नकवी का विपक्ष पर तीखा प्रहार: 'हंगामे की जगह संसद में चर्चा करें, वरना जनता कहेगी बाय-बाय'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने 3 अगस्त को नई दिल्ली में विपक्षी सांसदों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि संसद के मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर हंगामा करने की बजाय विपक्ष को बहस और चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उनका यह बयान उस समय आया जब मानसून सत्र में विपक्षी दलों के लगातार व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है।
नकवी की विपक्ष को दो-टूक चेतावनी
नकवी ने कहा कि 'हिट एंड रन की राजनीति' करने वाले इन 'हुड़दंगियों और नौसिखियों' को अपनी इस सनक से बाहर निकलना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'संसद में हाय-हाय और विरोध के नारे लगाने से कुछ हासिल नहीं होगा — अगर यही रवैया रहा तो सड़क पर जनता उन्हें बाय-बाय कह देगी।' नकवी ने यह भी जोड़ा कि जनता ने सांसदों को चर्चा और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने के लिए चुना है, न कि सदन को बाधित करने के लिए।
मोदी की तारीफ और कांग्रेस पर पलटवार
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के 'सीता कौन थी' वाले बयान पर नकवी ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया में मोदी जैसे नेता बहुत कम हैं। नकवी के अनुसार, पिछले 12-13 वर्षों में मोदी को लगातार राजनीतिक विरोध, असहिष्णुता और व्यक्तिगत हमलों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे कभी नहीं रुके। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भी मोदी ने सिर्फ विकास के लिए निरंतर काम किया।
पेपर लीक और विपक्ष की चुनिंदा राजनीति पर निशाना
पेपर लीक मामलों पर नकवी ने कहा कि ऐसी घटनाएँ कहीं भी हों, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल केवल उन्हीं राज्यों में विरोध करते हैं जहाँ BJP की सरकार होती है, जबकि जिन राज्यों में उनकी अपनी सरकारें हैं, वहाँ ऐसे मामलों पर चुप्पी साध लेते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह दोहरा मानदंड विपक्षी राजनीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
यूसीसी पर नकवी का समर्थन
लेखिका तस्लीमा नसरीन के समान नागरिक संहिता (UCC) समर्थक बयान पर नकवी ने कहा कि यूसीसी लागू होना चाहिए। उन्होंने बताया कि BJP और NDA सरकारों ने इस दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं और कई राज्यों में इसे लागू भी किया जा चुका है। नकवी के अनुसार, आगे भी संविधान के अनुरूप इस दिशा में कार्य जारी रहेगा।
आगे क्या
मानसून सत्र में व्यवधान का यह सिलसिला संसदीय कार्यवाही की उत्पादकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना चाहती है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस टकराव का असर सत्र के शेष दिनों की कार्यवाही पर पड़ना तय माना जा रहा है।