्न होती है। हो सकता है कि इनमें से कोई युवा भविष्य में एक महान वैज्ञानिक बन जाए।
उन्होंने नागा समुदाय के प्रयासों का भी उल्लेख किया, जो अतीत को संरक्षित करते हुए भविष्य को तैयार करने में जुटा है। इस समुदाय के लोग अपनी आदिवासी परंपराओं का सम्मान करते हैं और उन्हें आधुनिक रूप में प्रस्तुत करते हैं। नागा समुदाय में मोरूंग लर्निंग की पारंपरिक व्यवस्था थी, जिसमें बुजुर्ग युवा पीढ़ी को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन कौशल सिखाते थे। समय के साथ, यह प्रणाली अब मोरूंग शिक्षा की अवधारणा में परिवर्तित हो गई है, जिससे बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि विकसित की जाती है। इस प्रक्रिया में बुजुर्ग उन्हें कहानियों, लोकगीतों और पारंपरिक खेलों के माध्यम से जीवन कौशल सिखाते हैं। इस प्रकार, नागालैंड अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ा रहा है।