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नोएडा में डेंगू-मलेरिया रोकथाम: अक्टूबर में प्राधिकरण चलाएगा एंटी लार्वा स्प्रे व फॉगिंग अभियान

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नोएडा में डेंगू-मलेरिया रोकथाम: अक्टूबर में प्राधिकरण चलाएगा एंटी लार्वा स्प्रे व फॉगिंग अभियान

सारांश

मानसून के बाद के सबसे संवेदनशील महीने में नोएडा प्राधिकरण ने मोर्चा संभाल लिया है। अक्टूबर में वर्क सर्किल-01 से 05 तक के सेक्टरों और गाँवों में रोज़ाना एंटी लार्वा स्प्रे और फॉगिंग होगी। लेकिन प्राधिकरण खुद मानता है — बिना नागरिकों की भागीदारी के यह जंग अधूरी है।

मुख्य बातें

नोएडा प्राधिकरण ने अक्टूबर 2026 में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए विशेष अभियान की घोषणा की।
वर्क सर्किल-01 से वर्क सर्किल-05 तक के सेक्टरों और गाँवों में रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन एंटी लार्वा स्प्रे और फॉगिंग कराई जाएगी।
टीमें गड्ढों, नालियों, झाड़ियों और खाली भूखंडों में मच्छर प्रजनन स्थलों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करेंगी।
स्वास्थ्य निरीक्षकों और स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को दिशा-निर्देश जारी; संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश।
प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की — कूलर, गमले, टायर और छतों में पानी जमा न होने दें; संदिग्ध स्थान की सूचना अधिकारियों को दें।

नोएडा प्राधिकरण ने अक्टूबर 2026 में शहर के विभिन्न सेक्टरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए एक व्यापक विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की है। वर्क सर्किल-01 से वर्क सर्किल-05 तक के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन एंटी लार्वा स्प्रे और फॉगिंग कराई जाएगी। यह पहल ऐसे समय में आई है जब मानसून के बाद के महीनों में मच्छरों का प्रकोप सामान्यतः अपने चरम पर होता है।

अभियान का दायरा और कार्यप्रणाली

प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए अक्टूबर माह के रोस्टर के अनुसार अलग-अलग दिनों में विभिन्न सेक्टरों और ग्रामीण इलाकों को अभियान में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें संबंधित क्षेत्रों में पहुँचकर मच्छरों के प्रजनन स्थलों को चिन्हित करेंगी। विशेष रूप से गड्ढों, नालियों और अन्य स्थानों पर जमा पानी की जाँच की जाएगी।

जहाँ भी ठहरा हुआ पानी मिलेगा, वहाँ तत्काल एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया जाएगा, ताकि मच्छरों के लार्वा को पनपने से पहले ही नष्ट किया जा सके। इसके अतिरिक्त झाड़ियों, खाली पड़े भूखंडों और गंदगी वाले क्षेत्रों में भी आवश्यकतानुसार फॉगिंग की जाएगी।

प्राधिकरण की रणनीति

प्राधिकरण का स्पष्ट प्रयास है कि यह अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि मच्छरों के वास्तविक प्रजनन स्थलों की पहचान कर वहाँ प्रभावी हस्तक्षेप किया जाए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संबंधित स्वास्थ्य निरीक्षकों और स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निर्धारित रोस्टर के अनुसार अपने-अपने क्षेत्रों में फॉगिंग मशीन और एंटी लार्वा स्प्रे सहित अन्य ज़रूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कार्रवाई भी की जाएगी।

नागरिकों से अपील

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम केवल सरकारी स्तर पर किए जाने वाले छिड़काव और फॉगिंग से संभव नहीं है — इसके लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा न होने दें।

विशेष रूप से कूलर, गमले, छतें, पुराने बर्तन और टायर जैसी जगहों की नियमित सफाई करने की सलाह दी गई है, जहाँ बारिश या अन्य कारणों से पानी एकत्र हो सकता है। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय से पानी जमा हो या मच्छरों के प्रजनन की स्थिति दिखे, तो नागरिकों से संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचित करने का आग्रह किया गया है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि अक्टूबर का महीना उत्तर भारत में डेंगू और मलेरिया के मामलों के लिहाज़ से सबसे संवेदनशील माना जाता है। नोएडा जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में, जहाँ निर्माण कार्य और जलभराव की समस्या आम है, यह अभियान लाखों निवासियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्राधिकरण का अंतिम लक्ष्य नोएडा को एक स्वच्छ, स्वस्थ और मच्छरमुक्त शहर बनाना है। अभियान की सफलता काफी हद तक नागरिकों और प्रशासन के बीच समन्वय पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गुणवत्ता का है — हर साल मानसून के बाद ऐसे रोस्टर बनते हैं, पर ज़मीन पर निगरानी कितनी होती है, यह अक्सर अनुत्तरित रहता है। डेंगू के मामले केवल उन्हीं क्षेत्रों में नहीं फैलते जहाँ नालियाँ हैं, बल्कि मध्यमवर्गीय आवासीय सोसाइटियों में भी कूलर और छतों का पानी बड़ा स्रोत बनता है — जहाँ प्राधिकरण की पहुँच सीमित होती है। नागरिक भागीदारी की अपील तब तक अधूरी है जब तक शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया सरल और प्रतिक्रिया समयबद्ध न हो।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में अक्टूबर में चलने वाला डेंगू-मलेरिया रोकथाम अभियान क्या है?
नोएडा प्राधिकरण ने अक्टूबर 2026 में वर्क सर्किल-01 से 05 तक के सेक्टरों और गाँवों में रोज़ाना एंटी लार्वा स्प्रे और फॉगिंग कराने का विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के प्रसार को रोकना है।
अभियान में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल होंगे?
अभियान में नोएडा के वर्क सर्किल-01 से वर्क सर्किल-05 तक के अंतर्गत आने वाले विभिन्न सेक्टर और ग्रामीण क्षेत्र शामिल होंगे। रोस्टर के अनुसार अलग-अलग दिनों में अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई की जाएगी।
फॉगिंग और एंटी लार्वा स्प्रे किन स्थानों पर की जाएगी?
गड्ढों, नालियों और अन्य जलभराव वाले स्थानों पर एंटी लार्वा दवा का छिड़काव किया जाएगा। झाड़ियों, खाली पड़े भूखंडों और गंदगी वाले क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार फॉगिंग कराई जाएगी।
नागरिक इस अभियान में कैसे सहयोग कर सकते हैं?
नोएडा प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे कूलर, गमले, छत, पुराने बर्तन और टायर जैसी जगहों पर पानी जमा न होने दें और नियमित सफाई करें। यदि आसपास लंबे समय से पानी जमा हो या मच्छरों के प्रजनन की स्थिति दिखे, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित करें।
अक्टूबर में डेंगू-मलेरिया का खतरा क्यों अधिक होता है?
मानसून के बाद अक्टूबर का महीना उत्तर भारत में मच्छरों के प्रजनन के लिहाज़ से सबसे संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि जगह-जगह जमा बारिश का पानी मच्छरों के लार्वा पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसीलिए प्राधिकरण ने इस महीने को विशेष अभियान के लिए चुना है।
राष्ट्र प्रेस
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