28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: ईडी ने हरियाणा के पूर्व सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: ईडी ने हरियाणा के पूर्व सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया

सारांश

₹645 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में ईडी की जांच का दायरा अब सरकारी अफसरों तक पहुंच गया है। हरियाणा के पूर्व सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि शेल कंपनियों और ज्वैलर्स के जरिए बुना गया यह धन शोधन का जाल कितना गहरा था।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 जून 2026 को हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के पूर्व सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में रखे सरकारी खातों से कथित तौर पर ₹645 करोड़ का गबन किया गया।
मुख्य आरोपी विक्रम वाधवा ने रिभव ऋषि , अभय कुमार और अन्य की कथित मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया।
नरेश कुमार और उनके परिवार के खातों में ₹1.20 करोड़ जमा होने का दावा; स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स समेत कई शेल कंपनियों की भूमिका उजागर।
विशेष पीएमएलए अदालत ने नरेश कुमार को 14 जून 2026 तक ईडी की चार दिन की हिरासत में भेजा।
इससे पहले रिभव ऋषि , अभय कुमार और विक्रम वाधवा को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े ₹645 करोड़ के सरकारी धन गबन मामले में 10 जून 2026 को हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के पूर्व सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। ईडी का आरोप है कि नरेश कुमार सरकारी धन के गबन और उसे छिपाने की सुनियोजित साजिश में सक्रिय भागीदार थे।

घोटाले का मुख्य घटनाक्रम

ईडी की जांच के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में रखे गए हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ तथा पंचकूला के दो निजी स्कूलों के खातों से कथित तौर पर ₹645 करोड़ का सरकारी धन निकाला गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य सूत्रधार विक्रम वाधवा है, जिसने रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले इसी मामले में रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

नरेश कुमार की भूमिका और शेल कंपनियों का जाल

जांच में सामने आया है कि नरेश कुमार को सीधे तौर पर स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नामक एक शेल कंपनी से धनराशि प्राप्त हुई थी। ईडी के अनुसार, इस कंपनी का उपयोग सरकारी धन को स्थानांतरित करने और उसके मूल स्रोत को छिपाने के लिए किया गया। नरेश कुमार ने न केवल अपने खातों में यह धन प्राप्त किया, बल्कि गबन की गई रकम को विभिन्न खातों के माध्यम से घुमाने और नकद वितरण में भी कथित तौर पर अहम भूमिका निभाई।

ईडी की जांच में कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आर.एस. ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड सहित कई शेल कंपनियों की भूमिका उजागर हुई है। इन कंपनियों के खातों में सरकारी विभागों से धन स्थानांतरित कर उसे विभिन्न बैंक खातों के जरिए घुमाया गया।

नकदी और ज्वैलर्स के माध्यम से धन शोधन

ईडी का दावा है कि इन शेल कंपनियों से सैकड़ों करोड़ रुपए अलग-अलग ज्वैलर्स को भेजे गए, जिन्होंने बैंकिंग लेनदेन के बदले नकद राशि उपलब्ध कराई। जांच के अनुसार, रिभव ऋषि और उनके सहयोगियों ने इस नकदी को नरेश कुमार सहित अन्य सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाया। नरेश कुमार और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में कथित तौर पर ₹1.20 करोड़ जमा किए गए, इसके अलावा उन्हें गबन की रकम से तैयार नकदी भी पहुंचाई गई।

अदालती कार्यवाही

गिरफ्तारी के बाद नरेश कुमार को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 14 जून 2026 तक ईडी की चार दिन की हिरासत में भेज दिया। यह ऐसे समय में आया है जब ईडी पूरे धन प्रवाह, लाभार्थियों और गबन की रकम से खरीदी गई संपत्तियों की पहचान के लिए जांच को तेज कर रही है।

आगे क्या होगा

ईडी इस मामले में धन के पूरे प्रवाह की कड़ी जोड़ने और अन्य संभावित लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है। जांच के दायरे में अभी और सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों के नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

ज्वैलर्स और सरकारी अधिकारियों के बीच नकद के जटिल जाल से पता चलता है कि यह महज बैंक फ्रॉड नहीं, बल्कि सुनियोजित संस्थागत भ्रष्टाचार है। सवाल यह है कि ₹645 करोड़ के गबन में केवल चार गिरफ्तारियाँ ही पर्याप्त हैं, या जांच उन वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंचेगी जिनकी निगरानी में यह सब होता रहा। जब तक धन प्रवाह की पूरी कड़ी सार्वजनिक नहीं होती, तब तक जवाबदेही अधूरी रहेगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला क्या है?
यह ₹645 करोड़ के सरकारी धन गबन का मामला है, जिसमें हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों से धन निकाला गया। ईडी के अनुसार, मुख्य आरोपी विक्रम वाधवा ने बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से इसे अंजाम दिया।
नरेश कुमार को क्यों गिरफ्तार किया गया?
ईडी का आरोप है कि नरेश कुमार ने स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी शेल कंपनी से धन प्राप्त किया और गबन की रकम को विभिन्न खातों के जरिए घुमाने तथा नकद वितरण में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके और उनके परिवार के खातों में कथित तौर पर ₹1.20 करोड़ जमा पाए गए।
नरेश कुमार को कब तक ईडी हिरासत में रखा जाएगा?
विशेष पीएमएलए अदालत ने नरेश कुमार को 14 जून 2026 तक चार दिन की ईडी हिरासत में भेजा है। इस दौरान ईडी धन प्रवाह और अन्य लाभार्थियों की पहचान के लिए पूछताछ करेगी।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हो चुके हैं?
अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है — विक्रम वाधवा, रिभव ऋषि, अभय कुमार और अब नरेश कुमार। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
इस घोटाले में शेल कंपनियों की क्या भूमिका थी?
ईडी के अनुसार, कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आर.एस. ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी शेल कंपनियों के खातों में सरकारी धन स्थानांतरित किया गया। इसके बाद इन कंपनियों से ज्वैलर्स को पैसे भेजे गए, जिन्होंने बैंकिंग लेनदेन के बदले नकद उपलब्ध कराई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले