नीतीश कुमार का 20 साल का शासन: बिहार को मिली नई पहचान
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार ने 20 सालों तक बिहार का नेतृत्व किया।
- उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार का गठन किया।
- उनकी राजनीतिक यात्रा 1985 से शुरू हुई थी।
- नीतीश के इस्तीफे से बिहार की राजनीति में बदलाव आएगा।
- उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नए मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है।
पटना, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को बिहार के लोक भवन में जाकर राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके परिणामस्वरूप बिहार में एनडीए की नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, और मंत्री विजय चौधरी मुख्यमंत्री आवास से निकलकर लोक भवन पहुँचे और नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा पेश किया।
वर्तमान में चर्चा है कि बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है, हालांकि अभी तक मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। भाजपा के प्रदेश कार्यालय को सजाया गया है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की विधायक दल की बैठक भी होगी। भाजपा ने अब तक अगले मुख्यमंत्री के लिए अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस पद के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार में उनके शासन के युग के समापन की बात हो रही है। पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली बहुमत के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर चार दशकों का है। हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे अब बिहार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली की राजनीति में कदम रखेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दिया था। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1985 में जनता दल के साथ हुई थी, जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। 1994 में, नीतीश ने लालू प्रसाद के खिलाफ महत्वपूर्ण विद्रोह में भाग लिया, जिसमें 14 सांसदों ने जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में दल-बदल कर जनता दल (जॉर्ज) बनाई, जो बाद में समता पार्टी में तब्दील हो गई।
यह नीतीश कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ था, क्योंकि उन्होंने लालू से अलग होकर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का पहला दौर 2000 में हुआ था, लेकिन गठबंधन में संख्याबल की कमी के कारण उनकी सरकार सात दिन के भीतर गिर गई। 2005 में उनकी शानदार वापसी हुई, जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव के 15 साल के शासन को समाप्त किया और बिहार में 'नए दौर' की शुरुआत की। नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक तक बिना किसी गंभीर राजनीतिक चुनौती के शासन किया।