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बीरभूम खदान मालिकों पर एनआईए की जांच: जरूरत से ज्यादा विस्फोटक खरीद का मामला

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बीरभूम खदान मालिकों पर एनआईए की जांच: जरूरत से ज्यादा विस्फोटक खरीद का मामला

सारांश

बीरभूम में पत्थर खदान मालिकों द्वारा जरूरत से ज्यादा विस्फोटक खरीदने का मामला एनआईए की जांच के दायरे में आ गया है। नलहाटी में ट्रैक्टर से जब्त जिलेटिन स्टिक और डेटोनेटर का सूत्र रामपुरहाट के एक खदान मालिक तक पहुँचा, और अब सवाल यह है कि अतिरिक्त विस्फोटक आखिरकार किसके हाथों में जा रहे थे।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बीरभूम जिले , पश्चिम बंगाल के पत्थर खदान मालिकों के खिलाफ जांच शुरू की है।
नलहाटी इलाके में एक ट्रैक्टर से भारी मात्रा में जिलेटिन स्टिक, अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर बरामद किए गए, कई लोग गिरफ्तार हुए।
पूछताछ में सामने आया कि विस्फोटकों की खेप रामपुरहाट के एक पत्थर खदान मालिक ने मंगवाई थी, जिसने अपनी जरूरत से अधिक विस्फोटक खरीदे थे।
जांच में पाया गया कि बीरभूम के अन्य खदान मालिक भी इसी तरह अत्यधिक विस्फोटक खरीद रहे थे।
एनआईए की प्रमुख चिंता यह है कि कहीं अतिरिक्त विस्फोटक उग्रवादी या राष्ट्र-विरोधी तत्वों तक तो नहीं पहुँच रहे थे।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बीरभूम जिला पुलिस इस मामले में अधिक सक्रिय बताई जा रही है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पत्थर खदान मालिकों के एक वर्ग के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू की है, जो कथित तौर पर अपनी वास्तविक ब्लास्टिंग आवश्यकताओं से कहीं अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री खरीद रहे थे। मामले का सूत्रपात नलहाटी इलाके में एक ट्रैक्टर से भारी मात्रा में जिलेटिन स्टिक, अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर की बरामदगी से हुआ, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

सूत्रों के अनुसार, नलहाटी में ट्रैक्टर से जब्त विस्फोटकों की पूछताछ के दौरान गिरफ्तार व्यक्तियों ने स्वीकार किया कि यह खेप रामपुरहाट के एक पत्थर खदान मालिक ने मंगवाई थी। जांच में सामने आया कि संबंधित खदान मालिक द्वारा खरीदी गई विस्फोटक सामग्री उसकी वैध ब्लास्टिंग जरूरतों से काफी अधिक थी।

एनआईए अधिकारियों ने उस खदान मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया, और जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि वह अकेला नहीं था — जिले के अन्य खदान मालिक भी इसी तरह अत्यधिक मात्रा में विस्फोटक खरीद रहे थे।

जांच का दायरा और दूसरा चरण

केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी अब दूसरे चरण की जांच में जुटे हैं। इसमें दो प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है: पहला — क्या खदान मालिकों द्वारा जरूरत से अधिक खरीदी गई विस्फोटक सामग्री किसी तीसरे पक्ष को बेची जा रही थी, और दूसरा — इस अतिरिक्त सामग्री के अंतिम लाभार्थी कौन थे।

सूत्रों ने बताया कि एनआईए की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह अतिरिक्त विस्फोटक उग्रवादी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों या संगठनों तक तो नहीं पहुँच रही थी।

बीरभूम में विस्फोटक बरामदगी का इतिहास

यह ऐसे समय में आया है जब बीरभूम जिले में जिलेटिन स्टिक, अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर जैसी सामग्री की बरामदगी पिछले कुछ वर्षों में लगभग साप्ताहिक घटना बन गई थी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन के पश्चात बीरभूम जिला पुलिस इस मामले में अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय हुई है।

खदान क्षेत्रों में ब्लास्टिंग के लिए विस्फोटकों के उपयोग की अनुमति कड़े लाइसेंस और कोटा प्रणाली के तहत दी जाती है। एनआईए की जांच यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि इस नियामक ढांचे में किस स्तर पर चूक हुई।

आगे की संभावित दिशा

जांच एजेंसी के समक्ष अब यह महत्वपूर्ण कार्य है कि वह विस्फोटकों की आपूर्ति श्रृंखला को उसके स्रोत से लेकर अंतिम उपयोग तक ट्रेस करे। सूत्रों के अनुसार, जिले में एकाधिक खदान मालिकों की संलिप्तता की संभावना को देखते हुए जांच का विस्तार किया जा सकता है। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि विस्फोटकों के अवैध प्रवाह को नियंत्रित करना केंद्रीय एजेंसियों की प्राथमिकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एनआईए का इस बार खदान मालिकों की आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित करना यह संकेत देता है कि एजेंसी समस्या की जड़ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। असली सवाल यह है कि लाइसेंसी विस्फोटक कोटा प्रणाली की निगरानी इतने सालों तक कैसे चूकती रही। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस की सक्रियता स्वागतयोग्य है, लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या यह जांच वास्तव में अंतिम लाभार्थियों तक पहुँचती है या सिर्फ निचले स्तर के वाहकों पर ही रुक जाती है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने बीरभूम में खदान मालिकों के खिलाफ जांच क्यों शुरू की?
एनआईए ने जांच इसलिए शुरू की क्योंकि बीरभूम जिले के पत्थर खदान मालिक अपनी वैध ब्लास्टिंग जरूरतों से कहीं अधिक मात्रा में जिलेटिन स्टिक, अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर खरीद रहे थे। नलहाटी में ट्रैक्टर से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने और गिरफ्तार व्यक्तियों के बयान से यह सूत्र उजागर हुआ।
नलहाटी में क्या बरामद हुआ था?
नलहाटी इलाके में एक ट्रैक्टर से भारी मात्रा में जिलेटिन स्टिक, अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर बरामद किए गए थे। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पूछताछ में रामपुरहाट के एक पत्थर खदान मालिक का नाम सामने आया।
एनआईए जांच में सबसे बड़ी चिंता क्या है?
सूत्रों के अनुसार, एनआईए की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं अतिरिक्त विस्फोटक उग्रवादी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों या संगठनों को तो नहीं बेचे जा रहे थे। जांच यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध व्यापार के अंतिम लाभार्थी कौन थे।
बीरभूम में विस्फोटक बरामदगी की स्थिति क्या रही है?
पिछले कुछ वर्षों में बीरभूम जिले में जिलेटिन स्टिक, अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर जैसी विस्फोटक सामग्री की बरामदगी लगभग हर हफ्ते की घटना बन गई थी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन के बाद से बीरभूम जिला पुलिस इस मामले में अधिक सक्रिय बताई जा रही है।
एनआईए की जांच का अगला चरण क्या होगा?
एनआईए अधिकारी दूसरे चरण की जांच में यह पता लगाने में जुटे हैं कि अतिरिक्त विस्फोटक किसे बेचे जा रहे थे और आपूर्ति श्रृंखला में कौन-कौन शामिल था। जिले के अन्य खदान मालिकों की भी जांच की जा रही है, और एजेंसी विस्फोटकों के स्रोत से लेकर अंतिम उपयोग तक की पूरी कड़ी ट्रेस करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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