निशांत कुमार होंगे जदयू के भविष्य, संजय कुमार झा ने पटना में किया ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोमवार, 22 जून को पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि मंत्री निशांत कुमार ही आगे चलकर पार्टी का नेतृत्व संभालेंगे और वही जदयू का भविष्य हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने रविवार को नीतीश कुमार को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगाई।
संजय झा का बयान
संजय कुमार झा ने पत्रकारों से कहा, 'नीतीश कुमार पहले ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हो चुके थे। रविवार को राष्ट्रीय परिषद में इसका अनुमोदन किया गया।' निशांत कुमार के बारे में उन्होंने कहा, 'निशांत कुमार, जो पार्टी में शामिल हुए हैं, वही आगे पार्टी का नेतृत्व करेंगे और वही इस पार्टी के भविष्य हैं। निशांत कुमार अभी सरकार में काम कर रहे हैं और आगे संगठन में भी काम करेंगे।'
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में क्या हुआ
जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विधायक दल के नेता श्रवण कुमार और मंत्री निशांत कुमार उपस्थित रहे। अशोक चौधरी ने राजनीतिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसका मंत्री शीला मंडल ने समर्थन किया और श्रवण कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
नीतीश कुमार का निर्वाचन और सत्ता हस्तांतरण
गौरतलब है कि नीतीश कुमार को इसी वर्ष मार्च में हुए संगठनात्मक चुनावों में निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री पद छोड़कर सहर्ष सत्ता हस्तांतरण का निर्णय लेकर नीतीश कुमार ने राजनीतिक शुचिता, विश्वास और सहयोग का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है।
बिहार चुनाव में जदयू का प्रदर्शन
प्रस्ताव में दावा किया गया कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू ने 101 सीटों पर चुनाव लड़कर 85 सीटों पर जीत दर्ज की, जो पार्टी के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया गया। इसमें अति पिछड़ा, पिछड़ा वर्ग तथा अनुसूचित जाति-जनजाति समुदायों को व्यापक प्रतिनिधित्व दिए जाने का भी उल्लेख किया गया।
आगे क्या
निशांत कुमार के नाम की औपचारिक घोषणा के साथ जदयू ने उत्तराधिकार की राजनीति को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निशांत कुमार सरकार और संगठन, दोनों मोर्चों पर अपनी भूमिका कैसे निभाते हैं।