भागवत का बयान सनातन प्रतिबद्धता का प्रतीक, राजनीतिक मजबूरी नहीं: मुख्तार अब्बास नकवी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने 31 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक दबाव का नतीजा नहीं, बल्कि सनातन मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है। नकवी ने यह भी कहा कि उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया सर्वोच्च राजकीय सम्मान समूचे भारत का सम्मान है।
भागवत के बयान पर नकवी का पक्ष
नकवी ने कहा, 'जब किसी बयान के पीछे राजनीतिक हित नहीं बल्कि सनातनी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता हो, तो ऐसी बातें देश के भीतर और बाहर लगातार सुनने को मिलेंगी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भागवत 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः', 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'विविधता में एकता' जैसे सनातन विचारों की बात करते हैं, तो किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि नागरिकों की अपने निवास-देश के प्रति प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देने की बात एक स्वाभाविक और सकारात्मक संदेश है।
ग्रेटर टोरंटो में भागवत का संबोधन
गौरतलब है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में ग्रेटर टोरंटो में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया, जिसमें 2,000 से अधिक हिंदू और समुदाय के सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर भागवत ने भारतीय मूल के प्रवासियों से अपील की कि वे जिस देश में रहते हैं, वहाँ के ईमानदार और जिम्मेदार नागरिक बनें तथा भारत के एकता, सेवा और मानवता के संदेश को विश्व तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोगों की जिम्मेदारी केवल अपने निवास-देश तक सीमित नहीं, बल्कि समूची मानवता के प्रति भी है।
RSS पर दुष्प्रचार और संगठन की पहचान
नकवी ने RSS और भारत के विरुद्ध दशकों से चले आ रहे कथित पूर्वाग्रहपूर्ण दुष्प्रचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस सबके बावजूद RSS की पहचान और प्रासंगिकता इसलिए बनी रही, क्योंकि संगठन निरंतर राष्ट्र-निर्माण और मानवता को संस्कारित करने की दिशा में सक्रिय रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
मोदी को उज़्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान
उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए सर्वोच्च राजकीय सम्मान पर नकवी ने कहा कि यह केवल प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और पूरे देश का सम्मान है। उन्होंने आगाह किया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश उचित नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है।
आगे क्या
नकवी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भागवत के टोरंटो संबोधन और मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर चर्चा तेज होने की संभावना है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी है, जबकि BJP ने इसे भारत की सॉफ्ट पावर की जीत के रूप में रेखांकित किया है।