16 अक्टूबर 2026
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नेहा बोरा में बेगम हजरत महल और रानी लक्ष्मीबाई की वीरता: सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

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नेहा बोरा में बेगम हजरत महल और रानी लक्ष्मीबाई की वीरता: सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

सारांश

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने नेहा बोरा को बेगम हजरत महल और रानी लक्ष्मीबाई की विरासत का प्रतीक बताया। साथ ही उन्होंने योगी आदित्यनाथ के परिवारवाद बयान पर पलटवार किया और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की आलोचना की।

मुख्य बातें

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 15 अक्टूबर 2026 को नेहा बोरा की तुलना बेगम हजरत महल और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से की।
नदवी ने कहा कि JNU से जुड़ी नेहा बोरा में भारतीय महिलाओं के संघर्ष और साहस की ऐतिहासिक झलक दिखती है।
CM योगी आदित्यनाथ के परिवारवाद बयान पर नदवी ने कहा — 'जिनके बच्चे नहीं हैं, वे बच्चों के दर्द को नहीं समझ सकते।' नदवी ने BJP सरकार से पूछा कि सत्ता में आने के बाद कितने स्कूल बंद हुए और कितने मेडिकल कॉलेज बने।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर नदवी ने इसे वंचितों की आवाज़ दबाने की कोशिश बताया; स्वाति सिंह द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में नेहा बोरा के बयान की सराहना करते हुए उनकी तुलना भारत की दो महान वीरांगनाओं — बेगम हजरत महल और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई — से की। नदवी के अनुसार, नेहा बोरा के व्यक्तित्व में भारतीय महिलाओं के संघर्ष, साहस और सांस्कृतिक गौरव की स्पष्ट झलक दिखती है।

नेहा बोरा की तुलना ऐतिहासिक वीरांगनाओं से

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि दिल्ली और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़ी नेहा बोरा की छवि उन्हें भारतीय इतिहास की उन वीर नायिकाओं की याद दिलाती है जिन्होंने अन्याय और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया था। उन्होंने कहा, 'जिस तरह देश के पुरुष मैदान में लड़ सकते हैं, उसी तरह देश की बेटियाँ भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस रखती हैं।'

नदवी ने यह भी कहा कि आज भी कुछ लोग अंग्रेजों द्वारा बनाए गए रास्ते पर चल रहे हैं और उनके विरुद्ध संघर्ष जारी रखना ज़रूरी है। उनके अनुसार, नेहा बोरा ने भारतीय महिलाओं के ऐतिहासिक संघर्ष को एक बार फिर से जनमानस में जीवंत कर दिया है।

योगी आदित्यनाथ के परिवारवाद बयान पर पलटवार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवारवाद संबंधी बयान पर नदवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि परिवार व्यक्ति को मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की गहरी समझ देता है। नदवी ने धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि जो लोग परिवार के साथ जीते हैं, वे जीवन के कई मानवीय पहलुओं को बेहतर समझते हैं।

उन्होंने कहा, 'जिनके बच्चे नहीं हैं, वे बच्चों के दर्द को नहीं समझ सकते।' यह टिप्पणी योगी सरकार पर सीधे निशाने के रूप में देखी जा रही है, हालाँकि नदवी ने किसी का नाम लिए बिना यह बात कही।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार से सवाल

सपा सांसद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार से शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में जवाबदेही माँगी। उन्होंने सीधे पूछा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद कितने स्कूल बंद हुए, कितने नए मेडिकल कॉलेज खुले और कितने बीमार लोगों को वास्तव में इलाज मिला। नदवी के अनुसार, ये सवाल आम जनता के जीवन से सीधे जुड़े हैं और सरकार को इनका उत्तर देना चाहिए।

जंतर-मंतर विवाद पर नदवी का रुख

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने और स्वाति सिंह द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल किए जाने के संदर्भ में नदवी ने कहा कि जंतर-मंतर, इंडिया गेट और सेंट्रल दिल्ली जैसे स्थान गरीबों, मजलूमों और वंचितों की आवाज़ उठाने के प्रमुख माध्यम रहे हैं। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने समय में राजा-महाराजाओं तक फरियाद पहुँचाने के लिए विशेष माध्यम हुआ करते थे — और ये सार्वजनिक स्थल उसी भूमिका का आधुनिक स्वरूप हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल सरकार पर सार्वजनिक प्रदर्शन के अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगा रहे हैं। गौरतलब है कि जंतर-मंतर वर्षों से किसानों, मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

योगी आदित्यनाथ को परिवार-विरोधी चेहरे के रूप में प्रस्तुत करना, और जंतर-मंतर प्रकरण को लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन की कड़ी बताना। जो बात मुख्यधारा की कवरेज छोड़ देती है वह यह है कि नेहा बोरा कौन हैं और उनका वह बयान क्या था जिसने यह पूरी प्रतिक्रिया उत्पन्न की — बिना उस संदर्भ के, नदवी की तुलना अधूरी लगती है। जंतर-मंतर का मुद्दा वास्तव में व्यापक है: विपक्ष के लिए यह सार्वजनिक विरोध के अधिकार का सवाल है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में याचिका से यह स्पष्ट है कि यह विवाद अदालत तक पहुँच चुका है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने नेहा बोरा की किससे तुलना की?
नदवी ने नेहा बोरा की तुलना बेगम हजरत महल और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से की। उनके अनुसार, JNU से जुड़ी नेहा बोरा में भारतीय महिलाओं के ऐतिहासिक संघर्ष और साहस की झलक दिखती है।
नदवी ने योगी आदित्यनाथ के परिवारवाद बयान पर क्या कहा?
नदवी ने कहा कि परिवार व्यक्ति को मानवीय संवेदनाओं की गहरी समझ देता है और 'जिनके बच्चे नहीं हैं, वे बच्चों के दर्द को नहीं समझ सकते।' यह टिप्पणी CM योगी के परिवारवाद पर दिए गए बयान का जवाब थी।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर नदवी का क्या रुख है?
नदवी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जंतर-मंतर, इंडिया गेट और सेंट्रल दिल्ली जैसे स्थान गरीबों और वंचितों की आवाज़ उठाने के माध्यम हैं। इस मुद्दे पर स्वाति सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दाखिल की है।
नदवी ने सरकार से शिक्षा और स्वास्थ्य पर क्या सवाल पूछे?
उन्होंने BJP सरकार से पूछा कि उसके कार्यकाल में कितने स्कूल बंद हुए, कितने नए मेडिकल कॉलेज बने और कितने बीमार लोगों को वास्तव में इलाज मिला। यह सवाल उन्होंने सरकार की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से उठाए।
नेहा बोरा और JNU का इस बयान से क्या संबंध है?
नदवी के अनुसार, दिल्ली और JNU से जुड़ी नेहा बोरा की छवि में उन्हें बेगम हजरत महल और रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं की परछाईं नज़र आती है। उन्होंने कहा कि नेहा बोरा ने अपने बयान से भारतीय महिलाओं के संघर्ष के इतिहास को एक बार फिर जीवंत किया है।
राष्ट्र प्रेस
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