10 जुलाई 2026
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मुंबई क्राइम ब्रांच का ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

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मुंबई क्राइम ब्रांच का ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

सारांश

मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल ने एक साथ 13 ठिकानों पर छापेमारी की — यह मई में पकड़ी गई ₹50.74 करोड़ की MD ड्रग्स फैक्ट्री से जुड़ी जाँच का विस्तार है। फर्जी कंपनियों के ज़रिए ऑनलाइन केमिकल मंगाने का नेटवर्क सामने आया है, जो इस मामले को महज़ एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि संगठित तस्करी का हिस्सा बनाता है।

मुख्य बातें

मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल की 10 टीमों ने 9 जुलाई 2026 को शहर के 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
मई 2026 में आग्रिपाड़ा में पकड़ी गई अवैध ड्रग्स फैक्ट्री से ₹50.74 करोड़ की मेफेड्रॉन ड्रग्स , हथियार और केमिकल जब्त हुए थे।
11 फर्जी कंपनियों के नाम पर ऑनलाइन केमिकल ऑर्डर किए गए — पते पर पहुँचने पर कोई कंपनी नहीं मिली।
राजस्थान के झालावाड़ में पुलिस ने ₹50 लाख की स्मैक और चरस बरामद कर तीन तस्करों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में नरेश गुर्जर , मोर सिंह गुर्जर (250 ग्राम स्मैक) और शाहरूख (86 ग्राम चरस) शामिल हैं।

मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल (ANC) ने 9 जुलाई 2026 को शहर के 13 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। 10 विशेष टीमों ने आग्रिपाड़ा, बांद्रा, कोलाबा, पवई और घाटकोपर सहित मुंबई के कई इलाकों में यह कार्रवाई की। यह अभियान मई में उजागर हुई एक अवैध ड्रग्स फैक्ट्री से जुड़ी जाँच की अगली कड़ी है।

मई की छापेमारी से जुड़ा है यह अभियान

मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल की कांदिवली यूनिट ने मई 2026 में दक्षिण मुंबई के आग्रिपाड़ा इलाके में एक रिहाइशी इमारत के फ्लैट में चल रही अवैध ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। उस कार्रवाई में पुलिस ने लगभग ₹50.74 करोड़ मूल्य की मेफेड्रॉन (MD) ड्रग्स, हथियार और ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सामान जब्त किया था। उसी मामले में आगे की जाँच के तहत यह ताज़ा छापेमारी की जा रही है।

फर्जी कंपनियों के ज़रिए मंगाए जाते थे केमिकल

क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, MD ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थ ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगाए जाते थे। जाँच में सामने आया कि 11 अलग-अलग कंपनियों के नाम पर यह केमिकल ऑर्डर किए गए थे। जब क्राइम ब्रांच की टीमें आरोपियों द्वारा बताए गए इन कंपनियों के पतों पर पहुँचीं, तो वे पते फर्जी निकले — उन जगहों पर ऐसी कोई कंपनी अस्तित्व में ही नहीं थी। अब पुलिस संबंधित इलाकों में स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है।

राजस्थान में भी ड्रग्स तस्करों पर शिकंजा

इसी बीच, राजस्थान के झालावाड़ से भी ड्रग्स विरोधी कार्रवाई की खबर आई। झालावाड़ पुलिस ने गुरुवार को ₹50 लाख मूल्य की स्मैक और चरस बरामद कर तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। झालावाड़ कोतवाली पुलिस ने पहली कार्रवाई में नरेश गुर्जर और मोर सिंह गुर्जर को लगभग 250 ग्राम स्मैक के साथ पकड़ा।

दूसरी कार्रवाई में पुलिस ने तांबे की खान, ईदगाह रोड पर आरोपी शाहरूख को लगभग 86 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय थे।

क्या होगा आगे

मुंबई क्राइम ब्रांच की जाँच अभी जारी है और फर्जी कंपनियों के नेटवर्क की तह तक पहुँचना पुलिस की प्राथमिकता बताई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ कानून-प्रवर्तन एजेंसियाँ एक साथ अभियान चला रही हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹50 करोड़ से अधिक की ड्रग्स फैक्ट्री एक रिहाइशी इमारत में इतने समय तक कैसे चलती रही। फर्जी कंपनियों के ज़रिए ऑनलाइन केमिकल मंगाने का तरीका बताता है कि यह नेटवर्क सुनियोजित और तकनीक-सक्षम था। मुख्यधारा की कवरेज गिरफ्तारियों और जब्ती पर केंद्रित है, लेकिन यह नहीं पूछती कि आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी में कहाँ चूक हुई। जब तक केमिकल सप्लाई चेन और ऑनलाइन ऑर्डरिंग पर नियामक कसाव नहीं आता, ऐसे नेटवर्क नए रूप में उभरते रहेंगे।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 13 ठिकानों पर छापेमारी क्यों की?
यह छापेमारी मई 2026 में आग्रिपाड़ा में पकड़ी गई अवैध MD ड्रग्स फैक्ट्री से जुड़ी आगे की जाँच का हिस्सा है। उस ऑपरेशन में ₹50.74 करोड़ की मेफेड्रॉन ड्रग्स, हथियार और केमिकल जब्त हुए थे, और अब पुलिस पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रही है।
मेफेड्रॉन (MD) ड्रग्स क्या है और यह क्यों खतरनाक है?
मेफेड्रॉन एक सिंथेटिक मादक पदार्थ है जिसे 'MD' या 'मेफ' भी कहा जाता है। यह भारत में NDPS अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है और इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य खतरे होते हैं। इसे प्रयोगशाला में रासायनिक पदार्थों से बनाया जाता है, इसीलिए इसकी अवैध फैक्ट्रियाँ रिहाइशी इलाकों में छुपाई जाती हैं।
फर्जी कंपनियों के ज़रिए केमिकल मंगाने का क्या मामला है?
जाँच में सामने आया कि ड्रग्स बनाने के लिए ज़रूरी केमिकल 11 अलग-अलग कंपनियों के नाम पर ऑनलाइन ऑर्डर किए गए थे। जब क्राइम ब्रांच उन पतों पर पहुँची, तो वहाँ ऐसी कोई कंपनी नहीं मिली — सभी पते फर्जी थे। पुलिस अब उन इलाकों में पूछताछ कर असली सप्लायरों का पता लगाने में जुटी है।
राजस्थान के झालावाड़ में किसे और क्या बरामद हुआ?
झालावाड़ कोतवाली पुलिस ने तीन तस्करों को गिरफ्तार किया — नरेश गुर्जर और मोर सिंह गुर्जर को लगभग 250 ग्राम स्मैक के साथ, और शाहरूख को तांबे की खान, ईदगाह रोड से लगभग 86 ग्राम चरस के साथ। कुल बरामदगी का मूल्य लगभग ₹50 लाख बताया गया है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
मुंबई क्राइम ब्रांच फर्जी कंपनियों के नेटवर्क की जाँच जारी रखे हुए है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं। पुलिस ऑनलाइन केमिकल सप्लाई चेन की भी पड़ताल कर रही है ताकि ड्रग्स निर्माण के स्रोत तक पहुँचा जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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