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न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक: ₹122 करोड़ गबन में ईडी ने 8 आरोपियों के खिलाफ PMLA कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की

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न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक: ₹122 करोड़ गबन में ईडी ने 8 आरोपियों के खिलाफ PMLA कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की

सारांश

मुंबई के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में ₹122 करोड़ के कथित गबन पर ईडी ने PMLA कोर्ट में 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। पूर्व जीएम ने फर्जी रिकॉर्ड से कोष हड़पा, एक आरोपी विदेश भागा। ₹16.95 करोड़ की 33 संपत्तियाँ जब्त — सहकारी बैंकिंग की कमज़ोर निगरानी फिर कटघरे में।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक (NICBL) में ₹122 करोड़ के कथित गबन पर मुंबई PMLA कोर्ट में 8 आरोपियों के विरुद्ध प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की।
पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद्र मेहता ने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर कर फर्जी रिकॉर्ड बनाए; पूछताछ में लंबे समय तक कोष निकालना स्वीकार किया।
बैंक के पूर्व चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन को संबंधित अवधि में कथित तौर पर ₹26 से ₹30 करोड़ ट्रांसफर किए गए।
आरोपी हिरेन भानु ने विदेशी कंपनियाँ अधिग्रहीत कर भारतीय उधारकर्ताओं के ज़रिए धन प्राप्त किया; फिलहाल भारत से बाहर , गैर-जमानती वारंट जारी।
ईडी ने PMLA के तहत ₹16.95 करोड़ मूल्य की 33 संपत्तियाँ जब्त कीं; एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने जब्ती की पुष्टि की।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (NICBL) में ₹122 करोड़ के कथित फंड गबन मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद्र मेहता सहित 8 लोगों के विरुद्ध मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। अदालत ने सभी आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी, जो बैंक के कोष से लगभग ₹122 करोड़ की कथित हेराफेरी से संबंधित थी। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला वित्तीय अपराध की दृष्टि से अत्यंत गंभीर है, क्योंकि इसमें बैंकिंग तंत्र को व्यवस्थित तरीके से कमज़ोर किया गया।

मुख्य आरोपी की भूमिका

जांच में सामने आया कि बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर एवं अकाउंट्स हेड हितेश प्रवीणचंद्र मेहता ने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर कर तथा बैंक की विभिन्न शाखाओं के बीच नकद हस्तांतरण के फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर बैंक के धन को हड़पने में केंद्रीय भूमिका निभाई। ईडी के अनुसार, पूछताछ के दौरान मेहता ने लंबे समय तक कोष निकालने की बात स्वीकार की है।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि यह गतिविधियाँ बैंक के पूर्व चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के निर्देश पर संचालित की गई थीं, जिन्होंने वर्षों तक सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के माध्यम से बैंक के संचालन पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नियंत्रण बनाए रखा।

अपराध की कमाई का वितरण

ईडी के अनुसार, इस कथित गबन से प्राप्त धनराशि को मुख्य आरोपियों सहित कई व्यक्तियों और संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया। बैंक के पूर्व एवं कार्यकारी चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन को संबंधित अवधि के दौरान कथित तौर पर लगभग ₹26 से ₹30 करोड़ की राशि हस्तांतरित की गई।

एक अन्य आरोपी हिरेन भानु ने कथित तौर पर बैंक के कुछ उधारकर्ताओं के साथ मिलकर बिना कोई बिक्री मूल्य चुकाए भारत के बाहर एक कंपनी और व्यावसायिक इकाई हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने उन्हीं भारतीय उधारकर्ताओं के माध्यम से इन विदेशी कंपनियों के खातों में धन प्राप्त किया, जिन्हें NICBL ने बड़े पैमाने पर ऋण स्वीकृत किए थे — जो मनी लॉन्ड्रिंग के एक जटिल अंतरराष्ट्रीय स्वरूप की ओर संकेत करता है।

संपत्तियों की जब्ती और न्यायिक पुष्टि

इससे पूर्व ईडी ने PMLA, 2002 के तहत आरोपियों और संदिग्धों से जुड़ी ₹16.95 करोड़ मूल्य की 33 चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। इनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, फ्लैट, कमर्शियल ऑफिस और कृषि भूमि शामिल हैं। PMLA के एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इस जब्ती को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।

भगोड़े आरोपी के खिलाफ कार्रवाई

मुंबई की EOW इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। आरोपी हिरेन भानु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट तथा उद्घोषणा की कार्यवाही भी आरंभ की गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, भानु फिलहाल भारत से बाहर है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सहकारी बैंकों की वित्तीय निगरानी और शासन व्यवस्था को लेकर नियामकीय सवाल पहले से उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में मामले की अगली सुनवाई और आरोपियों की पेशी पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग के तत्व भी हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) सहकारी बैंकों पर निगरानी कड़ी करने की दिशा में कदम उठा रहा है, फिर भी यह मामला लंबे समय तक अनदेखा रहा। असली सवाल यह है कि नियामकीय निगरानी के इतने बड़े छेद को भरने के लिए क्या ठोस संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला क्या है?
यह मुंबई स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (NICBL) में ₹122 करोड़ के कथित फंड गबन का मामला है, जिसमें बैंक के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों पर अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर कर और फर्जी रिकॉर्ड बनाकर कोष हड़पने का आरोप है। ईडी ने इस मामले में 8 लोगों के खिलाफ PMLA कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
ईडी ने इस मामले में किसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है?
ईडी ने बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद्र मेहता और 7 अन्य लोगों के खिलाफ मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। आरोपियों में बैंक के पूर्व चेयरमैन, वाइस-चेयरमैन और हिरेन भानु भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इस मामले में कितनी संपत्तियाँ जब्त की गई हैं?
ईडी ने PMLA, 2002 के तहत ₹16.95 करोड़ मूल्य की 33 चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं, जिनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, फ्लैट, कमर्शियल ऑफिस और कृषि भूमि शामिल हैं। PMLA के एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इस जब्ती की पुष्टि कर दी है।
आरोपी हिरेन भानु की इस मामले में क्या भूमिका है?
हिरेन भानु पर आरोप है कि उन्होंने बैंक के उधारकर्ताओं के साथ मिलकर बिना कोई मूल्य चुकाए विदेश में कंपनियाँ हासिल कीं और उन भारतीय उधारकर्ताओं के ज़रिए इन विदेशी खातों में धन प्राप्त किया जिन्हें NICBL ने ऋण दिए थे। भानु फिलहाल भारत से बाहर है और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट तथा उद्घोषणा की कार्यवाही शुरू की गई है।
इस मामले की जांच कहाँ तक पहुँची है और आगे क्या होगा?
मुंबई की EOW पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और अब ईडी ने PMLA कोर्ट में भी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। अदालत ने आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने का आदेश दिया है; आने वाले दिनों में आरोपियों की पेशी और मामले की अगली सुनवाई निर्णायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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