भारत की एथेनॉल मांग FY31 तक 17.9 अरब लीटर पहुंचेगी, E25 मिश्रण रहा तो 98% क्षमता उपयोग
सारांश
मुख्य बातें
भारत की एथेनॉल इंडस्ट्री अब नई क्षमता निर्माण के चरण से आगे बढ़कर मौजूदा क्षमता के अधिकतम उपयोग के दौर में प्रवेश कर चुकी है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की 23 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, यदि E25 मिश्रण नीति लागू होती है, तो देश में एथेनॉल की मांग वित्त वर्ष 2031 तक बेस केस (सामान्य परिदृश्य) में 17.9 अरब लीटर तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि 18.25 अरब लीटर की मौजूदा डिस्टिलेशन क्षमता इस मांग को पूरा करने के लिए पहले से ही पर्याप्त है।
तीन परिदृश्यों में मांग का अनुमान
ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने तीन संभावित परिदृश्यों में एथेनॉल मांग का विश्लेषण प्रस्तुत किया है। बेस केस में — जहाँ E25 मिश्रण लागू होता है — वित्त वर्ष 2031 तक मांग 17.9 अरब लीटर रहने का अनुमान है, जिससे मौजूदा क्षमता का लगभग 98 प्रतिशत उपयोग होगा।
बेयर केस (सबसे प्रतिकूल परिदृश्य) में, यदि ब्लेंडिंग E20 पर ही बनी रहती है, तो मांग घटकर 14.3 अरब लीटर रह सकती है — यानी कुल क्षमता का लगभग 78 प्रतिशत ही इस्तेमाल होगा। वहीं बुल केस (सर्वोत्तम परिदृश्य) में, यदि ब्लेंडिंग E30 के स्तर तक पहुंचती है, तो मांग 21.5 अरब लीटर तक जा सकती है, जो मौजूदा क्षमता से लगभग 18 प्रतिशत अधिक होगी।
E30 स्तर होगा निर्णायक मोड़
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि E30 का स्तर वह महत्वपूर्ण मोड़ होगा, जब यह सेक्टर मौजूदा संसाधनों के अधिकतम उपयोग से आगे बढ़कर नई क्षमता निर्माण की आवश्यकता की ओर अग्रसर होगा। इस संदर्भ में रेटिंग एजेंसी का मानना है कि ब्लेंडिंग नीति की गति ही अतिरिक्त पूंजीगत व्यय और समग्र सेक्टर विकास को निर्धारित करने वाला मुख्य कारक बनी रहेगी।
फीडस्टॉक में संरचनात्मक बदलाव
रिपोर्ट में फीडस्टॉक संरचना में एक उल्लेखनीय बदलाव की ओर ध्यान दिलाया गया है। ESY26 के पहले चरण के आवंटन में अनाज-आधारित रूट की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत रही, जबकि चीनी-आधारित रूट की हिस्सेदारी केवल 28 प्रतिशत थी। यह 2021 के एथेनॉल रोडमैप में निर्धारित 55:45 (चीनी:अनाज) के अनुपात के ठीक विपरीत है।
अकेले मक्के की हिस्सेदारी कुल आवंटन में 45.7 प्रतिशत रही। हालांकि, अनाज-आधारित डिस्टिलरीज का EBITDA मार्जिन वित्त वर्ष 2021 में 9.2 प्रतिशत से गिरकर वित्त वर्ष 2025 में 6.7 प्रतिशत रह गया है, जो फीडस्टॉक की बढ़ती लागत का दबाव स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
सेक्टर का क्रेडिट आउटलुक 'स्थिर'
रिपोर्ट में एथेनॉल सेक्टर के लिए क्रेडिट आउटलुक को स्थिर बनाए रखा गया है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं — सरकार द्वारा नियंत्रित खरीद और मूल्य निर्धारण तंत्र, E20 ब्लेंडिंग लक्ष्य की प्राप्ति, और अक्टूबर 2025 तक बैंकों व वित्तीय संस्थानों द्वारा इस सेक्टर को ₹42,000 करोड़ से अधिक की ऋण स्वीकृति।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अब सेक्टर का ध्यान क्षमता के बेहतर उपयोग, फीडस्टॉक के अनुकूलन और मौजूदा परिसंपत्तियों से लाभ अर्जित करने पर केंद्रित होगा। यदि नीतिगत गति E30 की दिशा में बढ़ती है, तो नई डिस्टिलेशन क्षमता की मांग भी उसी अनुपात में बढ़ेगी।