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निमरत कौर ने पिता मेजर भूपेंद्र सिंह को जन्मदिन पर किया याद, बोलीं- 'आज कमी कुछ ज़्यादा खल रही है'

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निमरत कौर ने पिता मेजर भूपेंद्र सिंह को जन्मदिन पर किया याद, बोलीं- 'आज कमी कुछ ज़्यादा खल रही है'

सारांश

निमरत कौर की यह पोस्ट सिर्फ एक जन्मदिन की याद नहीं — यह उस पिता को श्रद्धांजलि है जिन्हें 1994 में कश्मीर में आतंकवादियों ने छीन लिया था। मेजर भूपेंद्र सिंह, शौर्य चक्र विजेता, की विरासत आज भी उनकी बेटी की हर सफलता में जीवित है।

मुख्य बातें

निमरत कौर ने 25 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर पिता मेजर भूपेंद्र सिंह को उनके जन्मदिन पर भावुक श्रद्धांजलि दी।
मेजर भूपेंद्र सिंह को 17 जनवरी 1994 को कश्मीर के वेरीनाग में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकवादियों ने अगवा किया था और 23 जनवरी 1994 को उनकी हत्या कर दी गई।
उन्हें वीरता के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
उस समय निमरत महज 11 वर्ष की थीं; माँ अविनाश कौर ने दोनों बेटियों को अकेले पाला।
नवजोत सिंह सिद्धू ने पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए निमरत को 'महान विरासत की मशाल' कहा।

अभिनेत्री निमरत कौर ने 25 अक्टूबर को अपने दिवंगत पिता मेजर भूपेंद्र सिंह के जन्मदिन पर इंस्टाग्राम पर एक भावपूर्ण पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने पिता की अनुपस्थिति से उपजे खालीपन को मार्मिक शब्दों में बयाँ किया। निमरत ने लिखा कि खास मौकों पर उनकी याद और भी गहरी हो जाती है और भावनाओं को शब्दों में समेटना मुश्किल है।

भावुक संदेश और बचपन की तस्वीरें

निमरत कौर ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'पापा को जन्मदिन मुबारक हो, उनके बिना एक भी दिन गुजारना नामुमकिन नहीं था। आज उन्हें याद कर रही हूँ और उनकी कमी कुछ ज़्यादा ही खल रही है। बाकी भावनाओं को शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है।' अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने बचपन की कुछ अनमोल तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें एक छोटी-सी निमरत अपने पिता के साथ मुस्कुराती नज़र आती हैं और दूसरी तस्वीर में भारतीय सेना में मेजर भूपेंद्र सिंह के जीवन की झलक दिखती है।

मेजर भूपेंद्र सिंह: वीरता और बलिदान

मेजर भूपेंद्र सिंह भारतीय सेना में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। 17 जनवरी 1994 को एक आधिकारिक कार्य से लौटते समय कश्मीर के वेरीनाग में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया था। सात दिनों तक बंधक रहने के बाद 23 जनवरी 1994 को 44 वर्ष की आयु में उनकी हत्या कर दी गई। उनकी वीरता और बलिदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

माँ ने अकेले सँभाला परिवार

जब मेजर भूपेंद्र सिंह शहीद हुए, तब निमरत महज 11 वर्ष की थीं। पिता के जाने के बाद उनकी माँ अविनाश कौर ने निमरत और उनकी छोटी बहन रुबीना का पालन-पोषण अकेले किया — दिल्ली और नोएडा में। यह परिवार की असाधारण जीवटता की कहानी है, जो आज एक सफल अभिनेत्री की पहचान के पीछे खड़ी है।

सिद्धू का संदेश

निमरत की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने उनकी प्रशंसा करते हुए लिखा, 'एक महान विरासत की मशाल थामने वाली निमरत, चमकती रहो।' इस संदेश ने दर्शाया कि मेजर भूपेंद्र सिंह की विरासत आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।

स्मृति जो अमिट बनी रही

निमरत कौर की यह पोस्ट केवल एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि नहीं है — यह उस जज़्बे की अभिव्यक्ति है जो एक सैनिक पिता ने अपनी बेटी में छोड़ा। गौरतलब है कि निमरत कौर ने अपने करियर में कई बार अपने पिता की स्मृति को सार्वजनिक रूप से सम्मान दिया है, और हर बार उनके प्रशंसकों ने उनकी भावनाओं से गहरा जुड़ाव महसूस किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो तीन दशक बाद भी उतना ही ताज़ा है। 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में सेना के जवानों और अधिकारियों को निशाना बनाने की घटनाएँ असाधारण नहीं थीं, लेकिन मेजर भूपेंद्र सिंह की कहानी इसलिए विशेष है क्योंकि उनकी बेटी आज एक राष्ट्रीय चेहरा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस मानवीय पहलू को नज़रअंदाज़ करती है कि सैनिकों के परिवार किस मूक साहस के साथ आगे बढ़ते हैं। यह पोस्ट उस मौन बलिदान को सार्वजनिक स्वीकृति दिलाती है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निमरत कौर के पिता मेजर भूपेंद्र सिंह कौन थे?
मेजर भूपेंद्र सिंह भारतीय सेना में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। 17 जनवरी 1994 को कश्मीर के वेरीनाग में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकवादियों ने उनका अपहरण किया और 23 जनवरी 1994 को 44 वर्ष की आयु में उनकी हत्या कर दी गई। उन्हें वीरता के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
निमरत कौर ने पिता के लिए क्या लिखा?
निमरत ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि पापा के बिना एक भी दिन गुजारना नामुमकिन नहीं था और आज उनकी कमी कुछ ज़्यादा खल रही है। उन्होंने कहा कि बाकी भावनाओं को शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है।
निमरत कौर की माँ ने बेटियों को कैसे पाला?
पिता की शहादत के समय निमरत महज 11 वर्ष की थीं। उनकी माँ अविनाश कौर ने निमरत और छोटी बहन रुबीना का पालन-पोषण दिल्ली और नोएडा में अकेले किया।
शौर्य चक्र क्या है और मेजर भूपेंद्र सिंह को यह क्यों मिला?
शौर्य चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार है। मेजर भूपेंद्र सिंह को उनकी वीरता और बलिदान के सम्मान में यह पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किया गया था।
नवजोत सिंह सिद्धू ने निमरत की पोस्ट पर क्या प्रतिक्रिया दी?
नवजोत सिंह सिद्धू ने निमरत की पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, 'एक महान विरासत की मशाल थामने वाली निमरत, चमकती रहो।' उनकी यह प्रतिक्रिया मेजर भूपेंद्र सिंह की विरासत और निमरत की उपलब्धियों को श्रद्धांजलि थी।
राष्ट्र प्रेस
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