नर्मदा प्रदूषण के खिलाफ ओंकारेश्वर की महिलाओं की अनूठी पहल — आटे के दीपक से बदलेगी तस्वीर
सारांश
Key Takeaways
- मोरटक्का, खंडवा की महिलाओं ने 'मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह' का गठन कर नर्मदा प्रदूषण के खिलाफ अनूठी मुहिम शुरू की।
- समूह ने डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर आटे के दीपक बनाने की मशीन खरीदी और उत्पादन शुरू किया।
- प्लास्टिक के दोनों की जगह आटे के दीपक नदी में घुलते हैं और मछलियों के भोजन का काम करते हैं।
- ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक आनंद शर्मा की देखरेख में महिलाओं को मार्केटिंग और ब्रांडिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- दीपक खेड़ीघाट, मोरटक्का की दुकानों पर उपलब्ध हैं, जिससे श्रद्धालुओं को पर्यावरण अनुकूल विकल्प मिल रहा है।
- यह मॉडल नर्मदा तट के अन्य तीर्थस्थलों पर भी लागू किए जाने की संभावना है।
भोपाल, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नर्मदा नदी प्रदूषण को लेकर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर क्षेत्र की महिलाओं ने एक ऐसी पहल की है, जो पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण — दोनों को एक साथ साधती है। ग्राम मोरटक्का की विजया जोशी के नेतृत्व में गठित 'मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह' ने आटे के दीपक निर्माण का व्यवसाय शुरू किया है, जिससे नदी में प्लास्टिक प्रदूषण घटाने के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार का नया अवसर भी मिला है।
प्लास्टिक दोने से नर्मदा को खतरा — महिलाओं ने पहचानी समस्या
ओंकारेश्वर एक प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थल है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मां नर्मदा में दीपदान करते हैं। अधिकांश श्रद्धालु प्लास्टिक के दोनों में दीपक रखकर नदी में प्रवाहित करते थे, जिससे नदी का जल प्रदूषित होता था और जलीय जीव-जंतुओं के जीवन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता था।
विजया जोशी ने इस समस्या को गहराई से महसूस किया और तय किया कि इसका समाधान स्थानीय स्तर पर ही निकाला जाए। उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं को साथ लेकर पर्यावरण अनुकूल आटे के दीपक बनाने की योजना तैयार की।
स्वयं सहायता समूह का गठन और डेढ़ लाख रुपये का ऋण
मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन की सहायता से 'मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह' का विधिवत गठन किया गया। समूह की महिलाओं ने डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर दीपक निर्माण की मशीन खरीदी और उत्पादन शुरू किया।
यह पहल इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि ग्रामीण महिलाओं ने न केवल पर्यावरणीय समस्या को पहचाना, बल्कि उसका व्यावसायिक समाधान भी खुद ही निकाला — बिना किसी बाहरी विशेषज्ञ की प्रतीक्षा किए।
मिशन का मार्गदर्शन और बाजार में उपलब्धता
ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक आनंद शर्मा ने बताया कि मिशन की ओर से समूह की महिलाओं को पैकेजिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग के क्षेत्र में आवश्यक प्रशिक्षण और सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता और बिक्री दोनों में सुधार हुआ है।
समूह द्वारा तैयार किए गए आटे के दीपक अब मोरटक्का के खेड़ीघाट स्थित फूलमाला एवं किराना दुकानों पर उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं। इससे ओंकारेश्वर और मोरटक्का क्षेत्र में दीपदान करने वाले श्रद्धालुओं को एक पर्यावरण-हितैषी विकल्प सहजता से मिल रहा है।
दोहरा लाभ — पर्यावरण और आस्था दोनों साधे
समूह की अध्यक्ष विजया जोशी के अनुसार इस पहल से दो महत्वपूर्ण लाभ सामने आए हैं। पहला, प्लास्टिक दोनों से उत्पन्न होने वाला नदी प्रदूषण उल्लेखनीय रूप से घटा है। दूसरा, दीपक में उपयोग किया गया आटा नदी में मछलियों के भोजन के रूप में काम आता है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी लाभ मिलता है।
विजया जोशी ने यह भी बताया कि शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार आटे के दीपक से दीपदान करना अधिक शुभ माना जाता है और इससे श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की परंपरागत आस्था भी जुड़ी हुई है। इस प्रकार यह पहल धर्म और विज्ञान — दोनों दृष्टियों से अर्थपूर्ण है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य — नर्मदा संरक्षण की चुनौती
गौरतलब है कि नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाती है और राज्य की करोड़ों की आबादी के लिए पेयजल, सिंचाई और आजीविका का प्रमुख स्रोत है। बावजूद इसके, औद्योगिक अपशिष्ट, धार्मिक कचरा और अनियोजित शहरीकरण के कारण नदी की स्वच्छता लगातार खतरे में है।
केंद्र और राज्य सरकारें नमामि देवि नर्मदे जैसी योजनाओं के जरिए नदी संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बिना ये प्रयास अधूरे रहते हैं। मोरटक्का की महिलाओं की यह पहल इसी सामुदायिक भागीदारी का एक प्रेरक उदाहरण है।
आने वाले समय में यदि इस मॉडल को नर्मदा तट के अन्य घाटों और तीर्थस्थलों पर भी लागू किया जाए, तो नदी प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। ग्रामीण आजीविका मिशन इस दिशा में इस सफल प्रयोग को अन्य जिलों में भी विस्तारित करने की योजना बना रहा है।