31 अगस्त 2026
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भागवत का बयान सनातन प्रतिबद्धता का प्रतीक, राजनीतिक मजबूरी नहीं: मुख्तार अब्बास नकवी

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भागवत का बयान सनातन प्रतिबद्धता का प्रतीक, राजनीतिक मजबूरी नहीं: मुख्तार अब्बास नकवी

सारांश

BJP नेता नकवी ने RSS प्रमुख भागवत के टोरंटो भाषण को सनातन प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया — न कि राजनीतिक मजबूरी। साथ ही उज़्बेकिस्तान द्वारा PM मोदी को मिले सर्वोच्च सम्मान को 140 करोड़ भारतीयों का गौरव करार दिया।

मुख्य बातें

मुख्तार अब्बास नकवी ने 31 अगस्त को मोहन भागवत के बयान को सनातन मूल्यों की प्रतिबद्धता बताया, राजनीतिक मजबूरी नहीं।
भागवत ने ग्रेटर टोरंटो में 2,000 से अधिक हिंदू समुदाय के सदस्यों को संबोधित किया और प्रवासी भारतीयों से जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की।
भागवत ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' जैसे सनातन संदेशों पर जोर दिया।
नकवी ने उज़्बेकिस्तान द्वारा PM मोदी को दिए गए सर्वोच्च सम्मान को 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताया।
नकवी ने इस सम्मान को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश को अनुचित ठहराया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने 31 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक दबाव का नतीजा नहीं, बल्कि सनातन मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है। नकवी ने यह भी कहा कि उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया सर्वोच्च राजकीय सम्मान समूचे भारत का सम्मान है।

भागवत के बयान पर नकवी का पक्ष

नकवी ने कहा, 'जब किसी बयान के पीछे राजनीतिक हित नहीं बल्कि सनातनी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता हो, तो ऐसी बातें देश के भीतर और बाहर लगातार सुनने को मिलेंगी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भागवत 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः', 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'विविधता में एकता' जैसे सनातन विचारों की बात करते हैं, तो किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि नागरिकों की अपने निवास-देश के प्रति प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देने की बात एक स्वाभाविक और सकारात्मक संदेश है।

ग्रेटर टोरंटो में भागवत का संबोधन

गौरतलब है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में ग्रेटर टोरंटो में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया, जिसमें 2,000 से अधिक हिंदू और समुदाय के सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर भागवत ने भारतीय मूल के प्रवासियों से अपील की कि वे जिस देश में रहते हैं, वहाँ के ईमानदार और जिम्मेदार नागरिक बनें तथा भारत के एकता, सेवा और मानवता के संदेश को विश्व तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोगों की जिम्मेदारी केवल अपने निवास-देश तक सीमित नहीं, बल्कि समूची मानवता के प्रति भी है।

RSS पर दुष्प्रचार और संगठन की पहचान

नकवी ने RSS और भारत के विरुद्ध दशकों से चले आ रहे कथित पूर्वाग्रहपूर्ण दुष्प्रचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस सबके बावजूद RSS की पहचान और प्रासंगिकता इसलिए बनी रही, क्योंकि संगठन निरंतर राष्ट्र-निर्माण और मानवता को संस्कारित करने की दिशा में सक्रिय रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

मोदी को उज़्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए सर्वोच्च राजकीय सम्मान पर नकवी ने कहा कि यह केवल प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और पूरे देश का सम्मान है। उन्होंने आगाह किया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश उचित नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है।

आगे क्या

नकवी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भागवत के टोरंटो संबोधन और मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर चर्चा तेज होने की संभावना है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी है, जबकि BJP ने इसे भारत की सॉफ्ट पावर की जीत के रूप में रेखांकित किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि क्या RSS के वैश्विक दौरे और उनके बयानों की टाइमिंग महज संयोग है या घरेलू राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच एक सुनियोजित सॉफ्ट-पावर अभियान। मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर राष्ट्रीय एकजुटता की अपील वाजिब है, लेकिन जब तक विपक्ष की आलोचना को 'देशविरोधी' करार दिया जाता रहेगा, तब तक यह बहस अधूरी रहेगी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने ग्रेटर टोरंटो में क्या कहा?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने ग्रेटर टोरंटो में 2,000 से अधिक हिंदू समुदाय के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय मूल के प्रवासियों की जिम्मेदारी केवल अपने निवास-देश तक सीमित नहीं, बल्कि समूची मानवता के प्रति भी है। उन्होंने प्रवासियों से आग्रह किया कि वे जहाँ रहें, वहाँ के ईमानदार नागरिक बनें और भारत के एकता व सेवा के संदेश को विश्व तक पहुँचाएँ।
नकवी ने भागवत के बयान को राजनीतिक मजबूरी क्यों नहीं माना?
BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि भागवत का बयान 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' जैसे सनातन मूल्यों पर आधारित है, न कि किसी राजनीतिक हित पर। उनके अनुसार जब किसी बयान के पीछे सनातनी प्रतिबद्धता हो, तो वह देश-विदेश में स्वाभाविक रूप से सराहा जाता है।
उज़्बेकिस्तान ने PM मोदी को कौन-सा सम्मान दिया?
उज़्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च राजकीय सम्मान प्रदान किया। नकवी ने इसे केवल PM मोदी का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और पूरे देश का सम्मान बताया।
नकवी ने RSS पर दुष्प्रचार के बारे में क्या कहा?
नकवी ने कहा कि RSS और भारत के विरुद्ध दशकों से कथित पूर्वाग्रहपूर्ण दुष्प्रचार होता रहा है, फिर भी संगठन की पहचान बनी रही क्योंकि वह निरंतर राष्ट्र-निर्माण और मानवता को संस्कारित करने में लगा रहा। उन्होंने भारत को एक धर्मनिरपेक्ष और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में रेखांकित किया।
मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर राजनीतिक विवाद क्यों उचित नहीं: नकवी?
नकवी के अनुसार PM मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है, क्योंकि यह भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने के बजाय देश के सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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