फर्जी KYC अपडेट से 50+ लोगों को ठगा, दिल्ली पुलिस ने झारखंड के धनबाद से दो आरोपी दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 25 अक्टूबर 2026 को झारखंड के धनबाद जिले से संचालित एक साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसने बैंक अधिकारी बनकर फर्जी क्रेडिट कार्ड केवाईसी अपडेट के नाम पर 50 से अधिक लोगों को शिकार बनाया। पुलिस ने दो आरोपियों — आफताब अंसारी (उम्र 24) और अब्दुल मजीद (उम्र 23) — को गिरफ्तार किया है, जिनमें से अंसारी बी.टेक स्नातक है।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
यह जाँच शाहदरा जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में तरनजीत सिंह की शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायतकर्ता ने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों ने एचडीएफसी बैंक के अधिकारी बनकर उन्हें फोन और वॉट्सऐप पर संपर्क किया और दावा किया कि वे उनके क्रेडिट कार्ड की केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी करने में सहायता करेंगे। इसके बाद उन्हें अपने क्रेडिट कार्ड पर अनधिकृत लेनदेन का पता चला।
ठगी का तरीका
पुलिस के अनुसार, आरोपियों और उनके सहयोगियों ने फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट कार्ड केवाईसी अपडेट में सहायता का विज्ञापन दिया। इच्छुक लोगों से ऑनलाइन फॉर्म भरवाकर उनकी व्यक्तिगत और संपर्क जानकारी जुटाई गई।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल पर पीड़ितों से कार्ड नंबर, सीवीवी और मोबाइल स्क्रीन साझा करने को कहा। पुलिस को संदेह है कि इससे आरोपियों को वन टाइम पासवर्ड (OTP) तक पहुँच मिली और उन्होंने अनधिकृत ऑनलाइन खरीदारी कर ली। मुख्यतः 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग इस जाल में फँसे।
जाल बिछाकर हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने पता लगाया कि विवादित क्रेडिट कार्ड से जियोमार्ट पर ₹1,39,999 मूल्य का सैमसंग गैलेक्सी S26 अल्ट्रा फोन खरीदकर धनबाद के झरिया क्षेत्र में एक डिलीवरी पते पर मँगाया गया था।
चार दिनों की निगरानी और फील्ड सत्यापन के बाद पुलिस ने एक डिलीवरी एजेंट की मदद से नकली मोबाइल फोन की डिलीवरी का जाल बिछाया। दोनों आरोपी डिलीवरी लेने पहुँचे और उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। अंसारी से दो और मजीद से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया, जिनमें वॉट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद थे।
ठगी से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल
आरोपियों ने चोरी की गई क्रेडिट कार्ड जानकारी से महँगे मोबाइल फोन खरीदे और उन्हें पकड़ से बचने के लिए झारखंड व पश्चिम बंगाल के दूरदराज के पतों पर मँगाया। चूँकि उपकरण सीलबंद थे और साथ में खरीद का बिल भी था, इसलिए ये वैध प्रतीत होते थे। बाद में इन्हें स्थानीय बाज़ारों में अपेक्षाकृत कम दामों पर बेच दिया गया।
पुलिस की सलाह और आगे की जाँच
प्रारंभिक जाँच में करीब 50 पीड़ितों की पहचान हुई है, हालाँकि पुलिस पीड़ितों की सटीक संख्या और गिरोह के अन्य सदस्यों की पुष्टि अभी भी कर रही है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे फोन या वीडियो कॉल पर किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी, ओटीपी या पिन साझा न करें और न ही मोबाइल स्क्रीन शेयर करें। जाँच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।