14 अक्टूबर 2026
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एनआईसीबीएल बैंक घोटाला: ईडी ने पूर्व जीएम हितेश मेहता समेत 8 के खिलाफ ₹122 करोड़ की चार्जशीट दाखिल की

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एनआईसीबीएल बैंक घोटाला: ईडी ने पूर्व जीएम हितेश मेहता समेत 8 के खिलाफ ₹122 करोड़ की चार्जशीट दाखिल की

सारांश

ईडी ने मुंबई के एनआईसीबीएल बैंक में ₹122 करोड़ के कथित घोटाले में पूर्व जीएम हितेश मेहता समेत 8 लोगों के खिलाफ पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि अकाउंटिंग में हेरफेर, फर्जी कैश ट्रांसफर और विदेशी कंपनियों में फंड डाइवर्जन के जरिए यह घोटाला अंजाम दिया गया।

मुख्य बातें

ईडी ने 14 अक्टूबर 2026 को एनआईसीबीएल बैंक फ्रॉड में 8 आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
मामला ₹122 करोड़ के कथित गबन से जुड़ा है; जांच मुंबई पुलिस की ईओडब्ल्यू की एफआईआर पर आधारित है।
पूर्व जीएम हितेश प्रवीणचंद्र मेहता पर अकाउंटिंग में हेरफेर और झूठे कैश ट्रांसफर रिकॉर्ड बनाने का आरोप।
पूर्व/कार्यवाहक चेयरमैन एवं वाइस-चेयरमैन को कथित तौर पर ₹26 करोड़ से ₹30 करोड़ ट्रांसफर किए गए।
हिरेन भानु फिलहाल भारत से बाहर है; उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा कार्यवाही जारी।
ईडी पहले ₹16.95 करोड़ की 33 संपत्तियाँ जब्त कर चुकी है, जिसे पीएमएलए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने वैध ठहराया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (एनआईसीबीएल) में ₹122 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड मामले में बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद्र मेहता और सात अन्य आरोपियों के खिलाफ 14 अक्टूबर 2026 को एक स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी करने का आदेश दे दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जिसमें बैंक से लगभग ₹122 करोड़ के गबन का आरोप लगाया गया था। चार्जशीट 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के तहत दाखिल की गई है। गौरतलब है कि ईओडब्ल्यू ने भी इस मामले में अलग से चार्जशीट दायर की है।

मुख्य आरोप और घोटाले का तरीका

ईडी के अनुसार, बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर एवं अकाउंट्स हेड हितेश प्रवीणचंद्र मेहता ने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर कर बैंक शाखाओं के बीच कैश ट्रांसफर के झूठे रिकॉर्ड बनाए और इस प्रकार फंड निकाला। जांच में यह भी सामने आया कि ये गतिविधियाँ एक अन्य आरोपी के निर्देश पर की गई थीं, जो बैंक का पूर्व चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन रहा तथा कई वर्षों तक प्रत्यक्ष या अपने सहयोगियों एवं परिवार के सदस्यों के माध्यम से बैंक के कामकाज को नियंत्रित करता था।

ईडी का आरोप है कि अपराध से प्राप्त धनराशि कई लोगों और संस्थाओं को स्थानांतरित की गई। बैंक के पूर्व/कार्यवाहक चेयरमैन एवं वाइस-चेयरमैन को कथित तौर पर लगभग ₹26 करोड़ से ₹30 करोड़ ट्रांसफर किए गए।

विदेशी कनेक्शन और हिरेन भानु का मामला

जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि हिरेन भानु ने कथित तौर पर कुछ एनआईसीबीएल उधारकर्ताओं के साथ मिलकर भारत के बाहर एक बिजनेस एंटिटी बिना कोई कीमत चुकाए हासिल की। इसके बाद उन विदेशी कंपनियों के खातों में फंड ट्रांसफर किए गए, जो उन भारतीय उधारकर्ताओं से जुड़े थे जिन्होंने बैंक से भारी ऋण लिया था।

ईडी के अनुसार, भानु फिलहाल भारत से बाहर है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा। उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा की कार्यवाही शुरू की जा चुकी है।

संपत्तियों की जब्ती

इससे पहले ईडी ने ₹16.95 करोड़ की 33 चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की थीं, जिनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, फ्लैट, कमर्शियल जगह और कृषि भूमि शामिल हैं। बाद में पीएमएलए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इस जब्ती को भी वैध ठहराया।

आगे की जांच

ईडी का कहना है कि बैंक से विभिन्न लोगों और संस्थाओं को कथित तौर पर ट्रांसफर किए गए फंड का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। यह मामला सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं की बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों में कई घोटाले सामने आ चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जाँच का सबसे अहम पड़ाव अधूरा रहेगा — और यह सवाल बना रहेगा कि ₹122 करोड़ में से कितनी रकम वाकई वसूली जा सकेगी।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईसीबीएल बैंक घोटाला क्या है?
न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (एनआईसीबीएल) में ₹122 करोड़ के कथित गबन का मामला है, जिसमें आरोप है कि अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर और झूठे कैश ट्रांसफर रिकॉर्ड बनाकर बैंक से फंड निकाला गया। मुंबई पुलिस की ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की।
ईडी ने किन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है?
ईडी ने बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद्र मेहता समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इनमें बैंक के पूर्व/कार्यवाहक चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन तथा हिरेन भानु भी शामिल हैं।
हिरेन भानु की इस मामले में क्या भूमिका है?
ईडी के अनुसार, हिरेन भानु ने कथित तौर पर एनआईसीबीएल के कुछ उधारकर्ताओं के साथ मिलकर बिना कोई कीमत चुकाए भारत से बाहर एक बिजनेस एंटिटी हासिल की और उन विदेशी कंपनियों के खातों में फंड ट्रांसफर किए। वह फिलहाल भारत से बाहर है और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।
ईडी ने इस मामले में अब तक कितनी संपत्तियाँ जब्त की हैं?
ईडी ने ₹16.95 करोड़ की 33 चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं, जिनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, फ्लैट, कमर्शियल जगह और कृषि भूमि शामिल हैं। पीएमएलए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इस जब्ती को वैध करार दिया है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पीएमएलए कोर्ट ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। ईडी फंड ट्रांसफर की पूरी श्रृंखला का पता लगाने के लिए जांच जारी रखे हुए है, जबकि हिरेन भानु के प्रत्यर्पण या वापसी के प्रयास भी चल रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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