एनआईए ने मालदा के स्थानीय नेता सायेम चौधरी को किया गिरफ्तार, न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में 30वीं गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के स्थानीय नेता सायेम चौधरी उर्फ बाबू चौधरी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों को गैर-कानूनी रूप से बंधक बनाने और हिंसा भड़काने से जुड़े मामले में की गई है। अधिकारियों ने गुरुवार, 25 जून को इसकी पुष्टि की।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
मोथबारी, मालदा निवासी सायेम चौधरी को एनआईए ने अपने कोलकाता स्थित ब्रांच कार्यालय में विस्तृत पूछताछ के बाद हिरासत में लिया। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी 1 अप्रैल को बीडीओ कार्यालय के ब्लॉक-2 में न्यायिक अधिकारियों को गैर-कानूनी रूप से बंधक बनाने में शामिल मुख्य आरोपियों में से एक था।
अधिकारियों ने बताया कि बाबू चौधरी उस भीड़ का हिस्सा था जिसने कानून-व्यवस्था में बाधा डाली और सरकारी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमले किए। इन हमलों में 9 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
आरोपी की भूमिका
जांच टीम के अनुसार, सायेम चौधरी ने घटना से एक दिन पहले बीडीओ कार्यालय के सामने भाषण दिया था, जिसका उद्देश्य लोगों को हिंसक विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाना था। अधिकारियों ने यह भी बताया कि उसने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची और उन गैर-कानूनी सभाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हिंसा, डराने-धमकाने और बाधा उत्पन्न करने की कोशिशें की गईं।
अब तक की जांच और गिरफ्तारियाँ
एनआईए ने पुष्टि की है कि इस मामले में अब तक कुल 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी मालदा जिले में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान हुए भीड़ के विरोध-प्रदर्शन और न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने से जुड़े एक दर्जन से अधिक मामलों की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि एनआईए ने इन मामलों की जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर शुरू की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने मालदा में अप्रैल में हुई हिंसा का स्वतः संज्ञान लिया था — जो इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।
एनआईए की आगे की कार्रवाई
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वह चुनाव-पूर्व हिंसा के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए सभी संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में अपनी जांच जारी रखे हुए है। यह मामला राज्य में चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के व्यापक सवाल से भी जुड़ा हुआ है।