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मुंबई पुलिस ने ₹2.53 करोड़ की नाइट्राजेपम-अल्प्राजोलम गोलियाँ जब्त कीं, गोवंडी से आरोपी गिरफ्तार

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मुंबई पुलिस ने ₹2.53 करोड़ की नाइट्राजेपम-अल्प्राजोलम गोलियाँ जब्त कीं, गोवंडी से आरोपी गिरफ्तार

सारांश

मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने गोवंडी में छापा मारकर ₹2.53 करोड़ की 9,800 प्रतिबंधित गोलियाँ बरामद कीं। नाइट्राजेपम और अल्प्राजोलम की यह खेप बिना पर्ची अवैध रूप से बेची जा रही थी। NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज, आपूर्ति नेटवर्क की जाँच जारी।

मुख्य बातें

मुंबई ANC वर्ली यूनिट ने 6 अक्टूबर 2026 की रात गोवंडी में छापेमारी कर ₹2.53 करोड़ की प्रतिबंधित दवाएं ज़ब्त कीं।
बरामद दवाओं में 4,500 नाइट्राजेपम गोलियाँ (₹1.98 करोड़) और 5,300 अल्प्राजोलम गोलियाँ (₹55.92 लाख) शामिल हैं।
मामला एनडीपीएस अधिनियम की धारा 22(सी) के तहत दर्ज किया गया है।
ऑपरेशन पुलिस कमिश्नर देवेन भारती समेत वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुआ।
दवाओं के आपूर्ति स्रोत और नेटवर्क की जाँच अभी जारी है।

मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC), वर्ली यूनिट ने 6 अक्टूबर 2026 की रात गोवंडी इलाके में छापेमारी कर ₹2.53 करोड़ मूल्य की प्रतिबंधित नशीली दवाएं बरामद की हैं। कुल 9,800 गोलियाँ — जिनमें नाइट्राजेपम और अल्प्राजोलम शामिल हैं — एक आरोपी के घर से ज़ब्त की गई हैं, जो कथित तौर पर इन दवाओं की अवैध बिक्री में संलिप्त था।

मामले का घटनाक्रम

पुलिस को सूचना मिली थी कि डॉ. जाकिर हुसैन नगर, गोवंडी क्षेत्र में एक व्यक्ति बेंजोडायजेपाइन वर्ग की नशीली गोलियाँ अवैध रूप से बेच रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद रात 10:40 बजे से 12:40 बजे के बीच आरोपी के आवास की तलाशी ली गई। यह मामला उसी रात एनडीपीएस अधिनियम की धारा 22(सी) के तहत दर्ज किया गया।

ज़ब्त दवाओं का विवरण

तलाशी के दौरान पुलिस ने निटकोर-10 ब्रांड की 4,500 नाइट्राजेपम गोलियाँ बरामद कीं, जिनका वज़न लगभग 2 किलो 475 ग्राम और बाज़ार मूल्य ₹1.98 करोड़ आँका गया है। इसके अतिरिक्त प्रोकाल्म-1 ब्रांड की 5,300 अल्प्राजोलम गोलियाँ भी ज़ब्त की गईं, जिनका वज़न लगभग 689 ग्राम और मूल्य ₹55.92 लाख है। इस तरह कुल ज़ब्त दवाओं की कीमत ₹2.53 करोड़ से अधिक बताई गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

यह ऑपरेशन मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, जॉइंट पुलिस कमिश्नर (क्राइम) अनिल कुंभार और एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम) कृष्णकांत उपाध्याय के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। ANC और वर्ली यूनिट के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रत्यक्ष देखरेख में पूरी छापेमारी पूरी की गई।

दवाओं की प्रकृति और खतरा

गौरतलब है कि नाइट्राजेपम और अल्प्राजोलम दोनों बेंजोडायजेपाइन वर्ग की दवाएं हैं, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए चिकित्सकीय रूप से उपयोग की जाती हैं। हालाँकि, इनका दुरुपयोग गंभीर लत और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। डॉक्टर की पर्ची के बिना इनकी बिक्री एनडीपीएस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।

आगे की जाँच

पुलिस के अनुसार, जाँच अभी जारी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ये दवाएं किस स्रोत से आ रही थीं और इस अवैध नेटवर्क की व्यापकता कितनी है। यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई में प्रतिबंधित दवाओं की अवैध आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के लिए ANC लगातार अभियान चला रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये दवाएं आईं कहाँ से — क्या यह फार्मा सप्लाई चेन में रिसाव है या संगठित तस्करी? जब तक आपूर्ति नेटवर्क की जड़ नहीं काटी जाती, ऐसी छापेमारियाँ लक्षण का उपचार करती हैं, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई पुलिस ने कौन-सी दवाएं जब्त की हैं और उनकी कीमत क्या है?
मुंबई ANC वर्ली यूनिट ने 4,500 नाइट्राजेपम और 5,300 अल्प्राजोलम गोलियाँ — कुल 9,800 गोलियाँ — बरामद की हैं, जिनका कुल बाज़ार मूल्य लगभग ₹2.53 करोड़ है। ये दवाएं गोवंडी, मुंबई में एक आरोपी के घर से ज़ब्त की गईं।
नाइट्राजेपम और अल्प्राजोलम क्यों प्रतिबंधित हैं?
नाइट्राजेपम और अल्प्राजोलम बेंजोडायजेपाइन वर्ग की दवाएं हैं जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालती हैं। डॉक्टर की पर्ची के बिना इनकी खरीद-बिक्री एनडीपीएस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है, क्योंकि इनके दुरुपयोग से गंभीर लत और स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं।
इस मामले में कौन-सी धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है?
यह मामला एनडीपीएस (नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज) अधिनियम की धारा 22(सी) के तहत दर्ज किया गया है। यह धारा प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक पदार्थों की व्यावसायिक मात्रा में अवैध बिक्री या उत्पादन पर लागू होती है।
यह ऑपरेशन किन अधिकारियों की निगरानी में हुआ?
यह छापेमारी मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, जॉइंट पुलिस कमिश्नर (क्राइम) अनिल कुंभार और एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम) कृष्णकांत उपाध्याय के मार्गदर्शन में की गई।
क्या इस मामले में आगे की जाँच जारी है?
हाँ, पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि ये दवाएं किस स्रोत से आ रही थीं और इस अवैध नेटवर्क की व्यापकता कितनी है। जाँच के नतीजों के आधार पर और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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