ईद-मिलाद-उन-नबी पर पटना की दरगाहों पर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने चढ़ाई चादर
सारांश
मुख्य बातें
ईद-मिलाद-उन-नबी के पावन अवसर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार, 27 अगस्त को पटना के फुलवारी शरीफ स्थित ऐतिहासिक खानकाह मुजीबिया का दौरा किया और दरगाह पर पारंपरिक चादर चढ़ाई। इसी दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी पटना सिटी के मिटन घाट स्थित खानकाह बरगाह-ए-इश्क तकिया शरीफ में चादर-पोशी की रस्म अदा की।
नीतीश कुमार का खानकाह मुजीबिया दौरा
नीतीश कुमार ने खानकाह मुजीबिया में पीर हजरत मौलाना अयातुल्लाह कादरी साहब से मुलाकात की और खानकाह के संस्थापक हजरत मौलाना पीर मुजीबुल्लाह कादरी की दरगाह पर चादर चढ़ाई। उन्होंने शांति, भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव तथा बिहार और देश की समृद्धि के लिए दुआ माँगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कई वर्षों से इस खानकाह में आते रहे हैं और इस दरगाह से उनका पुराना आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुसार यहाँ आने पर उन्हें मानसिक शांति का अनुभव होता है।
खानकाह के मैनेजर हजरत मौलाना मिन्हाजुद्दीन कादरी मुजीबी और विधायक श्याम रजक ने पूर्व मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उनके आगमन की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय निवासी वहाँ एकत्र हो गए, जिन्हें नीतीश कुमार ने ईद-मिलाद-उन-नबी की बधाई दी।
तेजस्वी यादव की दरगाह यात्रा
RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने पटना सिटी के मिटन घाट स्थित खानकाह बरगाह-ए-इश्क तकिया शरीफ में चादर चढ़ाई और बिहार की शांति, समृद्धि, खुशी एवं तरक्की के लिए प्रार्थना की। यह ऐतिहासिक दरगाह हजरत ख्वाजा रुकनुद्दीन इश्क की मज़ार है, जिसका टीपू सुल्तान के परिवार से भी ऐतिहासिक संबंध बताया जाता है।
गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने बुधवार शाम भी फुलवारी शरीफ स्थित खानकाह मुजीबिया का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई और राज्य की समृद्धि के लिए दुआ की।
दरगाहों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
खानकाह बरगाह-ए-इश्क तकिया शरीफ बिहार की सूफी परंपरा और गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक है। सालाना उर्स के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से हज़ारों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। इसी प्रकार खानकाह मुजीबिया भी पटना की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।
सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के अंत तक विधानसभा चुनाव की संभावना चर्चा में है। दोनों नेताओं की दरगाह यात्राएँ सांप्रदायिक सौहार्द और समावेशी राजनीति के प्रतीक के रूप में देखी जा रही हैं। नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की इन यात्राओं ने बिहार में आपसी भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता की परंपरा को एक बार फिर रेखांकित किया।