उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर में दागीं रणनीतिक क्रूज मिसाइलें, न्यूक्लियर सबमरीन से परीक्षण की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने बुधवार, 15 अक्टूबर 2026 को पूर्वी सागर में पनडुब्बी से प्रक्षेपित की जाने वाली दो प्रकार की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया। विशेषज्ञों और क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, कथित तौर पर यह परीक्षण 3,000-टन श्रेणी की उस न्यूक्लियर अटैक सबमरीन से किया गया हो सकता है जिसे 2023 में लॉन्च किया गया था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के हवाले से मिली रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार, 16 अक्टूबर को इस परीक्षण की जानकारी सार्वजनिक की गई। हालांकि KCNA ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिसाइलें वास्तव में पनडुब्बी से दागी गईं या किसी अन्य परीक्षण मंच से।
KCNA के अनुसार, परीक्षण का उद्देश्य पानी के भीतर संचालित हथियार प्रणालियों की मौजूदा परिचालन तैयारी का आकलन करना था। प्योंगयांग ने दावा किया कि इस परीक्षण से नौसेना की रणनीतिक अभियान क्षमता सुदृढ़ होगी और देश की प्रतिरोधक क्षमता की विश्वसनीयता प्रमाणित होगी।
निगरानी में कौन थे
रिपोर्टों के अनुसार, इस परीक्षण की निगरानी सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य किम जोंग-सिक और मिसाइल प्रशासन के महानिदेशक जांग चांग-हा ने की। इसके अलावा नौसेना की अंडरवाटर हथियार प्रणालियों से जुड़े इंजीनियर भी परीक्षण के दौरान उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि KCNA ने मिसाइलों के नाम, उनकी मारक दूरी और परीक्षण के तकनीकी विवरण साझा नहीं किए। दक्षिण कोरिया की ओर से भी बुधवार के परीक्षण को लेकर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई।
लगातार दूसरा परीक्षण
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ जब उत्तर कोरिया ने इससे महज दो दिन पहले, सोमवार, 13 अक्टूबर को, प्योंगयांग क्षेत्र से पूर्वी सागर की ओर कई सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। KCNA ने मंगलवार को दावा किया था कि उस परीक्षण का लक्ष्य एक महत्वपूर्ण तकनीकी घटक के उन्नयन में मिली सफलता की पुष्टि करना था। यह ऐसी दूसरी बड़ी मिसाइल गतिविधि है जो एक ही सप्ताह में सामने आई है।
रणनीतिक महत्व और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
पनडुब्बी से प्रक्षेपित रणनीतिक मिसाइलों का विकास उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमताओं को विस्तार देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। ऐसी प्रणालियाँ समुद्र के भीतर से हमला करने की क्षमता प्रदान करती हैं, जिससे विरोधी देशों के लिए प्रक्षेपण स्थल का पता लगाना और समय रहते जवाबी कार्रवाई करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
आलोचकों का कहना है कि कोरियाई प्रायद्वीप में हालिया मिसाइल परीक्षणों और दोनों कोरियाई देशों के बीच बढ़ते तनाव ने समूचे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा की हैं। प्योंगयांग लगातार अपने सैन्य कार्यक्रमों को 'राष्ट्रीय प्रतिरोधक क्षमता' के संदर्भ में उचित ठहराता आया है।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परीक्षण की प्रकृति — विशेषकर न्यूक्लियर अटैक सबमरीन से प्रक्षेपण की संभावित पुष्टि — अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के लिए एक नई चुनौती खड़ी करती है। क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव उत्तर कोरिया की अगली परीक्षण गतिविधियों और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करेगा।