22 अगस्त 2026
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ईडी ने एनएफआर के पूर्व डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की ₹3.50 करोड़ की संपत्ति जब्त की, रिश्वत-मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई

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ईडी ने एनएफआर के पूर्व डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की ₹3.50 करोड़ की संपत्ति जब्त की, रिश्वत-मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई

सारांश

ईडी ने एनएफआर के पूर्व डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹3.50 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कीं। रिश्वत की रकम गुरुग्राम फ्लैट से होते हुए पटना तक पहुँची — यह रेलवे ठेकेदारी भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई है।

मुख्य बातें

ईडी गुवाहाटी ने 22 अगस्त 2026 को ₹3.50 करोड़ की चल-अचल संपत्तियाँ पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से जब्त कीं।
जब्त संपत्तियों में पटना में सोनल जैन के नाम का ₹3.28 करोड़ का आवासीय फ्लैट और केनरा बैंक में ₹21.24 लाख की FD शामिल हैं।
मामला सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है; 14 दिसंबर 2021 को रिश्वत डिलीवरी रोककर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
अपराध की रकम गुरुग्राम के प्लेटिनम टावर्स में फ्लैट खरीदने, फिर 2024 में बेचकर पटना में पुनर्निवेश में लगाई गई।
आरोपी रंजीत कुमार बोराह का 6 सितंबर 2024 को निधन हो गया; पीएमएलए के तहत जब्ती संपत्ति के वर्तमान मालिकों के विरुद्ध जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने 22 अगस्त 2026 को नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के पूर्व डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर स्वर्गीय रंजीत कुमार बोराह और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध ₹3.50 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया है। जब्त संपत्तियों में पटना, बिहार स्थित एक आवासीय फ्लैट और केनरा बैंक में एक सावधि जमा (टर्म डिपॉजिट) शामिल हैं।

जब्त संपत्तियों का विवरण

ईडी द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में सोनल जैन के नाम पर पटना में स्थित एक रेजिडेंशियल फ्लैट — जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹3.28 करोड़ है — और केनरा बैंक में उनके नाम पर एक टर्म डिपॉजिट, जिसकी राशि लगभग ₹21.24 लाख है, शामिल हैं। ये दोनों संपत्तियाँ मिलकर कुल ₹3.50 करोड़ की जब्ती बनाती हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और सीबीआई की भूमिका

ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), एसी-I, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7 और 8 के तहत रंजीत कुमार बोराह और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थी।

आरोप था कि बोराह ने एनएफआर के ठेके देने और उन्हें पूरा कराने की प्रक्रिया में निजी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के बदले अवैध रिश्वत की माँग की और उसे स्वीकार किया। सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को रिश्वत की रकम की डिलीवरी को रोकते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और 2022 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की।

मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल जाल

ईडी की जांच से सामने आया कि बोराह ने रेलवे ठेकेदार फर्म सनशाइन के मालिकों — चिंतन जैन और नयन चंद्र जैन — से रिश्वत की माँग की और वह राशि अपने पास रखी। इस अपराध से प्राप्त रकम का उपयोग सनशाइन के नाम पर प्लेटिनम टावर्स, गुरुग्राम, हरियाणा में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि उक्त फ्लैट 2024 में लगभग ₹3.5 करोड़ में बेचा गया। बिक्री से प्राप्त राशि को सनशाइन, चिंतन जैन और उनकी पत्नी के बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया। अंततः इस राशि का उपयोग पटना में उल्लिखित आवासीय फ्लैट खरीदने के लिए लिए गए होम लोन को चुकाने और सोनल जैन के नाम पर केनरा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने में किया गया।

आरोपी का निधन और पीएमएलए प्रावधान

जांच के दौरान 6 सितंबर 2024 को रंजीत कुमार बोराह का निधन हो गया। हालाँकि, पीएमएलए के प्रावधानों के अनुसार जब्ती की कार्यवाही संपत्ति के विरुद्ध होती है — न कि व्यक्ति के विरुद्ध — इसलिए संपत्तियों के वर्तमान मालिकों के खिलाफ यह कार्यवाही की गई है। यह मामला रेलवे में भ्रष्टाचार और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर ईडी की जारी कार्रवाई का हिस्सा है।

आगे की जांच

ईडी के गुवाहाटी जोनल ऑफिस द्वारा इस मामले में आगे की जांच जारी है। जब्त की गई संपत्तियों को पीएमएलए न्यायाधिकरण के समक्ष रखा जाएगा, जहाँ इनकी पुष्टि की प्रक्रिया होगी। यह कार्रवाई रेलवे ठेकेदारी में भ्रष्टाचार के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि भ्रष्टाचार विरोधी कानून की एक सकारात्मक विशेषता है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि गुरुग्राम से पटना तक की इस जटिल मनी ट्रेल में और कितने मध्यस्थ शामिल थे जो अभी तक जांच के दायरे से बाहर हैं।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने एनएफआर इंजीनियर मामले में क्या कार्रवाई की?
प्रवर्तन निदेशालय के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने पूर्व डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर रंजीत कुमार बोराह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹3.50 करोड़ की संपत्तियाँ पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से जब्त की हैं। इनमें पटना का एक आवासीय फ्लैट और केनरा बैंक में एक सावधि जमा शामिल हैं।
रंजीत कुमार बोराह पर क्या आरोप थे?
बोराह पर आरोप था कि उन्होंने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में ठेके देने की प्रक्रिया में निजी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के बदले अवैध रिश्वत माँगी और स्वीकार की। सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को रिश्वत डिलीवरी रोककर उन्हें गिरफ्तार किया था और 2022 में चार्जशीट दाखिल की थी।
जब्त की गई संपत्तियाँ कहाँ हैं और किसके नाम पर हैं?
जब्त संपत्तियों में पटना, बिहार में सोनल जैन के नाम पर एक आवासीय फ्लैट (लगभग ₹3.28 करोड़) और केनरा बैंक में उनके नाम पर एक टर्म डिपॉजिट (लगभग ₹21.24 लाख) शामिल हैं। ये संपत्तियाँ अपराध से कमाई गई रकम के पुनर्निवेश से बनी बताई गई हैं।
आरोपी के निधन के बाद भी जब्ती कैसे हो सकती है?
पीएमएलए के प्रावधानों के अनुसार जब्ती की कार्यवाही व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि अपराध से जुड़ी संपत्ति के विरुद्ध होती है। रंजीत कुमार बोराह का 6 सितंबर 2024 को निधन होने के बावजूद, संपत्तियों के वर्तमान मालिकों के खिलाफ यह कार्यवाही कानूनी रूप से जारी रखी जा सकती है।
इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग किस तरह हुई?
जांच के अनुसार, रिश्वत की रकम से पहले गुरुग्राम के प्लेटिनम टावर्स में ठेकेदार फर्म सनशाइन के नाम पर फ्लैट खरीदा गया। 2024 में वह फ्लैट लगभग ₹3.5 करोड़ में बेचा गया और बिक्री की रकम को कई बैंक खातों से घुमाकर पटना के फ्लैट के होम लोन चुकाने और फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने में लगाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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