नितेश राणे के विवादित बयानों पर जमीयत का सख्त रुख, फडणवीस से लगाम लगाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
जमीयत उलेमा-ए-हिंद मुंबई के अध्यक्ष मौलाना सिराज अहमद खान ने 20 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के 'आई लव मोहम्मद' संबंधी बयान और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की विरोध प्रदर्शनों पर की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से माँग की कि वे राणे के विवादास्पद बयानों पर अंकुश लगाएँ और स्पष्ट रुख अपनाएँ।
भागवत के बयान पर मौलाना की आपत्ति
मौलाना सिराज अहमद खान ने कहा कि मोहन भागवत को विरोध प्रदर्शनों पर इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध करने, अपने विचार रखने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
मौलाना ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध करना अपने आप में सरकार-विरोध नहीं है। जब किसी के साथ अन्याय होता है, तो वह अपनी आवाज़ उठाता है — यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है।
आंदोलनों को 'विदेशी रंग' देने पर आरोप
मौलाना ने आरोप लगाया कि सरकारें अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए घरेलू आंदोलनों को बांग्लादेश या फ्रांस में हो रही घटनाओं से जोड़ने की कोशिश करती हैं। उनका कहना था कि यदि विरोध करने वाले युवाओं से बातचीत कर उनकी समस्याएँ सुनी जातीं, तो हालात इतने बिगड़ते नहीं।
उन्होंने 'रिजीम चेंज' की चर्चा पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों की माँगों को अलग नज़रिये से देखने के बजाय सरकार को सभी पक्षों के साथ सीधी बातचीत करनी चाहिए।
नितेश राणे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
नितेश राणे के 'आई लव मोहम्मद' संबंधी बयान पर मौलाना ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों को ज़रूरत से ज़्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि आज़ादी की लड़ाई में मुसलमानों का भी अहम योगदान रहा है और यह देश किसी एक व्यक्ति या समुदाय की जागीर नहीं है।
मौलाना के अनुसार, धार्मिक आधार पर किसी के अधिकारों पर सवाल उठाना या उसे देश से बेदखल करने की बात करना संवैधानिक भावना के सर्वथा विपरीत है। उन्होंने कहा कि भारत उन सभी नागरिकों का वतन है जो इससे मोहब्बत करते हैं।
फडणवीस से स्पष्ट रुख की माँग
मौलाना सिराज अहमद खान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से माँग की कि जब भी ऐसे विवादित बयान आएँ, तो उन्हें तुरंत स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर समुदाय को अपनी सीमाओं और जिम्मेदारियों का ध्यान रखना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में सांप्रदायिक संवेदनशीलता वाले मुद्दे बार-बार सतह पर आ रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राणे के किसी बयान पर विपक्ष और धार्मिक संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई हो।
आगे क्या
जमीयत की इस अपील के बाद अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री फडणवीस नितेश राणे के बयानों पर कोई कार्रवाई करते हैं या नहीं। राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर किस तरह की प्रतिक्रिया आती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।