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एनडीएमसी अध्यक्ष केशव चंद्र ने सांगली अपार्टमेंट्स को दिया 'अनुपम कॉलोनी' का दर्जा, जीरो-वेस्ट मॉडल की मिली मान्यता

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एनडीएमसी अध्यक्ष केशव चंद्र ने सांगली अपार्टमेंट्स को दिया 'अनुपम कॉलोनी' का दर्जा, जीरो-वेस्ट मॉडल की मिली मान्यता

सारांश

नई दिल्ली में एनडीएमसी का 'अनुपम कॉलोनी' मॉडल विस्तार पा रहा है — सांगली अपार्टमेंट्स ने 100% कचरा पृथक्करण हासिल कर यह दर्जा अर्जित किया। कंपोस्टिंग, वेंडिंग मशीन और दान केंद्रों से लैस यह 'वेस्ट टू वेल्थ' प्रयोग राजधानी के अन्य समुदायों के लिए एक व्यावहारिक खाका पेश करता है।

मुख्य बातें

एनडीएमसी अध्यक्ष केशव चंद्र ने 22 जून 2026 को कोपरनिकस मार्ग स्थित सांगली अपार्टमेंट्स को 'अनुपम कॉलोनी' घोषित किया।
सांगली अपार्टमेंट्स ने लगभग 100 प्रतिशत कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित किया है।
एनडीएमसी इससे पहले जोर बाग, न्यू मोटी बाग, भारती नगर, बापू धाम सहित कई कॉलोनियों को यह दर्जा दे चुका है।
कॉलोनियों में ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर , प्लास्टिक वेंडिंग मशीन और दान केंद्र स्थापित किए गए हैं।
सूखे पत्तों से पर्यावरण अनुकूल ब्रिकेट्स बनाकर 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) के अध्यक्ष केशव चंद्र ने 22 जून 2026 को कोपरनिकस मार्ग स्थित सांगली अपार्टमेंट्स को आधिकारिक रूप से 'अनुपम कॉलोनी' घोषित किया और एक पट्टिका का अनावरण किया। यह प्रमाणन उन आवासीय समुदायों को प्रदान किया जाता है जो कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और जीरो-वेस्ट जीवनशैली के उच्चतम मानकों को पूरा करते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

एनडीएमसी के आधिकारिक बयान के अनुसार, सांगली अपार्टमेंट्स ने लगभग 100 प्रतिशत कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित किया है। परिसर के प्रत्येक घर ने जिम्मेदार कचरा प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी निभाई है, जो इस उपलब्धि को और भी उल्लेखनीय बनाती है।

केशव चंद्र ने कार्यक्रम में कहा, 'सबसे महत्वपूर्ण बात यहाँ के निवासियों का उत्साह, ऊर्जा और भागीदारी है। आप देख सकते हैं कि एयर कमोडोर स्वयं यहाँ मौजूद हैं और हर स्तर पर लोगों की भागीदारी बहुत सक्रिय रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि इसी सामूहिक भागीदारी के कारण यह उपलब्धि इतने कम समय में हासिल हो सकी।

'अनुपम कॉलोनी' प्रमाणन क्या है

'अनुपम कॉलोनी' एनडीएमसी का एक विशेष प्रमाणन टैग है, जो उन कॉलोनियों को दिया जाता है जो जीरो-वेस्ट और आत्मनिर्भर जीवनशैली के उच्च मानकों को अपनाती हैं। यह पहल नई दिल्ली को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

गौरतलब है कि इससे पहले एनडीएमसी जोर बाग, न्यू मोटी बाग, डी-1, डी-2, सत्या सदन ऑफिसर्स फ्लैट्स, भारती नगर, अराधना (बर्मा शेल कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी) और बापू धाम जैसी कई कॉलोनियों को भी यह दर्जा प्रदान कर चुका है।

वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल की विशेषताएँ

केशव चंद्र के अनुसार, 'अनुपम कॉलोनियों' में नागरिक भागीदारी बढ़ाने के लिए कई अभिनव प्रयास किए गए हैं। इनमें ऐसे केंद्र स्थापित किए गए हैं जहाँ निवासी कपड़े, किताबें और घरेलू सामान दान कर सकते हैं।

प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं, जिनमें प्लास्टिक बोतलें वापस करने पर प्रोत्साहन राशि मिलती है। घरों से निकलने वाले गीले कचरे को ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर के माध्यम से कंपोस्ट में बदला जाता है, जिसका उपयोग पार्कों और हरित क्षेत्रों के रखरखाव में होता है।

इसके अतिरिक्त, सूखे पत्तों और बागवानी कचरे से पर्यावरण अनुकूल ब्रिकेट्स तैयार किए जाते हैं — जो 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल को व्यावहारिक रूप देते हैं।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह पहल नई दिल्ली के अन्य आवासीय समुदायों के लिए एक प्रेरणा-मॉडल के रूप में उभर रही है। एनडीएमसी का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक कॉलोनियाँ इस मानक को अपनाएँ और राजधानी में कचरा प्रबंधन की स्थिति में समग्र सुधार आए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के शहर ठोस कचरा प्रबंधन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, और सामुदायिक स्तर पर इस तरह की पहलें नीति-निर्माताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके पैमाने और निरंतरता में है — अब तक यह दर्जा मुख्यतः एनडीएमसी के अपेक्षाकृत संपन्न और संगठित क्षेत्रों तक सीमित रहा है। यह सवाल उठता है कि क्या यह मॉडल दिल्ली के उन घनी आबादी वाले इलाकों में भी उतनी ही सफलता से लागू हो सकता है जहाँ बुनियादी ढाँचा और जागरूकता दोनों की कमी है। वेंडिंग मशीन और ऑर्गेनिक कन्वर्टर जैसी तकनीकें तभी टिकाऊ हैं जब रखरखाव और सामुदायिक स्वामित्व सुनिश्चित हो। बिना व्यापक मापन ढाँचे और सार्वजनिक जवाबदेही के, यह पहल एक सराहनीय प्रयोग तो है, पर शहर-व्यापी बदलाव से अभी दूर है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'अनुपम कॉलोनी' का दर्जा क्या है और यह किसे मिलता है?
'अनुपम कॉलोनी' एनडीएमसी द्वारा दिया जाने वाला एक प्रमाणन टैग है, जो उन आवासीय कॉलोनियों को प्रदान किया जाता है जो जीरो-वेस्ट और आत्मनिर्भर जीवनशैली के उच्च मानकों को पूरा करती हैं। इसमें कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, कंपोस्टिंग और पर्यावरण संरक्षण जैसे मानदंड शामिल हैं।
सांगली अपार्टमेंट्स को यह दर्जा क्यों मिला?
सांगली अपार्टमेंट्स ने लगभग 100 प्रतिशत कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण हासिल किया है और परिसर के हर घर ने जिम्मेदार कचरा प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी निभाई है। एनडीएमसी अध्यक्ष केशव चंद्र ने निवासियों की सामूहिक भागीदारी को इस उपलब्धि का मुख्य कारण बताया।
इससे पहले किन कॉलोनियों को 'अनुपम कॉलोनी' का दर्जा मिल चुका है?
एनडीएमसी इससे पहले जोर बाग, न्यू मोटी बाग, डी-1, डी-2, सत्या सदन ऑफिसर्स फ्लैट्स, भारती नगर, अराधना (बर्मा शेल कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी) और बापू धाम को यह दर्जा दे चुका है।
'अनुपम कॉलोनियों' में कचरा प्रबंधन कैसे होता है?
इन कॉलोनियों में गीले कचरे से ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर के जरिए कंपोस्ट बनाया जाता है, सूखे पत्तों से पर्यावरण अनुकूल ब्रिकेट्स तैयार होते हैं, और प्लास्टिक बोतलें वापस करने पर वेंडिंग मशीन से प्रोत्साहन मिलता है। इसके अलावा कपड़े, किताबें और घरेलू सामान दान करने के लिए विशेष केंद्र भी बनाए गए हैं।
यह पहल नई दिल्ली के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पहल सामुदायिक स्तर पर कचरा प्रबंधन का एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करती है, जो नई दिल्ली को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। यह अन्य आवासीय समुदायों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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