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एनआईए स्पेशल कोर्ट का फैसला: बेंगलुरु-शिवमोग्गा IS साजिश में हुजैर फरहान बेग को 6 साल की सजा

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एनआईए स्पेशल कोर्ट का फैसला: बेंगलुरु-शिवमोग्गा IS साजिश में हुजैर फरहान बेग को 6 साल की सजा

सारांश

एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने बेंगलुरु-शिवमोग्गा आईएस मॉड्यूल मामले में हुजैर फरहान बेग को 6 साल कठोर कारावास की सजा दी — यह इस मामले की तीसरी दोषसिद्धि है। फरार ऑनलाइन हैंडलर मोहम्मद शाहिद फैसल की तलाश अभी भी जारी है।

मुख्य बातें

एनआईए स्पेशल कोर्ट ने हुजैर फरहान बेग को 6 साल कठोर कारावास और ₹58,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
मामला मूल रूप से 19 सितंबर 2022 को कर्नाटक पुलिस ने दर्ज किया था; बाद में एनआईए ने जाँच अपने हाथ में ली।
शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली में एक गुप्त आईएस मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ, जिसे ऑनलाइन हैंडलर 'कर्नल' उर्फ मोहम्मद शाहिद फैसल संचालित कर रहा था।
आरोपी ने बेंगलुरु में आतंकी गतिविधि के लिए ठिकाना तैयार किया और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए फंडिंग प्राप्त की।
एनआईए ने 12 आरोपियों के खिलाफ 4 चार्जशीट दाखिल की हैं; अब तक 3 दोषसिद्धियाँ हो चुकी हैं।
फरार हैंडलर मोहम्मद शाहिद फैसल की तलाश जारी है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की स्पेशल कोर्ट ने बेंगलुरु-शिवमोग्गा इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकी साजिश मामले में आरोपी हुजैर फरहान बेग उर्फ हुजैर को दोषी करार देते हुए 6 साल की कठोर कारावास और ₹58,000 जुर्माने की सजा सुनाई है। यह इस मामले में किसी आरोपी के खिलाफ अदालत का नवीनतम फैसला है, और अब तक इस मामले में 3 आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मूल रूप से कर्नाटक पुलिस ने 19 सितंबर 2022 को दर्ज किया था। जाँच के दौरान एनआईए ने मामले की बागडोर संभाली और कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली शहर में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएस से जुड़े एक सक्रिय मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। यह मॉड्यूल गुप्त रूप से संचालित हो रहा था और देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहा था।

ऑनलाइन हैंडलर और कट्टरपंथीकरण का नेटवर्क

जाँच में सामने आया कि आरोपियों को 'कर्नल' नाम के एक ऑनलाइन हैंडलर द्वारा निर्देशित किया जा रहा था, जिसकी पहचान बाद में मोहम्मद शाहिद फैसल के रूप में हुई। वह एनआईए के कई आतंकी मामलों में फरार आरोपी है। शाहिद फैसल युवाओं को आईएस की विचारधारा के प्रति कट्टरपंथी बना रहा था और उन्हें भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती कर रहा था।

दोषसिद्ध आरोपी हुजैर फरहान बेग को सह-आरोपियों माज मुनीर अहमद और सैयद यासीन ने कट्टरपंथी बनाया और नेटवर्क में शामिल किया था। माज मुनीर अहमद के निर्देश पर हुजैर ने बेंगलुरु में आतंकी गतिविधियों के लिए एक ठिकाने का इंतजाम किया।

क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए फंडिंग

जाँच में वित्तपोषण का एक चिंताजनक तरीका भी उजागर हुआ। हुजैर के मित्रों के खातों में क्रिप्टोकरेंसी के रूप में फंड भेजा गया, जिसे बाद में फिएट करेंसी (आम मुद्रा) में बदलकर ठिकाने के किराये और अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल किया गया। यह फंड माज मुनीर अहमद ने ऑनलाइन हैंडलर मोहम्मद शाहिद फैसल के ज़रिए उपलब्ध कराया था।

अभियोजन की स्थिति

एनआईए ने इस मामले में 12 आरोपियों के खिलाफ 4 चार्जशीट दाखिल की हैं। इनमें से अब तक 3 आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है और सभी को 6 साल की कठोर कैद के साथ जुर्माना लगाया गया है। एजेंसी फरार हैंडलर मोहम्मद शाहिद फैसल का पता लगाने के प्रयास जारी रखे हुए है।

आगे की कार्रवाई

एनआईए के अनुसार इस मामले में शेष आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी है। एजेंसी उन सूत्रधारों और ऑनलाइन हैंडलरों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने पर केंद्रित है जो देश से बाहर बैठकर भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेल रहे हैं। यह मामला दर्शाता है कि आतंकी नेटवर्क अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करके अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती वह है जो अदालत से बाहर है — फरार ऑनलाइन हैंडलर मोहम्मद शाहिद फैसल अभी भी पकड़ से बाहर है, और यही इस पूरे मॉड्यूल का सूत्रधार था। क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए फंडिंग और 'कर्नल' जैसे छद्म ऑनलाइन पहचान का इस्तेमाल बताता है कि आतंकी नेटवर्क अब डिजिटल निगरानी से बचने के लिए परिष्कृत तरीके अपना रहे हैं। मॉड्यूल के सदस्यों को सज़ा देना ज़रूरी है, लेकिन जब तक कट्टरपंथीकरण की ऑनलाइन व्यवस्था — जो सीमाओं से परे काम करती है — को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु-शिवमोग्गा आईएस साजिश मामला क्या है?
यह कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली में पकड़े गए एक गुप्त इस्लामिक स्टेट (आईएस) मॉड्यूल से जुड़ा मामला है, जिसे एनआईए ने 19 सितंबर 2022 के बाद अपने हाथ में लिया। इस मॉड्यूल का उद्देश्य भारत में आतंकी गतिविधियाँ अंजाम देना था और इसे एक फरार ऑनलाइन हैंडलर द्वारा संचालित किया जा रहा था।
हुजैर फरहान बेग को क्या सजा मिली?
एनआईए स्पेशल कोर्ट ने हुजैर फरहान बेग को 6 साल की कठोर कारावास और ₹58,000 जुर्माने की सजा सुनाई है। वह इस मामले में दोषसिद्ध होने वाले तीसरे आरोपी हैं।
इस मामले में ऑनलाइन हैंडलर 'कर्नल' कौन है?
ऑनलाइन हैंडलर 'कर्नल' की पहचान मोहम्मद शाहिद फैसल के रूप में हुई है, जो एनआईए के कई आतंकी मामलों में फरार आरोपी है। वह आईएस की विचारधारा फैलाने और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने व भर्ती करने का काम कर रहा था।
इस मामले में धन (फंडिंग) कैसे दिया जाता था?
जाँच के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए आरोपियों के मित्रों के खातों में फंड भेजा जाता था, जिसे बाद में फिएट करेंसी में बदलकर बेंगलुरु के ठिकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यह फंडिंग माज मुनीर अहमद ने ऑनलाइन हैंडलर के ज़रिए उपलब्ध कराई थी।
इस मामले में अब तक कितने आरोपियों को दोषी ठहराया गया है?
अब तक 3 आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है और सभी को 6 साल की कठोर कैद के साथ जुर्माना लगाया गया है। एनआईए ने कुल 12 आरोपियों के खिलाफ 4 चार्जशीट दाखिल की हैं और शेष मामलों में सुनवाई जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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