एनआईसीबीएल बैंक घोटाला: ईडी ने पूर्व जीएम हितेश मेहता समेत 8 के खिलाफ ₹122 करोड़ की चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (एनआईसीबीएल) में ₹122 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड मामले में बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद्र मेहता और सात अन्य आरोपियों के खिलाफ 14 अक्टूबर 2026 को एक स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी करने का आदेश दे दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जिसमें बैंक से लगभग ₹122 करोड़ के गबन का आरोप लगाया गया था। चार्जशीट 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के तहत दाखिल की गई है। गौरतलब है कि ईओडब्ल्यू ने भी इस मामले में अलग से चार्जशीट दायर की है।
मुख्य आरोप और घोटाले का तरीका
ईडी के अनुसार, बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर एवं अकाउंट्स हेड हितेश प्रवीणचंद्र मेहता ने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर कर बैंक शाखाओं के बीच कैश ट्रांसफर के झूठे रिकॉर्ड बनाए और इस प्रकार फंड निकाला। जांच में यह भी सामने आया कि ये गतिविधियाँ एक अन्य आरोपी के निर्देश पर की गई थीं, जो बैंक का पूर्व चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन रहा तथा कई वर्षों तक प्रत्यक्ष या अपने सहयोगियों एवं परिवार के सदस्यों के माध्यम से बैंक के कामकाज को नियंत्रित करता था।
ईडी का आरोप है कि अपराध से प्राप्त धनराशि कई लोगों और संस्थाओं को स्थानांतरित की गई। बैंक के पूर्व/कार्यवाहक चेयरमैन एवं वाइस-चेयरमैन को कथित तौर पर लगभग ₹26 करोड़ से ₹30 करोड़ ट्रांसफर किए गए।
विदेशी कनेक्शन और हिरेन भानु का मामला
जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि हिरेन भानु ने कथित तौर पर कुछ एनआईसीबीएल उधारकर्ताओं के साथ मिलकर भारत के बाहर एक बिजनेस एंटिटी बिना कोई कीमत चुकाए हासिल की। इसके बाद उन विदेशी कंपनियों के खातों में फंड ट्रांसफर किए गए, जो उन भारतीय उधारकर्ताओं से जुड़े थे जिन्होंने बैंक से भारी ऋण लिया था।
ईडी के अनुसार, भानु फिलहाल भारत से बाहर है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा। उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा की कार्यवाही शुरू की जा चुकी है।
संपत्तियों की जब्ती
इससे पहले ईडी ने ₹16.95 करोड़ की 33 चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की थीं, जिनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, फ्लैट, कमर्शियल जगह और कृषि भूमि शामिल हैं। बाद में पीएमएलए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इस जब्ती को भी वैध ठहराया।
आगे की जांच
ईडी का कहना है कि बैंक से विभिन्न लोगों और संस्थाओं को कथित तौर पर ट्रांसफर किए गए फंड का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। यह मामला सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं की बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों में कई घोटाले सामने आ चुके हैं।