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रेलवे रिश्वत कांड: ईडी ने पूर्व इंजीनियर बोराह से जुड़ी ₹3.50 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की

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रेलवे रिश्वत कांड: ईडी ने पूर्व इंजीनियर बोराह से जुड़ी ₹3.50 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की

सारांश

रेलवे ठेकों में रिश्वतखोरी के एक कथित मामले में ईडी ने ₹3.50 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की हैं — जिनमें पटना का एक फ्लैट और बैंक FD शामिल हैं। धन का सफर गुरुग्राम से पटना तक कई खातों से होकर गुज़रा, और मुख्य आरोपी बोराह जांच के दौरान ही दुनिया छोड़ चुके हैं।

मुख्य बातें

ईडी के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने ₹3.50 करोड़ की चल व अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
जब्त संपत्तियों में पटना में सोनल जैन के नाम का ₹3.28 करोड़ का फ्लैट और केनरा बैंक में ₹21.24 लाख की FD शामिल हैं।
सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को कथित रिश्वत पकड़ी थी; 2022 में चार्जशीट दाखिल हुई।
कथित अपराध की आय गुरुग्राम के प्लैटिनम टावर्स फ्लैट की खरीद-बिक्री के ज़रिये लॉन्डर की गई।
मुख्य आरोपी रंजीत कुमार बोराह का निधन 6 सितंबर 2024 को जांच के दौरान ही हो गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर), मालिगांव के पूर्व उप मुख्य विद्युत अभियंता (निर्माण) स्वर्गीय रंजीत कुमार बोराह और अन्य से जुड़ी लगभग ₹3.50 करोड़ की चल व अचल संपत्तियों को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई रेलवे ठेकों में कथित रिश्वतखोरी से जुड़े एक बहु-एजेंसी जांच मामले का हिस्सा है।

जब्त संपत्तियों का विवरण

कुर्क की गई संपत्तियों में पटना में सोनल जैन के नाम पर पंजीकृत एक आवासीय फ्लैट शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹3.28 करोड़ है। इसके अलावा, केनरा बैंक में उनके नाम पर जमा लगभग ₹21.24 लाख की सावधि जमा (Fixed Deposit) भी इस कुर्की के दायरे में आई है।

मामले की पृष्ठभूमि और सीबीआई की भूमिका

ईडी की यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के नई दिल्ली स्थित मुख्य जांच अधिकारी द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। यह एफआईआर बोराह और अन्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धाराओं 7 और 8 के अंतर्गत दर्ज की गई थी।

मामले का केंद्र यह आरोप है कि बोराह ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के ठेकों के आवंटन और निष्पादन में अनुचित लाभ पहुँचाने के बदले निजी ठेकेदारों से अवैध रिश्वत की माँग की और उसे स्वीकार किया। सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को कथित रिश्वत की रकम की डिलीवरी के दौरान ही उसे जब्त कर लिया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 2022 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई।

धन के प्रवाह की जांच

ईडी की जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि बोराह ने रेलवे ठेकेदारी फर्म मेसर्स सनशाइन के मालिकों चिंतन जैन और नयन चंद्र जैन से रिश्वत की माँग की और वसूली की। जांच एजेंसी के अनुसार, इस अपराध से अर्जित धनराशि का उपयोग हरियाणा के गुरुग्राम स्थित प्लैटिनम टावर्स में मेसर्स सनशाइन के नाम पर एक फ्लैट खरीदने में किया गया।

यह संपत्ति बाद में 2024 में लगभग ₹3.5 करोड़ में बेची गई। ईडी के अनुसार, बिक्री से प्राप्त राशि को मेसर्स सनशाइन, चिंतन जैन और उनकी पत्नी सोनल जैन के बैंक खातों के ज़रिये स्थानांतरित किया गया। अंततः इस धनराशि का उपयोग पटना में सोनल जैन के नाम पर पंजीकृत आवासीय फ्लैट के गृह ऋण को चुकाने और केनरा बैंक में सावधि जमा करने के लिए किया गया।

बोराह का निधन और जांच की स्थिति

गौरतलब है कि रंजीत कुमार बोराह का निधन 6 सितंबर 2024 को हो गया, जब जांच अभी जारी थी। हालाँकि, ईडी की कार्रवाई उनसे जुड़े कथित अपराध की आय के पुनर्निवेश और एकीकरण की जांच के तहत जारी है। एजेंसी का कहना है कि यह नवीनतम अस्थायी कुर्की रेलवे रिश्वत कांड में मनी लॉन्ड्रिंग की व्यापक जांच का अंग है।

आगे की कार्रवाई

ईडी की यह कुर्की धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है और इसे सक्षम न्यायालय में पुष्टि के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह मामला रेलवे ठेका प्रणाली में कथित भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुँचने की केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती कोशिशों को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि कथित रिश्वत सीधे संपत्ति में नहीं, बल्कि परतदार लेन-देन के ज़रिये छुपाई गई। आरोपी की मृत्यु के बावजूद जांच जारी रहना यह संकेत देता है कि एजेंसी धन के अंतिम लाभार्थियों तक पहुँचना चाहती है। असली सवाल यह है कि क्या यह कुर्की अदालत में टिकेगी और क्या सनशाइन फर्म के अन्य लेन-देन भी जांच के दायरे में आएंगे।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने रेलवे रिश्वत कांड में किसकी संपत्ति जब्त की है?
ईडी ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के पूर्व उप मुख्य विद्युत अभियंता स्वर्गीय रंजीत कुमार बोराह और अन्य से जुड़ी लगभग ₹3.50 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इनमें पटना में सोनल जैन के नाम का आवासीय फ्लैट और केनरा बैंक में सावधि जमा शामिल हैं।
इस मामले में सीबीआई ने क्या कार्रवाई की थी?
सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को कथित रिश्वत की रकम की डिलीवरी के दौरान उसे जब्त किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद 2022 में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
मेसर्स सनशाइन और चिंतन जैन का इस मामले से क्या संबंध है?
ईडी के अनुसार, रेलवे ठेकेदारी फर्म मेसर्स सनशाइन के मालिक चिंतन जैन और नयन चंद्र जैन ने कथित तौर पर बोराह को रिश्वत दी। अपराध की आय से गुरुग्राम में फर्म के नाम पर फ्लैट खरीदा गया, जिसे बाद में 2024 में ₹3.5 करोड़ में बेचकर धन को विभिन्न खातों के ज़रिये स्थानांतरित किया गया।
मुख्य आरोपी रंजीत कुमार बोराह का क्या हुआ?
रंजीत कुमार बोराह का निधन 6 सितंबर 2024 को हो गया, जब ईडी की जांच अभी जारी थी। उनकी मृत्यु के बावजूद ईडी ने उनसे जुड़े कथित अपराध की आय की जांच और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई जारी रखी है।
धन शोधन में गुरुग्राम के फ्लैट की क्या भूमिका थी?
ईडी के अनुसार, कथित रिश्वत की रकम का उपयोग पहले गुरुग्राम के प्लैटिनम टावर्स में मेसर्स सनशाइन के नाम पर फ्लैट खरीदने में किया गया। 2024 में उसे ₹3.5 करोड़ में बेचा गया और बिक्री राशि को विभिन्न बैंक खातों के ज़रिये पटना के फ्लैट के गृह ऋण चुकाने और FD बनाने में लगाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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