जम्मू-कश्मीर में 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में ईडी ने 16.86 लाख रुपये की राशि जब्त की

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जम्मू-कश्मीर में 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में ईडी ने 16.86 लाख रुपये की राशि जब्त की

सारांश

जम्मू-कश्मीर में प्रवर्तन निदेशालय ने 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में ईडी ने 16.86 लाख रुपये की धनराशि को अस्थायी रूप से जब्त किया है, जो धोखाधड़ी के माध्यम से अर्जित की गई थी। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • ईडी ने ₹16,86,465 की राशि जब्त की।
  • डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी में नागरिकों को ठगा गया।
  • आरोपियों ने अधिकारियों का रूप धारण किया।
  • पीड़ितों को कुछ राशि पहले ही लौटाई गई।
  • यह मामला साइबर धोखाधड़ी का है।

श्रीनगर, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने भोले-भाले नागरिकों को धोखा देकर अर्जित की गई ₹16,86,465 की धनराशि को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

ईडी की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह राशि जब्त की गई है।

जब्त की गई धनराशि नई दिल्ली के करोल बाग स्थित एचडीएफसी बैंक में मेसर्स जीविका फाउंडेशन के नाम से खोले गए एक खाते में है। यह खाता आरोपी गौरव कुमार द्वारा संचालित किया जाता है, जो एक सुनियोजित डिजिटल धोखाधड़ी रैकेट में शामिल पाया गया है।

ईडी ने 19.10.2024 को कश्मीर जोन के साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर प्रारंभिक आरोपपत्र के आधार पर जांच शुरू की।

यह जांच साइबर धोखाधड़ी से संबंधित है, जिसमें आरोपी गौरव कुमार, गुरप्रीत सिंह और उज्ज्वल चौहान ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर टीआरएआई और सीबीआई जैसे अधिकारियों का रूप धारण कर नागरिकों को ठगा।

पीड़ितों को बताया गया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल हैं और उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी गई। डर और दबाव के चलते पीड़ितों को अपने फिक्स्ड डिपॉजिट निकालने और धनराशि स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया।

इस प्रकार, ₹21,00,000 की राशि धोखाधड़ी से प्राप्त की गई और इसे मेसर्स जीविका फाउंडेशन के खाते में स्थानांतरित कर दिया गया।

धोखाधड़ी से प्राप्त कुल राशि में से श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा 28.09.2024 को पारित आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता को पहले ही ₹4,13,535 वापस कर दिए गए हैं।

Point of View

जिसमें नागरिकों को धोखा देकर धनराशि हासिल की गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की है, जिससे स्पष्ट होता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस तरह की धोखाधड़ी के प्रति सतर्क हैं।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट एक प्रकार की साइबर धोखाधड़ी है, जिसमें ठग नागरिकों को धोखा देकर उनकी धनराशि हासिल करते हैं।
ईडी ने कितनी धनराशि जब्त की?
ईडी ने 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में ₹16,86,465 की धनराशि जब्त की है।
यह धोखाधड़ी कैसे हुई?
धोखाधड़ी में आरोपी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों का रूप धारण करके लोगों को ठगा।
क्या पीड़ितों को धन वापस मिला?
जी हां, धोखाधड़ी से प्राप्त कुल राशि में से कुछ धन पहले ही पीड़ितों को लौटाया जा चुका है।
कौन-कौन से आरोपी शामिल हैं?
इस मामले में गौरव कुमार, गुरप्रीत सिंह और उज्ज्वल चौहान शामिल हैं।
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