मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा में लेंगे शपथ, खरमास बाद संभव इस्तीफा
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा में शपथ लेंगे।
- खरमास के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की संभावना है।
- उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से 30 मार्च को इस्तीफा दिया।
- नीतीश कुमार 'सुशासन बाबू' के नाम से जाने जाते हैं।
- उनकी कई योजनाएं देशभर में चर्चा में हैं।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। इसके बाद, जैसे ही खरमास खत्म होगा, उनका मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना संभव है। यह जानकारी मुख्यमंत्री आवास से जुड़े सूत्रों ने दी है।
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। वे 8 या 9 अप्रैल को पटना से दिल्ली जाने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद, उनका इस्तीफा 13 अप्रैल के बाद कभी भी हो सकता है, क्योंकि खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
इस परिवर्तन के साथ, बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
इसके पूर्व, नीतीश कुमार ने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हो चुके हैं, जिससे विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा लेना संवैधानिक रूप से आवश्यक हो गया था। नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं और 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
नीतीश कुमार उन नेताओं में से हैं, जिन्होंने चारों सदनों में सदस्यता प्राप्त की है। राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी इच्छा राज्यसभा की सदस्यता प्राप्त करने की थी, जिसके कारण उन्होंने यह निर्णय लिया।
नीतीश कुमार ने 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधानसभा में प्रवेश किया और 1989 में नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए।
उन्होंने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उनकी कार्यकाल के दौरान रेलवे में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए। 2005 से वे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं और 'सुशासन बाबू' के नाम से प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कई योजनाएं शुरू कीं, जिनकी पूरे देश में चर्चा हुई, जैसे शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण।