मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में एनआईए ने कांग्रेस नेता सायेम चौधरी को गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 25 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में तैनात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और उनके वाहनों पर हमले के मामले में कांग्रेस नेता सायेम चौधरी को गिरफ्तार किया। मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व उम्मीदवार रहे सायेम चौधरी को एजेंसी के कोलकाता कार्यालय में लंबी पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला अप्रैल 2026 में मोथाबाड़ी के ब्लॉक विकास कार्यालय (बीडीओ) के घेराव से जुड़ा है। एसआईआर अभियान के तहत तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घंटों तक बंधक बनाए रखा था। बीडीओ कार्यालय से लौटते समय इन अधिकारियों के वाहनों पर भी हमला किया गया था। एनआईए अधिकारियों के अनुसार, यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई थी।
सायेम चौधरी के खिलाफ साक्ष्य
एनआईए अधिकारियों के अनुसार, सायेम चौधरी को बाबू चौधरी के नाम से भी जाना जाता है। जांचकर्ताओं को ऐसे वीडियो फुटेज प्राप्त हुए हैं जिनमें वे एसआईआर प्रक्रिया और न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध भड़काऊ बयान देते दिखाई दे रहे हैं। एजेंसी को यह भी संदेह है कि बीडीओ कार्यालय से लौटते समय न्यायिक अधिकारियों के वाहनों पर हुए हमले में भी उनकी प्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल में जब एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली थी, तब सायेम चौधरी से पूछताछ की गई थी। उस समय पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया था। बाद में नए साक्ष्य सामने आने पर उन्हें कोलकाता बुलाकर गिरफ्तार किया गया।
अब तक की गिरफ्तारियाँ और आरोप पत्र
इस मामले में अब तक कुल 72 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 31 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इससे पहले राज्य पुलिस ने शाहजहां अली कादरी को गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में एनआईए की हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। इस मामले में इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) नेता गोलाम रब्बानी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
एनआईए की जांच का दायरा
एनआईए ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मालदा जिले में एसआईआर अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों को अवैध रूप से रोकने और भीड़ द्वारा विरोध-प्रदर्शन से जुड़े एक दर्जन से अधिक मामलों की जांच कर रही है। एजेंसी के अनुसार, चुनाव-पूर्व हुई इस व्यापक हिंसा के पीछे की बड़ी साजिश में शामिल सभी आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने का प्रयास जारी है।
आगे क्या होगा
एनआईए ने पुष्टि की है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं। यह मामला न केवल चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने, बल्कि न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने के गंभीर आरोपों को रेखांकित करता है — जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है।