रेलवे रिश्वत कांड: ईडी ने पूर्व इंजीनियर बोराह से जुड़ी ₹3.50 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर), मालिगांव के पूर्व उप मुख्य विद्युत अभियंता (निर्माण) स्वर्गीय रंजीत कुमार बोराह और अन्य से जुड़ी लगभग ₹3.50 करोड़ की चल व अचल संपत्तियों को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई रेलवे ठेकों में कथित रिश्वतखोरी से जुड़े एक बहु-एजेंसी जांच मामले का हिस्सा है।
जब्त संपत्तियों का विवरण
कुर्क की गई संपत्तियों में पटना में सोनल जैन के नाम पर पंजीकृत एक आवासीय फ्लैट शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹3.28 करोड़ है। इसके अलावा, केनरा बैंक में उनके नाम पर जमा लगभग ₹21.24 लाख की सावधि जमा (Fixed Deposit) भी इस कुर्की के दायरे में आई है।
मामले की पृष्ठभूमि और सीबीआई की भूमिका
ईडी की यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के नई दिल्ली स्थित मुख्य जांच अधिकारी द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। यह एफआईआर बोराह और अन्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धाराओं 7 और 8 के अंतर्गत दर्ज की गई थी।
मामले का केंद्र यह आरोप है कि बोराह ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के ठेकों के आवंटन और निष्पादन में अनुचित लाभ पहुँचाने के बदले निजी ठेकेदारों से अवैध रिश्वत की माँग की और उसे स्वीकार किया। सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को कथित रिश्वत की रकम की डिलीवरी के दौरान ही उसे जब्त कर लिया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 2022 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई।
धन के प्रवाह की जांच
ईडी की जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि बोराह ने रेलवे ठेकेदारी फर्म मेसर्स सनशाइन के मालिकों चिंतन जैन और नयन चंद्र जैन से रिश्वत की माँग की और वसूली की। जांच एजेंसी के अनुसार, इस अपराध से अर्जित धनराशि का उपयोग हरियाणा के गुरुग्राम स्थित प्लैटिनम टावर्स में मेसर्स सनशाइन के नाम पर एक फ्लैट खरीदने में किया गया।
यह संपत्ति बाद में 2024 में लगभग ₹3.5 करोड़ में बेची गई। ईडी के अनुसार, बिक्री से प्राप्त राशि को मेसर्स सनशाइन, चिंतन जैन और उनकी पत्नी सोनल जैन के बैंक खातों के ज़रिये स्थानांतरित किया गया। अंततः इस धनराशि का उपयोग पटना में सोनल जैन के नाम पर पंजीकृत आवासीय फ्लैट के गृह ऋण को चुकाने और केनरा बैंक में सावधि जमा करने के लिए किया गया।
बोराह का निधन और जांच की स्थिति
गौरतलब है कि रंजीत कुमार बोराह का निधन 6 सितंबर 2024 को हो गया, जब जांच अभी जारी थी। हालाँकि, ईडी की कार्रवाई उनसे जुड़े कथित अपराध की आय के पुनर्निवेश और एकीकरण की जांच के तहत जारी है। एजेंसी का कहना है कि यह नवीनतम अस्थायी कुर्की रेलवे रिश्वत कांड में मनी लॉन्ड्रिंग की व्यापक जांच का अंग है।
आगे की कार्रवाई
ईडी की यह कुर्की धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है और इसे सक्षम न्यायालय में पुष्टि के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह मामला रेलवे ठेका प्रणाली में कथित भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुँचने की केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती कोशिशों को रेखांकित करता है।